नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत से ही हाहाकार मचा हुआ है। बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि प्रमुख सूचकांक धड़ाम होकर नीचे आ गिरे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स एक समय पर 1147 अंकों की भारी गिरावट के साथ लाल निशान पर ट्रेड कर रहा था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी फिसलकर 22200 के अहम स्तर के आसपास आ गया। अचानक आए इस बड़े भूचाल से बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है और छोटे निवेशकों की सांसे अटक गई हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। यह लगातार आठवां हफ्ता है जब बाजार में तेजी के बजाय गिरावट का रुख बना हुआ है। आज के इस बड़े क्रैश की वजह से निवेशकों की संपत्ति से एक झटके में आठ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा साफ हो गए। जिन शेयरों को सुरक्षित माना जाता था, वे भी ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। मेटल, बैंकिंग और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली है, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है।
क्यों आ रही है बाजार में लगातार इतनी बड़ी गिरावट?
शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार इस बड़ी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाला जाना बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर दिया है। महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी बाजार पर भारी पड़ रही है। पिछले कई हफ्तों से बाजार में कोई ठोस तेजी नहीं बन पाई है, जिसके कारण निवेशकों में निराशा का माहौल है और वे मुनाफावसूली या बिकवाली करने पर मजबूर हैं।
बाजार में मची इस भगदड़ के बीच छोटे और नए निवेशकों की चिंताएं सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं। जो लोग पिछले कुछ महीनों में बाजार से जुड़े थे, उनका पोर्टफोलियो भारी नुकसान में आ गया है। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर भी अपने ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसे समय में घबराहट में आकर अपने शेयर बेचना नुकसान को और बढ़ा सकता है। हालांकि, बाजार की मौजूदा चाल को देखकर लगता है कि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव का यह दौर अभी और जारी रह सकता है।
मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे बड़ी बिकवाली
आज के कारोबार के दौरान मेटल और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे भीषण गिरावट दर्ज की गई। इन सेक्टरों में बिकवाली इतनी तेज थी कि खरीदार ढूंढना भी मुश्किल हो गया था। वैश्विक स्तर पर मांग घटने की आशंका और घरेलू स्तर पर बिकवाल हावी होने से इन शेयरों के दाम तेजी से नीचे गिरे। ऑटो और बैंकिंग शेयरों का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा और उन्होंने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर खींचने की बजाय नीचे धकेलने में मुख्य भूमिका निभाई।
जमीनी स्तर पर ब्रोकरेज हाउस और वित्तीय सलाहकारों के दफ्तरों में निवेशकों के फोन लगातार बज रहे हैं। हर कोई यह जानने की कोशिश कर रहा है कि बाजार में आगे क्या होगा और उन्हें अपनी जमा पूंजी बचाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार में जब भी ऐसा बड़ा झटका लगे, तो बिना सोचे-समझे फैसले न लें। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश बनाए रखना ही इस समय समझदारी का काम माना जा रहा है।
क्या निवेशकों को अभी और नुकसान उठाना पड़ सकता है?
द फ्रीलान्स की टीम ने बाजार के कई वरिष्ठ विश्लेषकों से बात की। उनका मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थितियां सामान्य नहीं होतीं और विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजार में पैसा लगाना शुरू नहीं करते, तब तक बाजार में स्थिरता आना मुश्किल है। तकनीकी चार्ट्स पर भी बाजार कमजोर नजर आ रहा है। ऐसे में निवेशकों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है और अपनी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से ही कोई नया कदम उठाना चाहिए।






