द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में बिजली का संकट अब आम लोगों के साथ-साथ बड़े उद्योगों की कमर तोड़ने लगा है। राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर आ गया है। इस कमी को पूरा करने के लिए बिजली वितरण कंपनी ने हाई-टेंशन उपभोक्ताओं यानी बड़े कारखानों और मिलों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। उद्योगों से कहा गया है कि वे शाम को सात बजे से रात दस बजे तक के मुख्य समय में सरकारी ग्रिड की जगह अपने खुद के जनरेटर सेट चलाएं।
उद्योग संगठनों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका साफ कहना है कि डीजल और जनरेटर से बिजली पैदा करना बहुत महंगा सौदा है। जानकारों के मुताबिक, जनरेटर से मिलने वाली बिजली का खर्च करीब सोलह रुपये प्रति यूनिट तक बैठता है। यह सामान्य बिजली दर से दोगुने से भी ज्यादा है। ऐसे में छोटे और मध्यम उद्योग इस भारी खर्च को उठाने में असमर्थ नजर आ रहे हैं। इससे राज्य में औद्योगिक उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ने की पूरी आशंका है।
गैस से बनने वाली बिजली के दाम आसमान पर
बिजली बाजार से मिल रही खबरों के अनुसार, गैस आधारित बिजली की खरीद लागत में भी भारी उछाल आया है। स्थिति यह है कि गैस पावर से मिलने वाली बिजली की कीमत प्रति यूनिट पैंतीस रुपये तक पहुंच गई है। इतनी महंगी बिजली खरीदना किसी भी वितरण कंपनी या राज्य के लिए आसान नहीं है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं पर भी बिजली के दाम बढ़ने का भारी बोझ आ सकता है.
राज्य में बिजली की स्थिति पर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा गर्म है। विपक्षी दल और आम जनता लगातार बढ़ते बिजली बिलों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर इस बात पर बहस छिड़ी है कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठा रही है। लोग जानना चाहते हैं कि आने वाले गर्मियों के दिनों में क्या उन्हें बिजली की कटौती का सामना करना पड़ेगा या सरकार के पास कोई स्थाई समाधान मौजूद है।
चेन्नई में लोकल ट्रेन हादसा और रेलवे नेटवर्क पर सवाल
बिजली और परिवहन के मोर्चे पर चेन्नई से एक और बड़ी खबर सामने आई है। शहर में एक लोकल इलेक्ट्रिक ट्रेन पटरी से उतर गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। यह हादसा चेन्नई फोर्ट रेलवे स्टेशन के पास हुआ। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई, लेकिन उपनगरीय रेलवे सेवाओं पर इसका गहरा असर पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर पुरानी पटरियों और रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
यात्रियों का कहना है कि चेन्नई में लोकल ट्रेनों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। तकनीकी खराबी और रखरखाव की कमी के कारण अक्सर ट्रेनें देरी से चलती हैं या ऐसे हादसे होते रहते हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पटरी से उतरने के कारणों की जांच की जा रही है और जल्द ही यातायात को पूरी तरह सामान्य कर लिया जाएगा। हालांकि, रोजाना सफर करने वाले दफ्तर जाने वाले लोग इस व्यवस्था से बेहद नाराज नजर आ रहे हैं।
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में नया मील का पत्थर
एक तरफ जहां राज्य में बिजली संकट गहरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के मोर्चे पर एक अच्छी खबर भी आई है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पांचवें यूनिट में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। रूस की कंपनी रोसाटोम के सहयोग से इस यूनिट में तीन सौ बीस टन वजनी रिएक्टर प्रेशर वेसल स्थापित किया गया है। यह वही मुख्य हिस्सा है जिसके अंदर परमाणु विखंडन की प्रक्रिया होती है और बिजली बनती है।
इस नए संयंत्र के पूरा हो जाने से आने वाले समय में तमिलनाडु और दक्षिण भारत को मिलने वाली बिजली की आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद है। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना तय समय सीमा के भीतर आगे बढ़ रही है। हालांकि, मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार को तुरंत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान देना होगा ताकि उद्योगों और आम जनता को इस भारी परेशानी से राहत मिल सके। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।



