हैदराबाद/नांदेड़/राजमुंदरी — दक्षिण भारत की जीवनरेखा मानी जाने वाली गोदावरी नदी इन दिनों गंभीर सुरक्षा चिंताओं के चलते चर्चा में है। महाराष्ट्र के नांदेड़ से लेकर आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी तक नदी में डूबने और पुलों से कूदने की कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष है। लोग नदी के प्रमुख पुलों पर सुरक्षा जाली लगाने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने भी अब संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं।
बीते कुछ दिनों में नदी तटों पर अलग-अलग राज्यों से परेशान करने वाली खबरें आई हैं। महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में एक सरकारी शिक्षक ने मानसिक तनाव के चलते अपनी कार दो बच्चों समेत गोदावरी नदी में उतार दी। शिक्षक ने इस कदम से पहले सोशल मीडिया पर एक संदेश छोड़ा था। इसमें शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। पुलिस और गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद नदी से शव और गाड़ी बाहर निकाली। इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।
नांदेड़ की घटना ने उठाए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
नांदेड़ जिले के विष्णुपुरी इलाके के पास हुई इस घटना में शिक्षक के दो मासूम बच्चे भी शिकार बन गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार बहुत तेज रफ्तार में सीधे नदी के गहरे पानी में चली गई। जब तक आसपास के नाविक और मछुआरे कुछ समझ पाते, गाड़ी पूरी तरह डूब चुकी थी। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे। कई घंटों के बचाव अभियान के बाद कार को क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया। मृतक शिक्षक के परिजनों ने शिक्षा विभाग के कुछ अफसरों के खिलाफ लिखित शिकायत दी है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
इस घटना के बाद शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से तबादले और गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर शिक्षकों पर बेवजह दबाव बनाया जा रहा था। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि इस त्रासदी ने पूरे राज्य में शिक्षकों के कार्यस्थल के मानसिक तनाव पर एक नई बहस छेड़ दी है।
आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी पुल पर बचाव दल मुस्तैद
उधर आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में गोदावरी के प्रसिद्ध पुल पर भी एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया। यहां एक परिवार के सदस्यों ने नदी में छलांग लगा दी। गनीमत रही कि नदी में काम कर रहे स्थानीय मछुआरों ने तुरंत तत्परता दिखाई। मछुआरों ने पानी में कूदकर एक मासूम बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन परिवार के बाकी सदस्यों की जान नहीं बचाई जा सकी। मृतकों में पंचायती राज विभाग के एक पूर्व कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। आर्थिक तंगी और पारिवारिक विवाद को इस कदम की मुख्य वजह माना जा रहा है।
राजमुंदरी के पुराने रेलवे पुल और नए सड़क पुल पर पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलों की रेलिंग काफी नीची है। वहां कोई सुरक्षा जाल नहीं लगा है। देर रात के समय पुलों पर पुलिस गश्त भी बेहद कम होती है। स्थानीय गोताखोरों की टीम ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे एक त्वरित बचाव केंद्र बनाया जाए। यदि समय पर सूचना और बोट मिल जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
पुलों पर सुरक्षा जाली और सीसीटीवी लगाने की तेज हुई मांग
नदी में बढ़ती दुर्घटनाओं और खुदकुशी की घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक संगठनों ने आवाज उठाई है। नांदेड़, राजमुंदरी और भद्राचलम जैसे शहरों में गोदावरी के पुलों पर ऊंची लोहे की जालियां लगाने की मांग हो रही है। ठीक उसी तरह जैसे कई अन्य बड़े शहरों के संवेदनशील पुलों पर लगाई गई हैं। इसके अलावा पुलों के दोनों छोर पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। इससे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि पर समय रहते नजर रखी जा सकेगी।
स्थानीय नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से इन इलाकों का दौरा करना शुरू किया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि प्रमुख पुलों पर सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही नदी में अवैध रूप से नहाने वालों पर भी सख्ती बरती जाएगी। अक्सर त्योहारों और छुट्टियों के दिनों में गहरे पानी में जाने से भी कई युवक डूब जाते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



