आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा कदम
देश के अन्नदाताओं की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को तकनीक से लैस करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में खेती को आसान और कम खर्चीला बनाने के लिए कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के तहत एक नई और बेहद उपयोगी योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है, ताकि वे खेती के हर चरण को समय पर और बिना किसी अतिरिक्त शारीरिक या आर्थिक दबाव के पूरा कर सकें।
पारंपरिक खेती में आने वाली लागत और महंगे उपकरणों की खरीद आम किसानों के बजट से बाहर होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी के दायरे को काफी बढ़ा दिया है। इस वित्तीय वर्ष के दौरान दर्जनों उन्नत उपकरणों को इस सूची में शामिल किया गया है, जिससे किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार मशीन चुनने का पूरा अवसर मिल रहा है।
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86 प्रकार के कृषि यंत्रों पर मिल रही है भारी छूट
कृषि विभाग की तरफ से जारी की गई विस्तृत सूची के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत कुल 86 प्रकार के आधुनिक कृषि उपकरणों को शामिल किया गया है। इनमें खेती की बुनियादी जुताई से लेकर फसल कटाई और उसके बाद के प्रबंधन तक की मशीनें मौजूद हैं। ट्रैक्टर, पावर टिलर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, कंबाइन हार्वेस्टर, थ्रेशर, रीपर, मल्चर, श्रेडर, स्ट्रॉ रीपर, स्प्रे मशीन और आधुनिक पंप सेट जैसे तमाम उपकरण इस सब्सिडी योजना के दायरे में आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से किसानों को मजदूरों पर अपनी निर्भरता कम करने में बहुत मदद मिलेगी। अक्सर कटाई या बुवाई के सीजन में मजदूरों की कमी और उनकी उच्च मजदूरी के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में यह योजना किसानों के लिए एक बड़ा संबल बनकर सामने आई है, जिससे समय की बचत के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
कस्टम हायरिंग सेंटर और ड्रोन तकनीक पर विशेष सहायता
छोटे और सीमांत किसानों के पास भूमि का रकबा कम होता है, जिसके कारण वे व्यक्तिगत रूप से महंगे कृषि यंत्र खरीदने में असमर्थ होते हैं। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए योजना के तहत सामूहिक खेती और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके जरिए किसान बेहद कम किराए पर बड़े और महंगे यंत्र प्राप्त कर सकते हैं।
कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए सरकार लागत का 40 प्रतिशत तक यानी अधिकतम 4 लाख रुपये तक की सहायता दे रही है। वहीं, कृषि यंत्र बैंक के लिए 80 प्रतिशत तक यानी अधिकतम 8 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद का प्रावधान है। इसके अलावा, आधुनिक खेती की आधुनिक जरूरतों को देखते हुए ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए भी विशेष सब्सिडी दी जा रही है, जिससे गांवों में ही ड्रोन के माध्यम से उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव सुलभ हो सके।
"खेती में तकनीक का समावेश समय की सबसे बड़ी मांग है। जब तक हमारा किसान आधुनिक उपकरणों से लैस नहीं होगा, तब तक उसकी उत्पादन लागत कम होना और आय में वृद्धि होना संभव नहीं है। सरकार की यह योजना किसानों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगी।"— कृषि विशेषज्ञ, नीति एवं विकास विश्लेषक
पारदर्शी चयन प्रक्रिया और डीबीटी के माध्यम से भुगतान
योजना का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे, इसके लिए पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है। आवेदन करने वाले किसानों की संख्या अधिक होने और उपकरणों की सीमित उपलब्धता की स्थिति में लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से निष्पक्ष लॉटरी प्रणाली के जरिए किया जाएगा। लॉटरी में चयनित होने वाले किसानों को मशीन खरीदने के लिए एक निश्चित समय सीमा का परमिट जारी किया जाता है।
नियमों के अनुसार, किसान को पहले उपकरण की पूरी कीमत अपनी जेब से चुकानी होती है। इसके बाद सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, निर्धारित सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेज दी जाती है। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाती है और पारदर्शिता बनी रहती है।
आवेदन करने की अंतिम तिथि और जरूरी दस्तावेज
जो भी किसान इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसानों को कुछ आवश्यक दस्तावेज जैसे कि आधार कार्ड, भूमि से संबंधित अद्यतन दस्तावेज या स्व-घोषणा पत्र, और बैंक पासबुक का विवरण अपलोड करना अनिवार्य होता है।
ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है। कृषि विभागों और विशेषज्ञों ने सभी किसानों से अपील की है कि वे अंतिम समय की तकनीकी बाधाओं से बचने के लिए समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें। जिन किसानों का नाम पहली लॉटरी सूची में नहीं आ पाता है, वे अगले चरण के प्रयासों में पुनः भाग ले सकते हैं।






