नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में चुनावी व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा है कि विपक्ष उनका इस्तीफा लेकर ही दम लेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि इस लड़ाई में चाहे जितना भी वक्त लगे, आंदोलन थमेगा नहीं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसी बात को लेकर विपक्षी गठबंधन अब आर-पार के मूड में दिखाई दे रहा है।
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद भारी हलचल देखी जा रही है। इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने पिछले आठ दिनों के भीतर कई अहम बैठकें की हैं। इन बैठकों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। राहुल गांधी का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख बचाना अब सबसे जरूरी हो गया है। अगर संस्थाओं की निष्पक्षता खत्म होगी तो लोकतंत्र कमजोर पड़ जाएगा। इसी वजह से विपक्ष अब सड़क पर उतरकर जनता के बीच जाने का मन बना चुका है।
कनॉट प्लेस में विपक्षी नेताओं का भारी जमावड़ा
राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में बीते दिन भारी सुरक्षा देखने को मिली। वहां के एक मशहूर रेस्टोरेंट के बाहर दिल्ली पुलिस ने कड़े पहरे का इंतजाम किया था। चारों तरफ लोहे के बैरिकेड्स लगा दिए गए थे। वहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में विपक्षी दलों के कई बड़े नेता जुटे थे। इस बैठक में चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की साझा रणनीति पर लंबी बातचीत हुई। बैठक के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि चुनाव आयुक्त के मुद्दे को अब देशव्यापी स्तर पर उठाया जाएगा।
बैठक में मौजूद नेताओं का कहना था कि वे इस लड़ाई को बीच में नहीं छोड़ेंगे। संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार को घेरा जाएगा। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि कई सीटों पर चुनावी नियमों की अनदेखी की गई। शिकायतों के बाद भी चुनाव आयोग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस रवैये से विपक्ष में भारी नाराजगी है। राहुल गांधी ने बैठक में सभी सहयोगियों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे देश के मतदाताओं के हक की है।
अमित शाह का पलटवार और कांग्रेस पर तीखा तंज
विपक्ष के इन हमलों पर केंद्र सरकार ने भी जोरदार पलटवार किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा है। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस अपनी पुरानी हारों का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़ रही है। उन्होंने कहा कि नए नियम तो साल 2024 में लागू हुए हैं, जबकि कांग्रेस तो उससे बहुत पहले से चुनाव हार रही है। गृह मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस साल 2029 का लोकसभा चुनाव भी बुरी तरह हारेगी।
भाजपा नेताओं का कहना है कि जब भी विपक्ष चुनाव हारता है, वह संस्थाओं की साख पर सवाल उठाने लगता है। सत्तापक्ष का तर्क है कि देश की जनता ने प्रधानमंत्री के काम और विकास नीतियों पर भरोसा जताया है। विपक्ष जनादेश का सम्मान करने के बजाय बहाने ढूंढ रहा है। गृह मंत्री के इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग और ज्यादा तीखी हो गई है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और उस पर दबाव बनाना पूरी तरह गलत है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की सुरक्षा का मामला
यह विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। इस याचिका में चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने वाले नए प्रावधान को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मसले पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों से औपचारिक जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को कानूनी जवाबदेही से पूरी तरह बाहर नहीं रखा जा सकता।
अदालत में चल रही इस कानूनी लड़ाई पर भी विपक्ष पूरी नजर बनाए हुए है। कानूनी जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है। अगर अदालत नए कानून के नियमों पर सवाल उठाती है, तो विपक्ष का हौसला और बढ़ जाएगा। वहीं सरकार की दलील है कि अधिकारियों को बिना किसी डर के काम करने के लिए कानूनी सुरक्षा जरूरी होती है। अब अदालत के अगले कदम पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
सड़क से संसद तक आंदोलन तेज करने की तैयारी
इंडिया गठबंधन अब इस मुद्दे को लेकर राज्यों में भी बड़ी रैलियां करने की योजना बना रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे हर जिले में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेंगे। जनता को बताया जाएगा कि उनके वोट का अधिकार कितना कीमती है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवा और छात्र संगठनों को भी साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष का दावा है कि जब तक चुनाव आयोग में जरूरी सुधार नहीं होंगे, वे चुप नहीं बैठेंगे।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बनी यह सियासी तनातनी जल्द खत्म होने वाली नहीं है। एक तरफ विपक्ष अपने आंदोलन को तेज करने के लिए तारीखें तय कर रहा है। दूसरी तरफ सत्तापक्ष भी विपक्ष के हर आरोप का आक्रामक तरीके से जवाब देने के लिए तैयार खड़ा है। आने वाले दिनों में यह टकराव संसद के आगामी सत्र में भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।










