जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक गलियारों से एक चौंकाने वाला वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। इस वीडियो में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव रंजन एक सरकारी बैठक के दौरान अपने मातहत काम करने वाली महिला जेकेएएस अधिकारी पर जमकर गुस्सा निकालते दिख रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया कि अधिकारी ने भरी मीटिंग में ही महिला अफसर को सीधे तौर पर सस्पेंड करने की धमकी तक दे डाली। इस पूरी घटना का किसी ने चुपके से वीडियो बना लिया जो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक उच्च पद पर बैठा अधिकारी अपने पद और रुतबे का इस्तेमाल करके सहकर्मी पर दबाव बना रहा है। बैठक के दौरान काम को लेकर हुई किसी बात पर आईएएस अधिकारी इतने नाराज हुए कि उन्होंने अपनी भाषा की मर्यादा लांघ दी। महिला अधिकारी इस अपमानजनक व्यवहार के दौरान असहज नजर आती हैं लेकिन वरिष्ठ अधिकारी का गुस्सा कम होने का नाम नहीं लेता है। आम लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इस वीडियो को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
मीटिंग के दौरान गुस्से मेंा क्यों आपा खो बैठे वरिष्ठ अधिकारी?
प्रशासनिक बैठकों में अधिकारियों के बीच बहस होना आम बात है लेकिन सार्वजनिक रूप से इस तरह की भाषा का प्रयोग करना किसी भी नियम के दायरे में नहीं आता है। वीडियो सामने आने के बाद कई कर्मचारी संगठनों ने भी इस पर अपनी आपत्ति जताई है। हालांकि अभी तक सरकार या प्रशासन की ओर से इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि या कोई बड़ा अनुशासनात्मक एक्शन सामने नहीं आया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसके चलते एक वरिष्ठ आईएएस को इस तरह कैमरे के सामने अपना आपा खोना पड़ा।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर से सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले छोटे और बड़े अधिकारियों के आपसी संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला अधिकारियों की सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर भी आवाज उठाई जा रही है कि कार्यस्थल पर इस तरह का बर्ताव बिल्कुल स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है। राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं और जांच की मांग की है।
पहले भी विवादों से रहा है अधिकारियों का पुराना नाता
राजीव रंजन जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का नाम इससे पहले भी कई बार चर्चा और विवादों में रहा है। अतीत में उनके द्वारा लिए गए कुछ फैसलों और कार्यशैली पर राजनीतिक दलों ने गंभीर आरोप लगाए थे। चाहे वह थोड़े समय के लिए परिवहन आयुक्त का पद संभालना हो या पूर्वी सिंहभूम में उपायुक्त के रूप में काम करना हो, उनके कार्यकाल के दौरान कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। ताजा वीडियो सामने आने के बाद उनके पुराने मामलों की फाइलें भी एक बार फिर से खुलने लगी हैं और लोग उनके पुराने फैसलों की आलोचना कर रहे हैं।
आम जनता का मानना है कि जनता के टैक्स के पैसों से सैलरी पाने वाले इन अधिकारियों को अपनी कुर्सी का घमंड नहीं होना चाहिए। सरकारी बैठकों का यह वीडियो लोकतंत्र और प्रशासनिक सुधारों के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। द फ्रीलान्स की टीम इस वायरल वीडियो की सत्यता और इसके पीछे की असली वजहों की लगातार पड़ताल कर रही है ताकि पाठकों के सामने सच लाया जा सके।
प्रशासनिक सुधारों और कार्यशैली पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
देशभर में इस तरह की घटनाएं अक्सर प्रशासनिक तंत्र की कार्यसंस्कृति पर बदनुमा दाग लगाती हैं। जब तक ऐसे मामलों में सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उच्च पद पर बैठे अधिकारी अपनी मनमानी करते रहेंगे। महिला कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने नियमों का पालन कराना हर विभाग की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि क्या सरकार इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए कोई ठोस कदम उठाती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।







