अग्निवीरों के भविष्य को संवारने के लिए राज्यों के बड़े कदम
भारतीय सेना में चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के भविष्य को लेकर देश के कई राज्यों ने ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत साल 2022 में सेना में शामिल हुए पहले बैच का कार्यकाल अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में इन युवाओं को बेहतर करियर और उज्ज्वल भविष्य देने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों ने पुलिस, वन विभाग, आबकारी और जेल सेवाओं में बंपर आरक्षण देने का ऐलान किया है। इन फैसलों से उन लाखों युवाओं को बड़ी राहत मिली है जो चार साल की सैन्य सेवा के बाद अपनी दूसरी नौकरी की तलाश करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेना के अनुशासन, तकनीकी प्रशिक्षण और उच्च कोटि की शारीरिक दक्षता से लैस ये पूर्व अग्निवीर जब राज्य की पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं का हिस्सा बनेंगे, तो देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। यही वजह है कि मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक, कई राज्य सरकारें अपने स्तर पर नीतिगत बदलाव कर रही हैं।
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मध्य प्रदेश में पुलिस और वन सेवाओं में 20 प्रतिशत आरक्षण
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं। राज्य कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए सीधा 20 प्रतिशत आरक्षण स्वीकृत किया है। गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले जनरल ड्यूटी आरक्षक और विशेष सशस्त्र बल की सीधी भर्तियों में अब इन युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार द्वारा तैयार किए गए कोटे के ढांचे के मुताबिक, इन विभागों में पहले से तय होमगार्ड और पूर्व सैनिकों के कोटे के साथ-साथ अग्निवीरों के लिए भी एक निश्चित हिस्सा सुरक्षित कर दिया गया है। आबकारी आरक्षक और वनरक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी यही फॉर्मूला लागू होगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से मध्य प्रदेश के युवाओं को सेना से सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद रोजगार के ठोस और सुरक्षित विकल्प मिल जाएंगे।
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा तोहफा: लिखित परीक्षा से भी मिलेगी छूट
महाराष्ट्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए एक कदम और आगे बढ़कर बेहद उदार नीति बनाई है। राज्य कैबिनेट ने महाराष्ट्र के मूल निवासी पूर्व अग्निवीरों के लिए ग्रुप सी की वर्दी वाली सरकारी नौकरियों और अर्ध-सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण की मुहर लगा दी है। सबसे खास बात यह है कि योग्य पूर्व अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान दोबारा लिखित परीक्षा के दौर से नहीं गुजरना होगा।
महाराष्ट्र सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत, अग्निवीरों को उनकी चार साल की सैन्य सेवा के दौरान प्राप्त कठोर प्रशिक्षण और अनुभवों का सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें सामान्य शुरुआती प्रशिक्षण से छूट दी जाएगी, हालांकि किसी विशिष्ट तकनीकी पद के लिए जरूरी खास ट्रेनिंग अनिवार्य बनी रहेगी। इसके अलावा, ऊपरी आयु सीमा में भी चार साल की विशेष छूट दी जाएगी ताकि उम्र के लिहाज से किसी भी युवा को नुकसान न उठाना पड़े। पुलिस कांस्टेबल, जेल प्रहरी, फायरमैन और होमगार्ड जैसे विभिन्न महकमों में इन युवाओं को सीधा अवसर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में भी नीतिगत मुहर, नए सेवा नियमों का हुआ गठन
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने भी पूर्व अग्निवीरों के लिए खजाने के द्वार खोल दिए हैं। छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक में पूर्व अग्निवीर सैनिकों को राज्य की तृतीय श्रेणी की सिविल सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का औपचारिक अनुमोदन कर दिया गया है। इसके लिए विशेष रूप से 'छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम' को मंजूरी दी गई है।
इस नई नियमावली के तहत पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को स्पष्ट रूप से आरक्षण का लाभ मिलेगा। इन नियमों में भर्ती के कड़े और पारदर्शी मापदंड तय किए गए हैं, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे।
"देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे ये युवा जब चार साल की सैन्य सेवा के बाद लौटेंगे, तो उनका अनुभव और अनुशासन राज्य की कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगा। हमारी सरकार उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।" — विभिन्न राज्य प्रशासनिक अधिकारी
देशभर में रोजगार के नए रास्ते और व्यापक प्रभाव
अग्निपथ योजना के तहत आने वाले समय में जब पहला बैच अपनी सेवा पूरी करके बाहर आएगा, तो उनके सामने करियर को लेकर कोई असमंजस की स्थिति न रहे, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार मिलकर काम कर रही हैं। अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस सेवाओं में प्राथमिकता मिलने से इन युवाओं का मनोबल ऊंचा रहेगा। देश के अन्य राज्य भी इस दिशा में अपनी नीतियों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि अनुशासित और प्रशिक्षित मानव संसाधन का सही उपयोग किया जा सके।



