सिनेमाई चकाचौंध के पीछे छिपा काला सच और कास्टिंग काउच
मनोरंजन जगत की रंगीन दुनिया के पीछे कई ऐसे अंधेरे कोने हैं, जिनका सामना अक्सर नए कलाकारों को करना पड़ता है। पर्दे पर चमकने वाले चेहरों के पीछे संघर्ष की एक लंबी और दर्दनाक दास्तान होती है, जिसमें कई बार उनका शोषण करने की कोशिश भी की जाती है। बॉलीवुड और मराठी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपने शुरुआती दिनों के ऐसे ही एक भयानक अनुभव को साझा किया है। उनके इस खुलासे ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री के अंदरूनी हालातों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोनाली कुलकर्णी ने अपनी बेहतरीन अदायगी के दम पर इंडस्ट्री में एक खास मुकाम हासिल किया है। उनकी कई फिल्मों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। हालांकि, यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। एक मीडिया प्लेटफॉर्म को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने खुलकर उन पलों के बारे में बात की, जब उन्हें एक निर्देशक की घटिया हरकत की वजह से गहरी मानसिक ठेस पहुंची थी। उन्होंने बताया कि कैसे कुछ लोग नए कलाकारों की मजबूरी का फायदा उठाने की फिराक में रहते हैं.
साड़ी पहनकर आने का फरमान और एक अजीब इमारत का सेटअप
अपने उस बुरे अनुभव को याद करते हुए सोनाली कुलकर्णी ने बताया कि उनके करियर की शुरुआत में एक फिल्म निर्देशक ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया था। निर्देशक के सेक्रेटरी ने फोन पर जो निर्देश दिए, वे काफी संदिग्ध थे। सेक्रेटरी ने अभिनेत्री से कहा कि निर्देशक चाहते हैं कि वे मीटिंग में साड़ी पहनकर आएं। यह बात सोनाली को पहली ही बार में बहुत अजीब लगी और उनके मन में कई सवाल खड़े हो गए।
उन्होंने सेक्रेटरी से सवाल किया कि निर्देशक उन्हें फिल्म की कहानी सुनाने वाले हैं, तो ऐसे में साड़ी पहनकर आने की क्या आवश्यकता है? इसके बावजूद, उन्हें शहर की एक खास इमारत में बुलाया गया। जब सोनाली वहां पहुंचीं, तो वहां का माहौल काफी अलग और कृत्रिम लगा। वहां एक टेबल और दो कुर्सियां लगाई गई थीं, जिससे ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही थी कि यह कोई औपचारिक दफ्तर या मीटिंग रूम है। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें जोर देकर कहा कि अंदर जाना होगा क्योंकि निर्देशक वहीं बैठकर कहानी सुनाएंगे।
अंधेरा कमरा, किचन और सिर्फ एक बेड का खौफनाक मंजर
नैरेशन रूम के नाम पर अभिनेत्री को एक ऐसे कमरे की तरफ ले जाया गया, जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। सोनाली ने बताया कि जब वे उस कमरे के अंदर गईं, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह कमरा पूरी तरह से अंधेरे में डूबा हुआ था। कमरे के एक कोने में छोटा सा किचन और पूजा घर जैसा सेटअप बना हुआ था, लेकिन असली हैरानी तब हुई जब उनकी नजर कमरे के बीचों-बीच रखे एक बड़े से बेड पर पड़ी।
"उस कमरे में काफी अंधेरा था। वहां एक किचन और पूजा रूम था। जैसे ही नैरेशन रूम के अंदर गई, तो वहां कुछ नहीं था. बस एक बेड लगा हुआ था। मैं यह देखकर शॉक्ड थी और बेहद अनकंफर्टेबल महसूस कर रही थी।" — सोनाली कुलकर्णी, अभिनेत्री
कमरे की स्थिति और वहां का माहौल भांपते हुए सोनाली को यह समझने में जरा भी देर नहीं लगी कि निर्देशक के इरादे क्या थे। वे बिना एक पल गंवाए और बिना किसी से कुछ कहे सीधे उस कमरे से बाहर निकल आईं। उन्होंने अपनी सूझबूझ और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी और उस दलदल में फंसने के बजाय वहां से सुरक्षित बाहर आना ही बेहतर समझा।
अंतरात्मा की आवाज सुनना और फिल्मों का चयन
घटना के बाद जब सोनाली ने पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें इस बात का बहुत बुरा लगा कि आखिरकार उस फिल्म में किसी अन्य कलाकार ने काम कर लिया। उन्हें इस बात की कसक थी कि जिस प्रोजेक्ट में इस तरह की घटिया मानसिकता वाले निर्देशक शामिल थे, उसमें कोई दूसरा अभिनेता काम करने के लिए तैयार हो गया। हालांकि, सोनाली का मानना है कि कलाकारों को हमेशा अपनी अंतरात्मा यानी इंट्यूशन पर भरोसा रखना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंडस्ट्री में हर कोई ऐसा नहीं होता, लेकिन ऐसे लोगों की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता। समझदारी इसी में है कि आप सही समय पर सही फैसला लें और गलत का विरोध करें। आज सोनाली कुलकर्णी जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचने के लिए उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवाया है, न कि किसी शॉर्टकट का सहारा लिया है।
बचपन के दिनों और पीरियड्स से जुड़े अनसुने संस्मरण
कास्टिंग काउच के इस गंभीर मुद्दे के अलावा, सोनाली ने अपने जीवन के कई अन्य पहलुओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके परिवार में महिलाओं के स्वास्थ्य और मासिक धर्म को लेकर किस तरह की सामाजिक स्थिति थी। उन्होंने साझा किया कि उनके शुरुआती दिनों में सैनिटरी पैड आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे, बल्कि इसके बजाय पुरानी साड़ियों के बेहद नरम और साफ कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता था।
सोनाली ने एक बेहद दिलचस्प और सकारात्मक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब उन्हें पहली बार पीरियड आया था, तो उनके परिवार ने इसे किसी वर्जना या छुपाने वाली बात की तरह नहीं लिया। उनकी मां और मौसी ने मिलकर एक बहुत ही प्यारा और छोटा सा उत्सव मनाया था। दोनों ने उनकी आरती उतारी और प्यार भरे लहजे में कहा कि अब उनकी सोनाली बड़ी हो गई है। अभिनेत्री का मानना है कि समाज में पीरियड्स को लेकर जो दबी हुई सोच है, उसे बदलने की जरूरत है और इसे किसी प्रकार का अभिशाप मानने के बजाय एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करना चाहिए।











