डूरंड लाइन पर फिर गरजी बंदूकें, सीमावर्ती इलाकों में खौफ का माहौल
दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की विवादित सीमा यानी डूरंड लाइन एक बार फिर सुलग उठी है। शनिवार को दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच हुई आमने-सामने की भीषण झड़प ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खूनी संघर्ष में कई पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि सीमा के दोनों तरफ भारी सैन्य नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। इस अचानक हुई सैन्य भिड़ंत से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और स्थानीय ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
संघर्ष की यह ताजा घटना अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत के दांड पटान जिले के अंतर्गत आने वाले इलाकों में हुई। खारलाची गेट, टॉप सर और कोंज अली सेक्टरों के आसपास अचानक दोनों सेनाओं के बीच भारी हथियारों से गोलाबारी शुरू हो गई। देखते ही देखते यह संघर्ष एक बड़े सैन्य टकराव में बदल गया। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर के वक्त शुरू हुई इस गोलीबारी की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे सीमा के आर-पार होने वाला सामान्य व्यापारिक आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
अफगान सुरक्षा बलों का दावा: बिना अनुमति बनाई जा रही थीं चौकियां
इस पूरे घटनाक्रम पर अफगान पक्ष की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। अफगान सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि उनकी सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों की आक्रामक हरकतों का माकूल जवाब दिया। अफगान अधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर सीमा के पास बिना किसी पूर्व अनुमति के नई सैन्य चौकियां और बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही थी। जब अफगान सीमा रक्षकों ने इस अवैध निर्माण पर आपत्ति जताई, तो पाकिस्तानी सैनिकों की तरफ से पहले गोलीबारी की गई।
अफगान रक्षा विश्लेषकों का यह भी कहना है कि उनकी सेना ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई की, जिसमें पाकिस्तानी सेना के कई जवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अफगान क्षेत्र के भीतर स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह की एकतरफा गतिविधियां दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और अधिक बिगाड़ रही हैं। सीमा पर तैनात अफगान बलों ने किसी भी बाहरी अतिक्रमण से सख्ती से निपटने का संकल्प दोहराया है।
पाकिस्तानी अधिकारियों का आरोप: अफगान गार्ड्स ने की पहले गोलाबारी
दूसरी ओर, पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सारा ठीकरा अफगान सीमा रक्षकों के सिर फोड़ा है। पाकिस्तानी पक्ष का दावा है कि अफगानिस्तान की तरफ से उकसावे की कार्रवाई पहले की गई। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, अफगान गार्ड्स ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और कुर्रम जिले से सटे इलाकों में स्थित सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
पाकिस्तानी मीडिया और सेना के आंतरिक सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ताइदा सेक्टर, अपर कुर्रम और घुज गढ़ी जैसे संवेदनशील इलाकों में अफगान तालिबान के लड़ाकों ने सीमा पार से घुसपैठियों को समर्थन देने के उद्देश्य से हमला बोला। इसके जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभाला और टोपसर चौकी तथा शिपोला बेस कैंप को भारी गोलाबारी का निशाना बनाया। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि इस जवाबी कार्रवाई में अफगान पक्ष को भारी जनहानि उठानी पड़ी है और उनके कई ठिकाने नेस्तनाबूद कर दिए गए हैं।
आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ को लेकर गहराता जा रहा है मतभेद
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बार-बार भड़कने वाली इन झड़पों के पीछे की असली वजह दोनों देशों के बीच आतंकवाद और सीमा प्रबंधन को लेकर गहरे मतभेद हैं। पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ सक्रिय आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) द्वारा किया जा रहा है। इस्लामाबाद का दावा है कि टीटीपी के लड़ाके अफगान सीमा के भीतर सुरक्षित ठिकानों से ऑपरेट करते हैं और पाकिस्तान में आकर खूनी हमलों को अंजाम देते हैं।
"सीमा पार से होने वाली गतिविधियां और अवैध निर्माण दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन चुके हैं, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।" — क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ
हालांकि, काबुल में बैठी तालिबान सरकार इन सभी आरोपों को लगातार खारिज करती आई है। अफगान प्रशासन का रुख हमेशा से यह रहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं और प्रशासनिक कमजोरियों का ठीकरा अफगानिस्तान के सिर फोड़ने की कोशिश करता है। काबुल का स्पष्ट कहना है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा, लेकिन अपनी सीमाओं की रक्षा करना उसका sovereign right है।
व्यापार और आम जनजीवन पर पड़ रहा है गहरा असर
डूरंड लाइन पर जारी इस सैन्य तनाव का सबसे बुरा असर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों और दोनों देशों के बीच के व्यापारिक रिश्तों पर पड़ रहा है। खारलाची गेट और अन्य प्रमुख व्यापारिक मार्गों के बंद हो जाने से दोनों तरफ ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं। सीमा पार व्यापार ठप होने से करोड़ों रुपये के सामान की आवाजाही रुक गई है, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, गोलाबारी की चपेट में आने वाले गांवों के लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सर्दियों के इस मौसम में खुले आसमान के नीचे या अस्थायी शिविरों में शरण लेनी पड़ रही है। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने दोनों देशों से अपील की है कि वे संयम बरतें और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से विवादों को सुलझाएं ताकि आम नागरिकों की जानमाल की रक्षा की जा सके। यदि यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक विकट चुनौती साबित हो सकता है।












