नई दिल्ली से हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली अगली वित्तीय मदद को लेकर ग्रामीण इलाकों में हलचल तेज हो गई है। पिछले चौबीस घंटों में इंटरनेट पर इस योजना के बारे में सबसे ज्यादा खोजबीन की गई है। देश के करोड़ों किसान यह जानना चाहते हैं कि उनके खाते में पैसे कब आएंगे और क्या उनका नाम लाभार्थी सूची में शामिल है या नहीं। सरकार की इस योजना से छोटे और सीमांत किसानों को खेती के खर्च के लिए सीधी आर्थिक सहायता मिलती है।
खेती किसानी से जुड़े इस बड़े अपडेट के बाद कृषि मंत्रालय के पोर्टल पर अचानक ट्रैफिक बढ़ गया है। हमारे फील्ड रिपोर्टरों ने उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई गांवों का दौरा किया। वहां किसानों ने बताया कि वे अपनी अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। कई किसानों के सामने ई-केवाईसी और बैंक खाता आधार से लिंक न होने जैसी तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इसी वजह से गूगल पर लोग लगातार यह सर्च कर रहे हैं कि इन समस्याओं को घर बैठे कैसे ठीक किया जाए ताकि भुगतान में कोई रुकावट न आए।
किसान पोर्टल पर कैसे चेक करें अपनी किस्त का स्टेटस?
अगर आप भी इस योजना का लाभ लेते हैं तो स्टेटस देखना बहुत आसान है। सबसे पहले आपको योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाना होगा। इसके बाद होमपेज पर दिए गए 'फार्मर कॉर्नर' विकल्प पर क्लिक करना होगा। वहां आपको 'लाभार्थी स्टेटस' का विकल्प मिलेगा। अपना आधार नंबर या बैंक खाता संख्या दर्ज करने के बाद स्क्रीन पर पूरी जानकारी आ जाएगी। इससे आपको यह साफ पता चल जाएगा कि आपकी अगली किस्त किस चरण में अटकी है या पास हो चुकी है।
स्थानीय कृषि अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों के दस्तावेजों में कोई गलती है, उन्हें तुरंत अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी जाना चाहिए। कई बार बैंक खाते का नंबर गलत होने या आधार सीडिंग न होने की वजह से पैसे रुक जाते हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि केवल उन्हीं किसानों के खातों में पैसे भेजे जाएंगे जिनके सभी दस्तावेज पूरी तरह सही और सत्यापित होंगे। बिचौलियों से दूर रहने और सीधे सरकारी पोर्टल का उपयोग करने की सलाह लगातार दी जा रही है।
ई-केवाईसी और आधार सीडिंग क्यों है सबसे जरूरी?
योजना का लाभ लेने के लिए ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। जिन किसानों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, वे ओटीपी आधारित ई-केवाईसी अपने मोबाइल से ही कर सकते हैं। इसके अलावा बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए नजदीकी आधार केंद्र या वसुधा केंद्र की मदद ली जा सकती है। बैंक खाते में डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का विकल्प चालू होना भी बेहद जरूरी है, तभी सरकार द्वारा भेजा गया पैसा सीधे आपके बैंक खाते में पहुंचेगा।
हमारे ग्राउंड सर्वे में यह बात भी सामने आई कि कई गांवों में किसानों को डिजिटल प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं है। इस वजह से वे जन सेवा केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि गांवों में विशेष शिविर लगाकर इन समस्याओं को दूर किया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी फर्जी मैसेज या लिंक पर क्लिक न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा रखें।
आगामी भुगतान की तारीख और प्रशासनिक तैयारियां
सरकार जल्द ही देश के पात्र किसानों के खातों में अगली किस्त ट्रांसफर करने की तैयारी में है। हालांकि अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पिछले भुगतान के आंकड़ों की जांच का काम लगभग पूरा हो चुका है। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखेगी और जैसे ही पैसे ट्रांसफर होने की आधिकारिक पुष्टि होगी, हम आपको सबसे पहले जमीनी सच से अवगत कराएंगे।








