नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट। संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों और मणिपुर के मामलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह नेताओं के तीखे बयान सामने आ रहे हैं। इस माहौल में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर बहुत कड़ा पलटवार किया है।
संसद की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने विपक्ष के नेताओं से सीधा सवाल किया। उन्होंने पूछा कि राजस्थान और बिहार में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर इंडिया गठबंधन के नेता कब अपनी चुप्पी तोड़ेंगे। ईरानी ने कहा कि देश की जनता सब देख रही है और सिर्फ चुनिंदा राज्यों के मुद्दों पर राजनीति करना ठीक नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी को घेरते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर इस तरह का राजनीतिक ड्रामा अब नहीं चलेगा।
संसद में मणिपुर और दिल्ली प्रोटेस्ट पर गरमाई सियासत
विपक्ष लगातार सरकार से मणिपुर के हालात पर जवाब मांग रहा है। संसद में इसी मुद्दे पर हंगामा करने के बाद बाहर भी विरोध प्रदर्शन किए गए। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इसके जवाब में बीजेपी के सांसदों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। केंद्रीय मंत्रियों ने सदन के अंदर और बाहर आकर विपक्ष के इन तेवरों को पूरी तरह राजनीतिक स्टंट बताया है।
स्मृति ईरानी ने प्रेस और संसद में अपने संबोधन के दौरान कहा कि विपक्ष देश की गंभीर समस्याओं पर केवल राजनीति करना जानता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब देश के दूसरे हिस्सों में कानून व्यवस्था बिगड़ती है, तब ये दल चुप रहते हैं। राहुल गांधी के दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट में शामिल होने पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जनता इस दोहरी नीति को अच्छी तरह समझ चुकी है।
मंगल पांडे की जयंती और नेताओं की श्रद्धांजलि
एक तरफ संसद में राजनीतिक घमासान चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के महान क्रांतिकारी मंगल पांडे को याद करने का सिलसिला भी जारी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेताओं ने क्रांतिकारी मंगल पांडे को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। नेताओं ने कहा कि देश की आजादी के लिए मंगल पांडे का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
देशभर में स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने के इन कार्यक्रमों के बीच राजनीतिक दलों की अपनी प्राथमिकताएं भी साफ दिख रही हैं। एक तरफ जहां सरकार विकास और ऐतिहासिक गौरव की बात कर रही है, वहीं विपक्ष लगातार बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर यह टकराव और अधिक तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
आगे की राजनीतिक रणनीति और INDIA गठबंधन का रुख
मानसून सत्र के बचे हुए दिनों में दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिखते हैं। इंडिया गठबंधन के तमाम बड़े नेता एकजुट होकर सरकार के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी और उसके सहयोगी दल भी विपक्ष के हर हमले का आक्रामक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जमीनी स्तर पर भी इन राजनीतिक वार्ताओं का असर साफ देखा जा सकता है, जहां कार्यकर्ता भी अपने अपने नेताओं के समर्थन में उतर आए हैं।







