खुशियों भरा जश्न पल भर में मातम में बदला
त्योहारों के इस सीजन में जश्न और उमंग के बीच एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के नादरगुल इलाके में स्थित प्रतिष्ठित एमवीएसआर (MVSR) इंजीनियरिंग कॉलेज में शनिवार को आयोजित डांडिया नाइट का कार्यक्रम खून और आंसुओं में बदल गया। कॉलेज परिसर में छात्र-छात्राएं पारंपरिक लिबास में बेहद उत्साहित होकर डांडिया खेल रहे थे। चारों तरफ डीजे की धुन और उत्सव का माहौल था, तभी एक ऐसा हादसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
कार्यक्रम स्थल पर भव्य सजावट के लिए प्रवेश द्वार पर एक भारी-भरकम लोहे और लकड़ी का स्ट्रक्चर (तोरण) खड़ा किया गया था, जिसमें भारी-भरकम लाइटिंग और बैनर लगाए गए थे। स्थानीय मौसम के मिजाज और तेज हवाओं के बीच यह अस्थाई ढांचा अचानक असंतुलित होकर उन छात्र-छात्राओं के ऊपर आ गिरा जो उसके ठीक नीचे जश्न मना रहे थे। इस अचानक हुए हादसे से वहां भगदड़ मच गई और चीख-पुकार गूंज उठी।
हादसे में प्रथम वर्ष की छात्रा की मौत और कई घायल
इस वीभत्स हादसे की चपेट में आने से कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद शिक्षकों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया तथा घायलों को पास के निजी अस्पतालों में पहुंचाया। इस दुर्घटना में सबसे ज्यादा गंभीर चोटें इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (EEE) के पहले साल में पढ़ने वाली छात्रा सोना नारायण दास को आईं। सोना को अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण नजदीकी प्रत्युषा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसने दम तोड़ दिया।
इस भयानक हादसे में मृतका सोना की सगी बहन मीना नारायण दास भी बुरी तरह जख्मी हुई है। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मीना की हालत भी बेहद नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर लगातार उसकी जान बचाने की कोशिश में जुटे हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद से दोनों बहनों के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है और कॉलेज प्रबंधन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि डांडिया उत्सव के दौरान सुरक्षा के तमाम पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। जिस आर्च या प्रवेश द्वार को लगाया गया था, उसकी मजबूती और हवा के दबाव को झेलने की क्षमता का कोई आकलन नहीं किया गया था। चश्मदीदों के मुताबिक, शाम के समय अचानक तेज हवाएं चल रही थीं, जिसके चलते यह कमजोर ढांचा अपने फाउंडेशन को नहीं संभाल सका और भरभराकर गिर गया।
कॉलेज परिसरों में होने वाले इस तरह के बड़े आयोजनों में छात्र सुरक्षा हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है। इस घटना ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि जब हजारों छात्र एक साथ किसी कार्यक्रम में इकट्ठा होते हैं, तो आयोजकों की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे हरसंभव सुरक्षा सुनिश्चित करें। लेकिन यहां कमियों के कारण एक होनहार बेटी को अपनी जान गंवानी पड़ी।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने दिए सख्त जांच के आदेश
इस दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सरकार इस हादसे से बेहद आहत है और शोक संतप्त परिवार के साथ पूरी सहानुभूति के साथ खड़ी है।
"हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया कार्यक्रम के दौरान हुए इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में छात्रा की मौत अत्यंत पीड़ादायक है। मैंने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को घायलों का बेहतरीन इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" — ए. रेवंत रेड्डी, मुख्यमंत्री, तेलंगाना
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्थानीय पुलिस ने आयोजकों और संबंधित कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या इस कार्यक्रम के लिए जिला प्रशासन से विधिवत अनुमति ली गई थी और क्या अनुमति की शर्तों में सुरक्षा उपायों का जिक्र था या नहीं। जांच टीम उन ठेकेदार और डेकोरेटर्स से भी पूछताछ कर रही है जिन्होंने उस खतरनाक स्ट्रक्चर को वहां खड़ा किया था।
आगे की कानूनी कार्रवाई और कैंपस सुरक्षा के कड़े सबक
इस दर्दनाक हादसे के बाद हैदराबाद के अन्य शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में भी आयोजनों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुट गया है कि भविष्य में किसी भी कॉलेज या संस्थान में बिना पुख्ता सुरक्षा प्रमाण पत्र के बड़े सार्वजनिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित न किए जाएं। जनता और छात्र संगठनों ने भी मांग की है कि ऐसे मामलों में केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय दोषियों पर कड़ी से कड़ी धाराएं लगाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का असहनीय दर्द न झेलना पड़े।










