नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में इन दिनों त्योहारों की रौनक के बजाय सियासी हलचल और पुलिस का पहरा दिखाई दे रहा है। त्योहारों का सीजन बाजार के लिए साल का सबसे कमाई वाला समय होता है, लेकिन लगातार हो रहे प्रदर्शनों और मार्च के ऐलान ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से कनॉट प्लेस में राजनीतिक दलों और संगठनों की गतिविधियों के कारण ग्राहकों का आना-जाना बहुत कम हो गया है। हालात यह हैं कि दुकानों पर ग्राहकों का इंतजार कर रहे दुकानदार खाली हाथ बैठने को मजबूर हैं और उनका सारा माल गोदामों में ही अटका हुआ है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब अभिजीत दिपके के नेतृत्व में सीजेपी संगठन ने कनॉट प्लेस में एक बड़ा तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया। इस मार्च के जरिए लोगों से बड़ी संख्या में जुड़ने की अपील की गई थी, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। दूसरी तरफ, एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने भी कनॉट प्लेस के बीचों-बीच जोरदार प्रदर्शन किया जिसमें महिला कार्यकर्ता भी पुलिस के साथ तीखी झड़प में शामिल रहीं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा।
त्योहारी सीजन में प्रदर्शनों से ठप हुआ कारोबार
बाजार के व्यापारियों ने अपनी मार्मिक पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा है कि यह साल का वह समय होता है जब वे पूरे साल के घाटे को पूरा करते हैं। लेकिन बार-बार होने वाले इन प्रदर्शनों और धरना-मार्च के कारण खरीदार कनॉट प्लेस आने से बच रहे हैं। सुरक्षा कारणों से बैरिकेडिंग और रास्तों को बंद किए जाने के कारण लोग वैकल्पिक बाजारों का रुख कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को प्रदर्शन के लिए कोई और जगह तय करनी चाहिए ताकि मुख्य व्यावसायिक केंद्रों पर आने वाले आम नागरिकों और दुकानदारों का नुकसान न हो।
इस पूरे विवाद के बीच कानूनी लड़ाई भी अदालत तक जा पहुंची जहाँ सीजेपी के तिरंगा मार्च को रोकने के लिए याचिका दायर की गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मार्च पर सीधे तौर पर रोक लगाने से तो इनकार कर दिया, लेकिन साफ कर दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। अदालत ने पुलिस को इस मामले में पूरी छूट यानी फ्री हैंड दे दिया है कि वे स्थिति के अनुसार कड़े कदम उठाएं। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आयोजकों को सख्त चेतावनी जारी कर दी है कि यदि नियम तोड़े गए तो कानूनी कार्रवाई से कोई नहीं बचेगा।
पुलिस की सख्त चेतावनी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अपनी रुख को बेहद सख्त कर लिया है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। कनॉट प्लेस के सभी इन-और-आउट पॉइंट्स पर पुलिस की पिकेट्स लगा दी गई हैं और हर आने-जाने वाले संदिग्ध व्यक्ति की कड़ी तलाशी ली जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वे शहर की शांति भंग नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए आयोजकों को हिरासत में ही क्यों न लेना पड़े। पुलिस अधिकारियों लगातार मार्च के रूट और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर ड्रोन कैमरे से भी नजर रख रहे हैं ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि आम जनता और पर्यटक जो खरीदारी के लिए कनॉट प्लेस पहुंचते थे, वे इस भारी पुलिस बल को देखकर वापस लौट रहे हैं। रेस्तरां, कैफे और कपड़ों के बड़े शोरूम संचालकों का कहना है कि उनकी बिक्री में पचास प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। त्योहारी सीजन के शुरुआती दिनों में ही ऐसा सन्नाटा छा जाना व्यापारियों के लिए बहुत बड़ा आर्थिक झटका साबित हो रहा है। वे लगातार प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि कम से कम त्योहार के इन दिनों में राजनीति और प्रदर्शनों से बाजार को मुक्त रखा जाए ताकि उनका कारोबार बच सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और निष्कर्ष
द फ्रीलान्स की टीम ने जब कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्किल का दौरा किया तो दुकानदारों के चेहरों पर साफ निराशा दिखाई दी। ग्राहकों की कमी के कारण सेल्समैन और दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर खड़े होकर सिर्फ हालात का जायजा ले रहे थे। एक तरफ जहाँ देश प्रेम और तिरंगा यात्रा जैसे आयोजन नागरिकों के लिए गर्व का विषय होते हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यापारिक केंद्रों में इनका आयोजन अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन जाता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी दिनों में प्रशासन इस स्थिति को कैसे संभालता है और क्या व्यापारी अपने नुकसान की भरपाई कर पाएंगे।








