देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम और डिजिटल सर्विस कंपनी रिलायंस जियो का लंबे समय से प्रतीक्षित आईपीओ अब बाजार में उतरने के लिए बिल्कुल तैयार है। जियो का यह आईपीओ आगामी 21 अक्टूबर को आम निवेशकों और बड़े संस्थानों के लिए खुलेगा। कंपनी ने इस बहुप्रतीक्षित पब्लिक इश्यू के लिए गुजरात के अहमदाबाद में अपना रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस यानी आरएचपी विधिवत फाइल कर दिया है। बाजार के जानकारों की मानें तो यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है, जिस पर देश-विदेश के निवेशकों की गहरी नजर बनी हुई है।
इस पूरे बड़े वित्तीय अभियान और रणनीतिक विस्तार की सीधी कमान रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी के हाथों में है। आकाश अंबानी की अगुवाई में कंपनी की टीम पिछले कई महीनों से इस मेगा आईपीओ की तैयारियों में जुटी थी। अहमदाबाद में आरएचपी फाइल होने के साथ ही उन सभी अटकलों पर विराम लग गया है, जो इसके समय और प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से बाजार में चल रही थीं। कंपनी के इस कदम से भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक नया वित्तीय अध्याय शुरू होने जा रहा है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की चाल पर पड़ेगा।
शेयर बाजार में कैसी रहेगी जियो के आईपीओ की चाल?
रिलायंस जियो के इस आईपीओ के आने से भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर बड़ा उत्साह देखने को मिल रहा है। खुदरा निवेशकों से लेकर बड़े म्यूचुअल फंड हाउस और विदेशी संस्थागत निवेशक इस इश्यू में पैसा लगाने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जियो के पास देश का सबसे बड़ा ग्राहक आधार है, जो इसकी वित्तीय स्थिति को बेहद मजबूत बनाता है। यही वजह है कि इस आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में भी जबरदस्त मांग और हलचल अभी से शुरू हो चुकी है।
कंपनी द्वारा फाइल किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, इस आईपीओ से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल जियो के नेटवर्क विस्तार, तकनीक को और आधुनिक बनाने और भविष्य की 5जी व अन्य डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने में किया जाएगा। पिछले कुछ सालों में जियो ने केवल मोबाइल डेटा ही नहीं बल्कि ब्रॉडबैंड, क्लाउड सेवाएं और एंटरप्राइज बिजनेस में भी अपनी पैठ बहुत गहरी कर ली है। आकाश अंबानी के नेतृत्व में कंपनी लगातार ऐसे क्षेत्रों में निवेश कर रही है जो आने वाले समय में देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने वाले हैं।
निवेशकों को दांव लगाने से पहले किन बातों का रखना होगा ध्यान?
किसी भी बड़े आईपीओ की तरह जियो के इस पब्लिक इश्यू में भी पैसा लगाने से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकारों से बात कर लेनी चाहिए। शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशकों को कंपनी के वैल्युएशन, प्राइस बैंड और लॉट साइज की पूरी जानकारी आरएचपी के आधिकारिक दस्तावेजों से मिल जाएगी। 21 अक्टूबर को आईपीओ खुलने से ठीक पहले कंपनी की ओर से शेयरों के दाम और डिस्काउंट से जुड़ी सभी जरूरी घोषणाएं भी सार्वजनिक कर दी जाएंगी।
जियो के इस आईपीओ के बाजार में आने से देश के बाकी टेलीकॉम ऑपरेटरों पर भी अपनी सेवाओं और फायदों को बेहतर करने का दबाव बढ़ेगा। पिछले कुछ समय में कंपनी ने अपने प्रति यूजर मुनाफे में लगातार सुधार दिखाया है, जो निवेशकों के लिए एक बहुत सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद से लेकर मुंबई तक वित्तीय बाजार के गलियारों में इस एक आईपीओ को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है और हर कोई 21 अक्टूबर की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
भारतीय टेलीकॉम सेक्टर के लिए यह कितना बड़ा मोड़ है?
भारतीय टेलीकॉम उद्योग के लिहाज से जियो का शेयर बाजार में लिस्ट होना एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने वाला है। जब जियो ने साल 2016 में अपनी सेवाएं शुरू की थीं, तब देश में इंटरनेट की परिभाषा ही बदल गई थी और डेटा कीमतें जमीन पर आ गई थीं। अब एक स्वतंत्र लिस्टेड कंपनी के रूप में उभरने के बाद जियो के पास बिना किसी वित्तीय बाधा के अपनी रफ्तार को और तेज करने का पूरा मौका होगा। आकाश अंबानी की यह लीडरशिप तय करेगी कि कंपनी आने वाले दिनों में एआई, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कैसे मुकाबला करती है।
द फ्रीलान्स की इस विशेष पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि 21 अक्टूबर को खुलने वाला यह आईपीओ सिर्फ रिलायंस समूह के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारतीय शेयर बाजार के लिए साल का सबसे बड़ा और अहम इवेंट बनने जा रहा है। जैसे-जैसे आईपीओ की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे ब्रोकरेज फर्म्स और निवेशक अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि निवेशकों की तरफ से इस मेगा इश्यू को कैसा और कितना बड़ा रिस्पांस मिलता है।





