नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। विपक्षी नेताओं के हालिया प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की कुछ तस्वीरें सामने आई थीं। अब यही तस्वीरें सियासी गलियारों में बड़ा हथियार बन चुकी हैं। कांग्रेस पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि आगामी 8 अक्टूबर को दिल्ली में 'काला दिवस' मनाया जाएगा। पार्टी के शीर्ष नेताओं का कहना है कि सरकार की तानाशाही के खिलाफ यह देशव्यापी और सड़क पर उतरकर किया जाने वाला विरोध होगा।
घटना की शुरुआत तब हुई जब विपक्ष का एक सामान्य लंच प्रोग्राम अचानक एक फ्लैश प्रोटेस्ट में बदल गया। पुलिस और सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस दौरान पुलिस की बस में बैठे राहुल गांधी और अन्य नेताओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई हैं। कांग्रेस इन तस्वीरों को पुलिसिया ज्यादती और अलोकतांत्रिक कार्रवाई का सबूत बता रही है। पार्टी का साफ कहना है कि जनता की आवाज दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।
लंच से सड़क तक कैसे पहुंचा विरोध प्रदर्शन?
राजधानी दिल्ली में बुधवार का दिन राजनीतिक उठापटक से भरा रहा। इंडिया ब्लॉक के तमाम सांसद एक तय कार्यक्रम के तहत दोपहर के भोजन पर मिले थे। लेकिन लंच के बाद अचानक स्थिति बदल गई और सभी सांसद राजघाट की ओर मार्च करने लगे। देखते ही देखते यह एक बड़ा फ्लैश प्रोटेस्ट बन गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बस के अंदर नजर आए और उनके साथ कई अन्य विपक्षी सांसद भी मौजूद थे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक लिया और हिरासत में ले लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान वहां भारी गहमागहमी देखने को मिली।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पूरी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार को भी छीना जा रहा है। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को सद्बुद्धि मिले ताकि वह विपक्ष की आवाज सुन सके। हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया कि वे डरने वाले नहीं हैं। उनका यह विरोध अब केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सड़कों पर बड़े आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।
8 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। आगामी 8 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े पैमाने पर 'काला दिवस' मनाने का फैसला लिया गया है। इस दिन पार्टी के कार्यकर्ता और नेता हाथों में काली पट्टी बांधकर सड़कों पर उतरेंगे। वे पुलिस कार्रवाई और सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे। दिल्ली पुलिस ने भी इस प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए जा सकते हैं ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहा है। विपक्षी खेमे का मानना है कि राहुल और प्रियंका की ये तस्वीरें जनता के बीच सहानुभूति और समर्थन दोनों जुटाएंगी। आम जनता भी इस बात पर चर्चा कर रही है कि आखिर राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर इस तरह की सख्ती क्यों बरती जा रही है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में तेज होती जुबानी जंग
घटना के बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। एक तरफ जहां कांग्रेस इसे आपातकाल जैसे हालात बता रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ दल का कहना है कि कानून का पालन करना हर नागरिक और नेता की जिम्मेदारी है। पुलिस प्रशासन का पक्ष है कि बिना अनुमति के मार्च निकालने और धारा 144 का उल्लंघन करने के कारण यह कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि, इन तर्कों के बावजूद विपक्ष तस्वीरों को आधार बनाकर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
अब सबकी नजरें 8 अक्टूबर पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली की सड़कों पर कांग्रेस का यह 'काला दिवस' किस रूप में सामने आता है और प्रशासन इससे कैसे निपटता है। राहुल और प्रियंका की ये तस्वीरें आने वाले चुनावों और राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा असर छोड़ सकती हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग बताती है कि जनता के बीच इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है, लेकिन सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।





