इतिहास का वो अनूठा सौदा जब रूस ने अमेरिका को बेच दिया था विशाल अलास्का
दुनिया के भू-राजनीतिक इतिहास में कई ऐसे फैसले हुए हैं जिन्होंने आने वाले दशकों की तस्वीर हमेशा के लिए बदल दी। ऐसा ही एक ऐतिहासिक पल 18 अक्टूबर 1867 को आया, जब अमेरिका ने रूस से अलास्का जैसे विशाल क्षेत्र का आधिकारिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। आज भले ही अलास्का अमेरिका के सबसे समृद्ध और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है, लेकिन एक समय यह रूसी साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था। रूस के लिए यह इलाका अपनी मुख्य भूमि से बेहद दूर था और इसकी रक्षा करना उस दौर में आसान नहीं था।
अंतरराष्ट्रीय इतिहास के दस्तावेजों के मुताबिक, 19वीं सदी के उत्तरार्ध में रूस को इस बात का गहरा डर सता रहा था कि यदि भविष्य में ब्रिटेन जैसी किसी महाशक्ति के साथ उसका युद्ध छिड़ जाता है, तो वह इस सुदूर क्षेत्र को बिना किसी लाभ के गंवा देगा। ऐसे में रूसी शासकों ने यह बुद्धिमानी समझी कि इस क्षेत्र को किसी प्रतिद्वंद्वी के हाथों मुफ्त में खोने के बजाय इसे अमेरिका को बेच दिया जाए। दूसरी तरफ, अमेरिका भी अपनी भौगोलिक सीमाओं का विस्तार करने की फिराक में था। अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन के कार्यकाल के दौरान विदेश मंत्री विलियम हेनरी सीवार्ड ने इस खरीद की पूरी कमान संभाली थी।
मार्च 1867 में अमेरिकी विदेश मंत्री सीवार्ड और अमेरिका में रूस के राजनयिक एडुआर्ड डी स्टोएकल के बीच इस बड़े सौदे पर गहन बातचीत शुरू हुई। लंबी वार्ताओं के बाद आखिरकार दोनों देशों के बीच 72 लाख डॉलर में सहमति बन गई। उस दौर के हिसाब से यह रकम भले ही बड़ी लगती हो, लेकिन आने वाले समय में यह सौदा अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खजाना साबित हुआ। अमेरिकी नियंत्रण में आने के बाद इस बर्फीले भूभाग ने अपनी असली आर्थिक ताकत दुनिया को दिखाई।
जब अमेरिकी नागरिकों ने उड़ाया था इस भू-सौदे का मजाक और कहा था 'सीवार्ड्स फॉली'
आज भले ही अलास्का अमेरिका की रीढ़ माना जाता है, लेकिन जब साल 1867 में यह सौदा तय हुआ था, तब अमेरिकी जनता और मीडिया ने इसे सरकार की एक बड़ी बेवकूफी करार दिया था। आम लोगों का सोचना था कि इतनी भारी-भरकम रकम देकर सिर्फ बर्फ से ढकी बंजर जमीन खरीदना देश के पैसों की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है। लोगों को लगता था कि इस दुर्गम इलाके में न तो खेती हो सकती है और न ही इंसानी बसाहट के लिए यह उपयुक्त है।
इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए अमेरिकी अखबारों और राजनेताओं ने इसे 'सीवार्ड्स फॉली' यानी विदेश मंत्री सीवार्ड की मूर्खता का नाम दिया था। कई व्यंग्यकारों ने इसे 'एंड्रयू जॉनसन का पोलर बियर गार्डन' कहकर भी संबोधित किया। जनता का मानना था कि इस वीरान और ठंडी जमीन पर पैसा लगाने से अमेरिका को सिवाय घाटे के कुछ हासिल नहीं होगा। हालांकि, इन तमाम विरोधों और तंज के बावजूद राष्ट्रपति जॉनसन और मंत्री सीवार्ड अपने फैसले पर अडिग रहे और इतिहास ने साबित कर दिया कि उनकी यह दूरदर्शिता कितनी सटीक थी।
"शुरुआत में इस बंजर और बर्फीले इलाके को खरीदने पर जनता का गुस्सा और आलोचना लाजिमी थी, क्योंकि किसी ने यह नहीं सोचा था कि भविष्य में यही जमीन देश की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।" — इतिहासकार और शोध विश्लेषक
विशालकाय क्षेत्रफल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाला अनूठा राज्य
भौगोलिक रूप से अलास्का कोई छोटा-मोटा भूभाग नहीं है, बल्कि इसका कुल क्षेत्रफल करीब 5,86,412 वर्ग मील में फैला हुआ है। यदि इसकी तुलना अन्य अमेरिकी राज्यों से की जाए, तो यह अकेला राज्य टेक्सास के आकार से लगभग दोगुना बड़ा है। हैरानी की बात यह है कि अलास्का का कुल क्षेत्रफल अमेरिका के निचले 48 राज्यों के कुल क्षेत्रफल के पांचवें हिस्से के बराबर बैठता है। इतना बड़ा भूभाग होने के बावजूद यहां की आबादी देश के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी कम है।
हजारों साल पहले से इस क्षेत्र में विभिन्न मूल निवासी समुदाय कड़ाके की ठंड और दुर्गम परिस्थितियों के बीच अपना जीवन बिताते आए हैं। यहाँ का मौसम साल के अधिकांश महीनों में बेहद ठंडा और चुनौतीपूर्ण रहता है। इसके बावजूद यहाँ के स्थानीय समुदायों ने अपनी प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और अनूठी जीवनशैली को आधुनिक दौर में भी पूरी तरह जीवित रखा है। बर्फीले पहाड़ों, विशाल glaciers और घने जंगलों से घिरा यह इलाका प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
प्राकृतिक संसाधनों और सामरिक लिहाज से कैसे अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत बना अलास्का
वक्त के साथ अलास्का को लेकर अमेरिकी नजरिया पूरी तरह बदल गया। जब इस इलाके में विशाल तेल भंडारों, प्राकृतिक गैस, सोने, तांबे और अन्य बेशकीमती खनिजों की खोज हुई, तो आलोचकों की बोलती बंद हो गई। आज अलास्का अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ऊर्जा और खनिजों के मामले में भारी मजबूती प्रदान करता है। यहाँ के तेल कुओं से निकलने वाला ईंधन देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है।
आर्थिक फायदों के अलावा सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अलास्का अमेरिका के लिए एक अभेद्य किले की तरह है। आर्कटिक महासागर के मुहाने पर स्थित होने के कारण यह क्षेत्र अमेरिकी सैन्य और नौसेना अभियानों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। शीत युद्ध के दौर से लेकर आधुनिक भू-राजनीति तक, रूस और एशिया के करीब होने के कारण इस इलाके ने अमेरिका को वैश्विक सुरक्षा में बड़ी सामरिक बढ़त दिलाई है। जिस जमीन को कभी बेकार और घाटे का सौदा माना जाता था, वह आज अमेरिकी महाशक्ति का सबसे चमकीला और मूल्यवान मुकुट बन चुका है।












