नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा के बैनर तले कई युवा और छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग देश के चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर है। छात्रों का साफ कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में काम करने वाले लोगों को पूरी तरह निष्पक्ष और जवाबदेह होना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान जंतर मंतर पर मौजूद छात्रों और युवाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने मंच से कहा कि देश की चुनावी प्रणाली पर आम जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी काम है। यदि चुनाव संचालन से जुड़े शीर्ष पदों पर बैठे लोग सवालों के घेरे में आएंगे, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर होगी। आइसा के नेताओं ने मांग की कि ऐसे लोगों को तुरंत हटाया जाए जो निष्पक्ष रूप से काम करने में असफल रहे हैं।
जंतर मंतर पर छात्रों का गुस्सा और तीखे सवाल
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों का कहना था कि वे केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों की कार्यशैली पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रही है। विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और जनता के सवालों के स्पष्ट जवाब दें।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों ने जंतर मंतर के आसपास बैरिकेडिंग कर रखी थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हालांकि, प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ा और छात्रों ने अपनी बात खुलकर मीडिया और प्रशासन के सामने रखी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा रही है।
विपक्ष की रणनीति और चुनावी राज्यों की हलचल
दूसरी तरफ, देश के अन्य हिस्सों में भी राजनीतिक उठापटक जारी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपना मतदान कर लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने आम नागरिकों से भी बड़ी संख्या में बाहर आकर मतदान करने की अपील की। चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक दलों के नेता लगातार जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग के खिलाफ उठ रही आवाजें और देश भर में चल रहे विभिन्न राजनीतिक आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी नीतियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रख रहा है, वहीं विपक्ष और छात्र संगठन चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।



