भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करने का ऐलान कर दिया है। यह साल 2023 के बाद पहली बार है जब ब्याज दरों में इस तरह की बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के बाद अब रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत पहुंच गया है। बैंक के इस कदम से उन लोगों की चिंता बढ़ गई है जिन्होंने बैंक से किसी भी तरह का कर्ज ले रखा है।
पिछले करीब साढ़े तीन से चार साल तक ब्याज दरें स्थिर बनी हुई थीं या उनमें किसी तरह की बड़ी बढ़ोतरी नहीं देखी जा रही थी। लेकिन अब महंगाई और बाजार के हालातों को देखते हुए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने यह सख्त कदम उठाया है। इस फैसले के तुरंत बाद देश के सभी कमर्शियल बैंक भी अपने लोन की ब्याज दरों में इजाफा करने की तैयारी शुरू कर चुके हैं।
महंगा हो जाएगा आपका होम लोन और कार लोन
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर देश का केंद्रीय बैंक अन्य व्यावसायिक बैंकों को कर्ज देता है। जब भी रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए भी आगे से पैसा जुटाना महंगा हो जाता है। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। अब इस ताजा बढ़ोतरी के बाद आपके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ जाएंगी।
बैंकों द्वारा लोन की दरें बढ़ाए जाने से हर महीने चुकाई जाने वाली ईएमआई यानी किस्त का बोझ बढ़ जाएगा। जिन लोगों ने हाल ही में नया घर या गाड़ी खरीदने के लिए बैंक से बड़ा कर्ज लिया है, उन्हें अब हर महीने पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव ग्राहकों के मासिक बजट को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
रियल एस्टेट बाजार और आम आदमी पर पड़ेगा सीधा असर
ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी का असर केवल व्यक्तिगत ऋण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका बड़ा प्रभाव रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ेगा। जब होम लोन महंगा हो जाता है, तो आम लोग नया फ्लैट या मकान खरीदने का विचार टाल देते हैं। इससे प्रॉपर्टी बाजार में सुस्ती आ सकती है और मकानों की मांग में कमी देखने को मिल सकती है।
आम मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है क्योंकि पहले ही रसोई से लेकर रोजमर्रा की चीजें महंगी चल रही हैं। ऐसे में लोन की ईएमआई बढ़ जाने से घर का पूरा बजट बिगड़ जाएगा। परिवारों को अब अपने खर्चों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ेगा ताकि वे बैंक की बढ़ी हुई किस्त समय पर चुका सकें।
बैंकों की जमा दरों पर भी दिखेगा इसका मिलाजुला असर
एक तरफ जहां कर्ज लेने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं, वहीं दूसरी तरफ बैंक में पैसा जमा करने वाले यानी एफडी कराने वाले निवेशकों को थोड़ी राहत मिल सकती है। जब बैंक रेपो रेट बढ़ने के कारण लोन महंगा करते हैं, तो वे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज में भी थोड़ा इजाफा करते हैं।
द फ्रीलान्स की टीम द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों में देश के सभी बड़े बैंक अपनी नई ब्याज दरों की आधिकारिक सूची जारी कर देंगे। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंक से संपर्क करके यह समझ लें कि उनकी ईएमआई पर इस बदलाव का कितना और कब से असर पड़ने वाला है।
भविष्य की आर्थिक चाल और आरबीआई का अगला कदम
केंद्रीय बैंक देश में बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए लगातार ऐसे कदम उठा रहा है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई पर पूरी तरह काबू नहीं पाया गया, तो ब्याज दरों में आगे भी कुछ और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि देश के प्रमुख बैंक जैसे एसबीआई, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन की नई दरें कब से लागू करते हैं। आम जनता को अब अपने वित्तीय लेन-देन और मासिक खर्चों की योजना बहुत ही सावधानी के साथ बनानी होगी।





