नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में इन दिनों ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। आम लोग रातोंरात अमीर बनने के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई इन फर्जी प्लेटफॉर्म्स पर गंवा रहे हैं। ताजा मामला महाराष्ट्र के पुणे से सामने आया है जहाँ एक कारोबारी को सात करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाया गया है। शातिर ठगों ने ऊंचे मुनाफे का लालच देकर इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
केवल पुणे ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के शामली और उसके आसपास के जनपदों में भी ऐसा ही बड़ा खेल उजागर हुआ है। शामली के कई निवेशकों के करोड़ों रुपये ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर फंस चुके हैं। लोग अपनी डूबी हुई पूंजी को वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं और उनकी सांसे अटकी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर इन ठगों ने कई लोगों को अपने जाल में फंसाया था जो अब अचानक अपनी दुकानें और दफ्तर बंद करके फरार हो चुके हैं।
ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर कैसे हो रहा है खेल
साइबर ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों और फर्जी मोबाइल ऐप्स के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे निवेशकों को बहुत कम समय में भारी भरकम मुनाफे का लालच देते हैं। शुरुआत में लोगों को कुछ छोटे मुनाफे देकर उनका भरोसा जीता जाता है। जब निवेशक बड़ी रकम लगा देते हैं तो उनके खातों को ब्लॉक कर दिया जाता है या वे ऐप काम करना बंद कर देते हैं। पुलिस का कहना है कि लोग बिना सोचे समझे किसी भी अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पैसे निवेश कर देते हैं जो बाद में बहुत भारी पड़ता है।
दूसरी तरफ भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने भी फॉरेक्स डेरिवेटिव्स के नियमों को लेकर कई कड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक लगातार आम लोगों और निवेशकों को चेतावनी देता रहा है कि वे अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से दूर रहें। आरबीआई ने हाल ही में नियमों में कुछ राहत जरूर दी है ताकि वैध और कानूनी कारोबार में कोई बाधा न आए। लेकिन अवैध और फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स का यह नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा है जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।
जामिया मिलिया इस्लामिया की फ्री कोचिंग फैक्ट्री और अन्य खबरें
इस बीच देश में 'फैक्ट्री' शब्द से जुड़ी अन्य खबरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। शिक्षा के क्षेत्र में जामिया मिलिया इस्लामिया की आवासीय कोचिंग अकादमी यानी आरसीए को सिविल सेवा परीक्षा की बेहतरीन फैक्ट्री माना जा रहा है। यहां से हर साल दर्जनों छात्र यूपीएससी की परीक्षा पास करके आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनते हैं। आरसीए के 38 छात्रों ने एक बार फिर यूपीएससी में शानदार सफलता हासिल करके इस संस्थान का नाम रोशन किया है। गरीब और मेधावी छात्रों के लिए यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है।
वहीं राजनीतिक गलियारों में भी 'फैक्ट्री' शब्द को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। किसानों के समर्थन में आए एक मंत्री के भाई की फैक्ट्री पर हाल ही में छापेमारी की गई है। आम आदमी पार्टी के नेता इसुदान गढ़वी ने इस कार्रवाई को लेकर सत्ताधारी पार्टी पर जमकर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तमाम घटनाओं के बीच आम जनता को यह समझने की जरूरत है कि वे किसी भी लुभावने ऑफर या अवैध वित्तीय जाल में न फंसे।
सुरक्षित निवेश के लिए क्या कदम उठाएं
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पैसे लगाने से पहले उसकी पूरी जांच कर लें। यह देख लें कि वह प्लेटफॉर्म भारतीय रिजर्व बैंक या सेबी के नियमों के तहत अधिकृत है या नहीं। यदि कोई ऐप बहुत ज्यादा मुनाफे का वादा कर रहा है तो समझ लीजिए कि वहां जोखिम बहुत ज्यादा है। अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए केवल भरोसेमंद बैंकों और रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकारों की ही मदद लें।






