नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा पुराना तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक गुप्त रणनीति का खुलासा हुआ है। इस रणनीति के तहत अमेरिकी सेना ईरान के ठिकानों पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब' यानी जीबीयू-43/बी मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट का इस्तेमाल कर सकती है। यह अब तक का सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम माना जाता है।
ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, हाल ही में हुए एक अमेरिकी हमले में सात ईरानी सैनिक मारे गए हैं। इसके बाद ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी ने बेहद आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस खूनखराबे का कड़ा बदला लेगा। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस वाशिंगटन की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि ईरानी सेना अमेरिकी बेड़े को निशाना बनाने की फिराक में है, जिससे समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा पैदा हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में मंडराता बड़ा खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। ईरान और ओमान के बीच हालिया वार्ताओं और समझौतों के बावजूद इस इलाके में तनाव कम नहीं हो रहा है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत इस इलाके में लगातार गश्त कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर किसी भी तरह का हमला किया, तो अमेरिका की तरफ से इसका बहुत ही भयानक सैन्य जवाब दिया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और पेंटागन के बीच ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं। ट्रंप की युद्धनीति से जुड़े कुछ गुप्त दस्तावेज लीक होने के बाद यह साफ हो गया है कि अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य अड्डों को नेस्तनाबूद करने की बड़ी योजना बना रहा है। अमेरिका का यह कदम पश्चिम एशिया को एक भीषण युद्ध की आग में झोंक सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारत के लिए इस जंग के क्या हैं मायने?
इस संभावित युद्ध का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहने वाला है। भारत के लिए यह स्थिति बहुत चिंताजनक है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगवाता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध छिड़ता है, तो भारत में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में काम कर रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है और हालात पर करीबी नजर रख रही है।
दूसरी ओर, अमेरिका के साथ आर्थिक मोर्चे पर भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। हाल ही में एक बड़ी भारतीय कंपनी ने अमेरिका में इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट लगाने का ऐलान किया है। एक तरफ जहां भारत अमेरिका के साथ बड़े व्यावसायिक समझौते कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ उसकी पारंपरिक और ऊर्जा से जुड़ी साझेदारी भी बहुत अहम है। भारत कूटनीतिक संतुलन बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है ताकि इस संकट के बीच उसके राष्ट्रीय हितों को कोई नुकसान न पहुंचे।
आई-आर-जी-सी की जवाबी कार्रवाई की धमकी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी ने अमेरिकी धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सैन्य नेतृत्व का कहना है कि वे किसी भी अमेरिकी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सात ईरानी सैनिकों की मौत के बाद ईरान के भीतर अमेरिका के खिलाफ भारी जनआक्रोश देखा जा रहा है। जनता सड़कों पर उतरकर अमेरिकी नीतियों का विरोध कर रही है और सरकार से कड़े फैसले लेने की मांग कर रही है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम एशिया के लिए बेहद नाजुक होने वाले हैं। अगर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते बंद होते हैं, तो दुनिया को एक विनाशकारी युद्ध का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संगठन हालात को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर युद्ध की तैयारियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।










