नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के मौसम के बाद सांप के काटने के मामलों में अचानक तेजी देखी जा रही है। गूगल ट्रेंड्स पर 'पाओकेाटु' यानी सांप के काटने से जुड़ी जानकारियों को लोग लगातार खोज रहे हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आज भी लोग समझ नहीं पाते कि सांप के काटने पर सबसे पहले क्या कदम उठाना चाहिए। हमारी टीम ने इस मामले पर डॉक्टरों और स्थानीय लोगों से बात करके जमीनी हकीकत जानी है।
ज्यादातर मामलों में लोग डर जाते हैं और तुरंत अस्पताल जाने के बजाय स्थानीय ओझा या तांत्रिक के पास पहुंच जाते हैं। झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी के चक्कर में मरीज का कीमती समय बर्बाद हो जाता है। जब तक मरीज को अस्पताल लाया जाता है, तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका होता है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि झाड़-फूंक से जहर का असर कभी कम नहीं होता।
सांप काटने पर झाड़-फूंक क्यों है जानलेवा?
अंधविश्वास के कारण लोग जहरीले और गैर-जहरीले सांप के फर्क को समझ नहीं पाते हैं। कई बार लोग सांप के काटने वाली जगह पर चीरा लगा देते हैं या कसकर कपड़ा बांध देते हैं। इन गलत तरीकों से खून का दौरा रुक जाता है और शरीर का अंग खराब हो सकता है। मेडिकल विज्ञान इन तरीकों को पूरी तरह खतरनाक मानता है। केवल समय पर एंटीवेनम का इंजेक्शन ही मरीज की जान बचा सकता है।
देश के कई अस्पतालों में अब एंटीवेनम की पर्याप्त खुराक उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग लगातार यह प्रचार कर रहा है कि लोग सीधे सरकारी या निजी अस्पताल का रुख करें। लेकिन जागरूकता की कमी आज भी गांवों में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के जरिए गांवों में लोगों को लगातार समझाया जा रहा है।
अस्पताल पहुंचने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
मरीज को जितना हो सके शांत रखना चाहिए और घबराने से बचाना चाहिए। ज्यादा हिलने-डुलने से जहर शरीर में तेजी से फैलता है। काटे गए हिस्से पर किसी तरह का दबाव न डालें और न ही मुंह से जहर चूसने की कोशिश करें। घड़ी, कंगन या टाइट कपड़े तुरंत उतार दें ताकि सूजन आने पर परेशानी न हो। जितनी जल्दी हो सके मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
सांप के रंग-रूप को याद रखने की कोशिश करें ताकि डॉक्टर को इलाज में मदद मिल सके। हालांकि भारत में मिलने वाले ज्यादातर आम सांपों जैसे कोबरा, करैत और वाइपर के लिए एक ही तरह का एंटीवेनम काम करता है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने पर मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है। डरने की कोई जरूरत नहीं है, बस सूझबूझ दिखाने की जरूरत है।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की असल स्थिति
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों को सांप के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए जिला मुख्यालय तक न दौड़ना पड़े। स्थानीय प्रशासन भी इस दिशा में लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। अखबारों और विज्ञापनों के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे अंधविश्वास से दूर रहें। द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि जब तक समाज में जागरूकता नहीं आएगी, ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं।












