नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। इस बीच कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अचानक राजघाट पहुंचे। वहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर उन्हें नमन किया और श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके साथ कई अन्य विपक्षी सांसद और पार्टी के बड़े नेता भी मौजूद रहे।
सुबह-सुबह अचानक हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम से दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के राजघाट पहुंचने से पहले ही पुलिस ने इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी थी। हालात को नियंत्रण में रखने के लिए राजघाट और आसपास के इलाकों में धारा 163 लागू कर दी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की भारी भीड़ जुटाने या प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है।
राजघाट पर विपक्षी सांसदों का जमावड़ा और धरना
राजघाट परिसर के बाहर सुबह से ही नेताओं का आना-जाना शुरू हो गया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने वहां पहुंचकर महात्मा गांधी को याद किया। श्रद्धांजलि देने के बाद सभी नेता धरने पर बैठ गए और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है और संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है। नारेबाजी के बीच नेताओं ने साफ कर दिया कि उनकी यह लड़ाई तब तक रुकेगी जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं।
धरना प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को बंद कर दिया था। आम लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। राहुल और प्रियंका ने मीडिया से बात किए बिना ही अपनी बात रखी और धरने को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाया। विपक्षी दलों के इस तीखे तेवर से साफ है कि संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह धरना कुछ समय के लिए समाप्त किया गया है ताकि अगले कदमों की रूपरेखा तैयार की जा सके।
कल होने वाले बड़े प्रदर्शन की तैयारी और रणनीति
राजघाट पर आज का धरना समाप्त होने के बाद अब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल कल एक बड़े 'हल्लाबोल' की तैयारी में जुट गए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कल देश भर में और दिल्ली के प्रमुख हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन किए जाएंगे। विपक्षी दलों की रणनीति है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी आवाज को और तेज किया जाए। इसके लिए सभी राज्यों के बड़े नेताओं को भी दिल्ली बुलाए जाने की खबर है ताकि इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी धार दी जा सके।
जमीनी स्तर पर हमारी टीम ने पाया कि राजघाट के आसपास भारी पुलिस बल तैनात होने के बावजूद राजनीतिक हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि बार-बार लगने वाले जाम और पुलिस पहरे से उनका रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है। हालांकि, राजनीतिक कार्यकर्ता अपनी जिद पर अड़े हैं और प्रशासन अपनी पाबंदियों पर कायम है। आने वाले घंटों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि विपक्ष पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है।
प्रशासन की सख्ती और आगे के हालात पर नजर
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि धारा 163 के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। बिना अनुमति के किसी भी जुलूस या सभा की इजाजत नहीं दी जाएगी। यदि नियम तोड़े गए तो पुलिस कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह उनकी आवाज दबाने की साजिश है जिसे वे कभी कामयाब नहीं होने देंगे। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और पल-पल की जमीनी सच्चाई आप तक पहुंचाती रहेगी।








