दिल्ली की सर्दियों की हल्की धूप के बीच जब हमने बाजारों का रुख किया, तो ठेलों पर सजे हरे-चमकदार आंवले अपनी ओर खींच रहे थे। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में इस देसी फल का विशेष जिक्र करते हुए इसे भारतीय परंपरा और आयुर्वेद का अहम हिस्सा बताया। प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद से ही आम लोगों के मन में इस छोटे से फल को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर क्यों इसे 'अमृत' के समान माना जाता है। हमारी टीम ने इस संबंध में धरातल पर पड़ताल की और दिल्ली की जानी-मानी सीनियर डाइटीशियन अमृता मिश्रा से खास बातचीत की, ताकि पाठकों तक इस 'सुपरफूड' की सही और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाई जा सके।
भारतीय संस्कृति और लोककथाओं में आंवले की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय गिरी अमृत की बूंदों से बताई जाती है। पौराणिक कथाएं भले ही प्रतीकात्मक हों, लेकिन आधुनिक विज्ञान और पोषण विशेषज्ञ भी इस बात पर एकमत हैं कि पोषण के मामले में आंवला सचमुच किसी अमृत से कम नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आंवले का एक पेड़ 65 से 70 साल तक फल देने की क्षमता रखता है। आकार में छोटा यह फल पेक्टिन, शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन-C का सबसे बड़ा प्राकृतिक भंडार है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि महज एक आंवले में लगभग तीन संतरे या 16 केलों से अधिक विटामिन-C पाया जाता है, यही कारण है कि इसे 'विटामिन-C का पावरहाउस' कहा जाता है।
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पोषण का पावरहाउस और डाइटीशियन की सलाह
द 'फ्रीलांस' की इस विशेष पड़ताल में हमने डाइटीशियन अमृता मिश्रा से विस्तार से जाना कि आखिर इस फल को सुपरफूड का दर्जा क्यों हासिल है और यदि कोई व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक रोजाना एक आंवला खाए, तो उसके शरीर में क्या बदलाव आते हैं।
- पोषक तत्वों का खजाना: आंवले में विटामिन-C के अलावा प्रचुर मात्रा में फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम मौजूद होते हैं। इसके साथ ही पॉलीफेनॉल्स, फ्लेवोनॉयड्स और टैनिन्स जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं।
- 30 दिन के बदलाव: यदि कोई व्यक्ति एक महीने तक रोज एक आंवला खाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) मजबूत होती है, पाचन तंत्र सुधरता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक आने लगती है।
- खाने के सही तरीके: आंवला खाने का कोई एक निश्चित तरीका नहीं है। आप इसे कच्चा, जूस के रूप में या अपनी सुविधा के अनुसार डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, पोषण के लिहाज से कच्चा आंवला सबसे बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें फाइबर पूरी मात्रा में बरकरार रहता है।
- डायबीटीज में असरकारक: कम कैलोरी, उच्च फाइबर और बेहद कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह डायबिटीज के मरीजों के लिए एक बेहतरीन फूड माना जाता है।
आंवले से जुड़े कई लोकप्रिय दावे समाज में प्रचलित हैं, जिनमें से एक बड़ा दावा यह है कि रोजाना आंवला खाने से सफेद बाल दोबारा काले हो जाते हैं। हालांकि, डाइटीशियन स्पष्ट करती हैं कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना एक से दो ताजे आंवलों का सेवन करना चाहिए। यदि खाली पेट खाने से एसिडिटी या पेट में जलन महसूस हो, तो इसे भोजन के साथ या बाद में भी खाया जा सकता है। प्रकृति के इस अनमोल उपहार को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाकर हम अपनी सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।








