कोलकाता के ऐतिहासिक चोरबागान पंडाल में सप्तमी की शाम पसरा मातम
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा का जश्न उस वक्त मातम में बदल गया, जब उत्तरी कोलकाता के प्रसिद्ध चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में एक भयानक हादसा हो गया। सप्तमी की शाम जब मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा था, तभी अचानक हालात बेकाबू हो गए। पंडाल के भीतर और बाहर भारी भीड़ का दबाव इस कदर बढ़ा कि एक बड़ा हादसा टल नहीं सका।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब साढ़े सात बजे के बाद अचानक हुई बारिश से बचने और दर्शन करने की होड़ में लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़ने लगे। इसी आपाधापी के बीच पंडाल का एक हिस्सा और उसका विशेष रूप से तैयार किया गया ढांचा भरभरा कर ढह गया। इस अप्रत्याशित घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जिससे गंभीर भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।
इस हृदयविदारक दुर्घटना में शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 17 लोगों की जान चली गई है। मृतकों में तीन पुरुष, एक मासूम बच्चा और 13 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें तुरंत रेस्क्यू कर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MCH) पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
अनोखी 360-डिग्री थीम और संकरे गलियारे पर उठे गंभीर सवाल
इस साल चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल अपने अनोखे और कलात्मक स्वरूप के कारण खासा चर्चा में था। पंडाल को 'बियांड साउंड' यानी शोर से दूर मौन और आंतरिक शांति की थीम पर तैयार किया गया था। इस 91 साल पुराने पूजा आयोजन को देखने के लिए शहर के कोने-कोने से लोग पहुंच रहे थे। पंडाल की बनावट में एक गोलाकार और ऊंचा गलियारा बनाया गया था, जिससे होकर श्रद्धालुओं को 360 डिग्री घूमकर बाहर निकलना होता था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी संकरे और घुमावदार गोल गलियारे में जब एक साथ हजारों लोग जमा हो गए, तो निकास द्वार पर भारी दबाव बन गया। ऊपर से अचानक शुरू हुई बारिश के कारण स्थिति और अधिक विकट हो गई। बाहर खड़े लोग जब अंदर आने की जल्दी में धक्का-मुक्की करने लगे, तो भीतर मौजूद लोगों के लिए पैर रखने की जगह नहीं बची। कई लोग भीड़ के पैरों तले कुचलकर बेहोश हो गए।
घटना के समय वहां मौजूद एक चश्मदीद ने अपने खौफनाक अनुभव साझा करते हुए बताया, 'वहां चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। कई लोग बेहोश होकर जमीन पर गिर चुके थे। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि घायलों को एंबुलेंस तक पहुंचाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। लोगों को मोटरसाइकिल पर लादकर अस्पताल ले जाया जा रहा था।'
प्रशासन और सरकार की त्वरित कार्रवाई, मुख्यमंत्री पहुंचे अस्पताल
दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन समूह (DMG) की टीमें और चिकित्सा अमला तुरंत भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गया। राहत और बचाव कार्य को युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। एंबुलेंस के जरिए घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया, जिसमें सबसे ज्यादा मरीज कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए हैं।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने तुरंत अस्पताल का रुख किया और वहां भर्ती घायलों से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर चोरबागान पूजा पंडाल को आम जनता के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया है। साथ ही, आयोजकों और क्लब के सदस्यों को थाने तलब कर पूछताछ शुरू कर दी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा मानकों और भीड़ प्रबंधन में कहां चूक हुई थी।
पीड़ित परिवारों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी
इस बड़ी दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों और चिंतित रिश्तेदारों की मदद के लिए एक विशेष सहायता केंद्र स्थापित किया है। प्रशासन ने एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया है, जिस पर फोन करके कोई भी व्यक्ति घायलों और अस्पताल में भर्ती मरीजों के बारे में आधिकारिक जानकारी प्राप्त कर सकता है।
"उत्तरी कोलकाता के चोरबागन पूजा पंडाल में एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद घटना घटी है। इस वक्त हमारी सबसे पहली और बड़ी प्राथमिकता घायलों की जान बचाना और उन्हें बेहतरीन चिकित्सा मुहैया कराना है। हादसे के कारणों की जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी।" — स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी एवं सरकार के प्रतिनिधि
दुर्गा पूजा जैसे पावन पर्व पर हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर बड़े आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन मामले की गहराई से पड़ताल कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की अवांछित घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।












