यूरोपीय काउंसिल के प्रेस रूम में अजीबोगरीब स्थिति
ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय काउंसिल का प्रेस ब्रीफिंग रूम इन दिनों अपनी किसी गंभीर कूटनीतिक चर्चा से ज्यादा एक अजीब और असहज करने वाली घटना को लेकर चर्चा में है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की क्या बड़ा बयान देंगे, लेकिन कमरे के भीतर मौजूद पत्रकारों का ध्यान इस अहम कवरेज के साथ-साथ एक दूसरी ही गंभीर समस्या पर अटक गया था। हॉल के अंदर अचानक एक ऐसी रहस्यमयी और तेज दुर्गंध फैली कि वहां सांस लेना तक दूभर हो गया।
पत्रकारिता की दुनिया में अपनी पैनी नजर और हर हलचल पर रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मीडियाकर्मी इस अजीब वाकये के सामने पूरी तरह लाचार नजर आए। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़ी-बड़ी राजनीतिक संधियों और युद्ध की विभीषिका को कवर करने वाले ये अनुभवी रिपोर्टर्स इस बात से हैरान थे कि आखिर इतनी बड़ी बैठक के बीच इस तरह की दुर्गंध कहां से आ रही है। स्थिति इतनी असहज हो गई कि कुछ समय के लिए रिपोर्टिंग से ज्यादा चर्चा इस बात पर होने लगी कि इस रहस्यमयी बदबू का स्रोत कौन है।
रहस्यमयी 'फेटिड फार्टर' की तलाश और पत्रकारों की परेशानी
गलियारों में और प्रेस ब्रीफिंग रूम के भीतर मौजूद सूत्रों के हवाले से यह चर्चा तेज हो गई कि इस अजीब स्थिति के पीछे कोई ऐसा शख्स है जिसे अंग्रेजी मीडिया गलियारों में मजाकिया अंदाज में 'फेटिड फार्टर' कहा जा रहा है। यानी कमरे में कोई ऐसा रहस्यमयी व्यक्ति मौजूद था जो बहुत ज्यादा बदबूदार गैस छोड़ने की समस्या से परेशान था और जिसकी वजह से पूरा हॉल प्रभावित हो रहा था। इस अजीबोगरीब परिस्थिति ने पेशेवर माहौल में एक हल्का-फुल्का लेकिन बेहद परेशान करने वाला तनाव पैदा कर दिया था।
लंबी शिफ्ट और लगातार बदलते वैश्विक घटनाक्रम के बीच काम कर रहे पत्रकारों के लिए यह किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था। रात के वक्त कूटनीतिक मुलाकातों और वार्ताओं पर नजर रखने वाले ये रिपोर्टर्स केवल कॉफी के सहारे अपना वक्त काट रहे थे। उन्हें इस बात का लगातार डर सता रहा था कि अगर वे तरोताजा होने के लिए बाहर गए, तो कहीं कोई बेहद अहम बयान या प्रेस कॉन्फ्रेंस छूट न जाए। इस शारीरिक थकान और मानसिक दबाव के बीच इस दुर्गंध ने हालात को और ज्यादा बदतर बना दिया।
पहले भी पेश आ चुकी है ऐसी अजीब परिस्थिति
यह कोई पहली बार नहीं है जब यूरोपीय संघ या कूटनीतिक बैठकों को कवर करने वाले पत्रकारों को इस तरह के अजीबोगरीब हालात का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी एक हाई-प्रोफाइल राजनयिक ब्रीफिंग के दौरान अचानक फैली तेज बदबू के कारण कई पत्रकारों को मजबूरन अपनी जगह छोड़कर बाहर भागना पड़ा था। उस समय भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया के बीच यह चर्चा का विषय बन गया था कि आखिर आलीशान और आधुनिक सुविधाओं से लैस इन कमरों में इस तरह की समस्याएं बार-बार क्यों सामने आती हैं।
पत्रकारों का कहना है कि जब वैश्विक राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो रही हो और दुनिया किसी बड़े युद्ध या समझौते की आहट सुन रही हो, ऐसे में बुनियादी स्तर की ये असुविधाएं काम के तनाव को कई गुना बढ़ा देती हैं। तमाम सुरक्षा घेरे और वीआईपी प्रोटोकॉल के बीच इस तरह की छोटी दिखने वाली समस्याएं मीडियाकर्मियों के लिए किसी चुनौती से कम साबित नहीं होतीं। हालांकि, इन तमाम बाधाओं को पार करते हुए पत्रकारों ने अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा के साथ निभाई और हर एक अपडेट को दुनिया तक पहुंचाया।
वोलोडिमिर जेलेंस्की का अमेरिकी समझौते पर तीखा हमला
इस अजीब वाकये के बीच मुख्य कार्यक्रम यानी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरी तरह गंभीर मुद्दों पर केंद्रित रही। जेलेंस्की ने यूरोपीय धरती से एक बार फिर रूस के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के बीच हाल ही में हुए उस समझौते की कड़ी आलोचना की जिसके तहत रूस से डीजल खरीदने की बात सामने आई थी। जेलेंस्की ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के समझौतों से सीधे तौर पर रूसी खजाने को मजबूती मिलेगी।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि पुतिन इस अतिरिक्त धन का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ जारी जंग को और लंबा खींचने के लिए करेंगे। उन्होंने पश्चिमी देशों और यूरोप से यह अपील की कि वे रूस के खिलाफ अपनी रणनीति में नरमी न बरतें और यूक्रेन को पहले से अधिक मजबूत आर्थिक और सैन्य सहायता प्रदान करें। जेलेंस्की के मुताबिक, वैश्विक बाजार में ऊर्जा संकट की भरपाई के नाम पर रूस को वित्तीय लाभ पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
वैश्विक कूटनीति और युद्ध के बीच ग्राउंड रिपोर्टिंग की चुनौतियां
एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में बड़े फैसले लिए जा रहे हैं और युद्ध के समीकरण बदल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मैदान पर काम करने वाले पत्रकारों का संघर्ष भी कम कठिन नहीं है। चाहे वह ठंड, थकान और कॉफी के सहारे जागना हो या फिर प्रेस रूम के भीतर अचानक पैदा होने वाली ऐसी अजीबोगरीब स्थितियां, रिपोर्टर्स हर हाल में खबर को समय पर पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। यूरोपीय काउंसिल की यह घटना दिखाती है कि बड़े राजनीतिक मंचों के पीछे भी कई बार ऐसे दिलचस्प और अजीब पहलू छिपे होते हैं जो मुख्यधारा की खबरों से अलग एक अलग ही कहानी बयां करते हैं।
"रूस के साथ इस तरह के व्यापारिक समझौते न केवल हमारी सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं, बल्कि इनसे मिलने वाले धन का उपयोग युद्ध को और अधिक भड़काने के लिए किया जाएगा। यूरोप को अब यह तय करना होगा कि वह शांति के साथ है या इस आक्रामकता के साथ।" — वोलोडिमिर जेलेंस्की, राष्ट्रपति, यूक्रेन












