नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों ज्योतिष से जुड़े विषयों की धूम मची है। गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के अनुसार भारत में 'राज योग' विषय पर भारी सर्च वॉल्यूम देखा जा रहा है। मुख्यधारा की कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि अक्टूबर महीने में आसमान में ग्रहों की चाल बदलने से कई बड़े राजयोग बन रहे हैं। इन रिपोर्टों के अनुसार, बुधादित्य और महालक्ष्मी जैसे योगों के सक्रिय होने से कुछ चुनिंदा राशि के लोगों के जीवन में अचानक धन लाभ, वाहन सुख और नौकरी में तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। आम भाषा में कहें तो लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या वास्तव में ग्रहों की स्थिति उनके बैंक बैलेंस को बढ़ा सकती है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अक्टूबर के पहले सप्ताह से ही इन योगों का असर शुरू हो चुका है। अमर उजाला और जनसत्ता जैसे समाचार संस्थानों की रिपोर्टों में बताया गया है कि वृषभ, कर्क, तुला, मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों को इस दौरान विशेष लाभ मिल सकता है। कहीं सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग बनने की बात कही जा रही है, तो कहीं चंद्रमा और मंगल के मिलन से महालक्ष्मी राजयोग के निर्माण का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया और न्यूज वेबसाइट्स पर इन भविष्यवाणियों को लेकर पाठकों के बीच खासी जिज्ञासा बनी हुई है और लोग अपनी-अपनी राशि के बारे में विस्तार से पढ़ना पसंद कर रहे हैं।
अक्टूबर महीने में कौन-कौन से योग बना रहे हैं हलचल?
पड़ताल करने पर सामने आया कि मीडिया में इन दिनों मुख्य रूप से चार बड़े राजयोगों की चर्चा हो रही है। इनमें चार अक्टूबर को बनने वाले चंद्र-मंगल योग और सत्रह अक्टूबर को सूर्य-बुध के मेल से बनने वाले बुधादित्य राजयोग का जिक्र प्रमुखता से किया जा रहा है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि दिवाली के आसपास भी कुछ खास ग्रहों की स्थिति से धन लाभ के योग मजबूत होंगे। ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखने वाले लोग इन तारीखों को खास मानकर चल रहे हैं और अपनी आर्थिक योजनाओं को इन्हीं मान्यताओं के आधार पर देखने लगे हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता है, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं के चलते लोग इनमें गहरी आस्था रखते हैं।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब बाजार और आम लोगों के बीच जाकर यह समझने की कोशिश की कि इन खबरों का जनता पर क्या असर हो रहा है, तो मिले-जुले रिएक्शन सामने आए। दिल्ली के एक बाजार में दुकान चलाने वाले रमेश कुमार ने बताया कि वे इन ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को सिर्फ मनोरंजन या एक उम्मीद के तौर पर देखते हैं। उनका कहना है कि कड़ी मेहनत के बिना जीवन में कुछ नहीं मिलता, लेकिन अच्छे समय की बात सुनना किसे अच्छा नहीं लगता। वहीं कुछ युवा वर्ग के लोगों का मानना है कि आज के दौर में इन सब बातों पर आँख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता, यह केवल पाठकों को आकर्षित करने का एक जरिया मात्र है।
ज्योतिषीय दावों और हकीकत के बीच का फर्क
पत्रकारिता के लिहाज से यह देखना जरूरी है कि इस तरह के ट्रेंड्स समाज को किस दिशा में ले जाते हैं। जब भी मीडिया में किसी राजयोग या शुभ घड़ी की बात आती है, तो सर्च इंजन पर अचानक ट्रैफिक बढ़ जाता है। लोग यह तलाशने लगते हैं कि उनकी किस्मत का ताला कब खुलेगा। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में लोग मानसिक शांति और एक बेहतर भविष्य की उम्मीद के लिए ऐसी खबरों की तरफ खिंचे चले आते हैं। मीडिया संस्थान भी पाठकों की इसी मनोवैज्ञानिक कमजोरी को समझकर ऐसे विषयों को प्रमुखता से परोसते हैं, जिससे क्लिक्स और विज्ञापन दोनों मिल सकें।
अंत में यही कहा जा सकता है कि 'राज योग' जैसे विषय भले ही गूगल ट्रेंड्स में शीर्ष पर बने हों और लोगों के बीच चर्चा का बड़ा केंद्र हों, लेकिन जमीन पर हकीकत मेहनत और काम से ही तय होती है। द फ्रीलान्स की इस पड़ताल से यह साफ होता है कि इस तरह की खबरें केवल ज्योतिषीय अनुमानों पर आधारित होती हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होता। पाठक इन खबरों को एक हल्की-फुल्की जानकारी के रूप में ले सकते हैं, लेकिन अपने जीवन के बड़े आर्थिक फैसले लेते समय केवल ज्योतिष पर निर्भर रहना समझदारी नहीं होगी।










