होम/देश/अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ा झटका, सीपीटी नियमों को लेकर यूनिवर्सिटी ने उठाए सख्त कदम
देशपढ़ने में समय: 7 मिनट

अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ा झटका, सीपीटी नियमों को लेकर यूनिवर्सिटी ने उठाए सख्त कदम

अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग हासिल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए नियम कड़े किए जा रहे हैं। खासकर सीपीटी यानी करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को लेकर एक प्रतिष्ठित अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिससे भारतीय स्टूडेंट्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
27 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ा झटका, सीपीटी नियमों को लेकर यूनिवर्सिटी ने उठाए सख्त कदम
📷 अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए बड़ा झटका, सीपीटी नियमों को लेकर यूनिवर्सिटी ने उठाए सख्त कदम — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • अमेरिका के विश्वविद्यालयों में CPT (करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) नियमों को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है।
  • भारतीय छात्रों को अपने कोर्सवर्क और यूनिवर्सिटी के दिशा-निर्देशों का बेहद कड़ाई से पालन करना होगा।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर छात्रों का वीजा संकट में पड़ सकता है और कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

अमेरिका में उच्च शिक्षा का सपना और बदलते कड़े नियम

विदेश जाकर उच्च शिक्षा हासिल करना और अमेरिका जैसी महाशक्ति में अपने करियर की मजबूत नींव रखना आज भी लाखों भारतीय युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है। देश के कोने-कोने से हर साल हजारों छात्र अपने भविष्य को संवारने के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों का रुख करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका में पढ़ाई का यह सफर पहले जितना आसान नहीं रह गया है। विश्वविद्यालयों और आव्रजन नियमों में लगातार हो रहे बदलावों ने छात्रों की राह को कठिन बना दिया है। ताजा मामला एक प्रमुख अमेरिकी यूनिवर्सिटी से सामने आया है, जहां सीपीटी यानी करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया है। इस बदलाव का सीधा असर उन भारतीय छात्रों पर पड़ रहा है जो अपनी डिग्री के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव हासिल करने की जुगत में रहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में बदलते प्रशासनिक रुख और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दस्तावेजों की कड़ी जांच-परख के कारण नियमों का पालन करना अब पहले से कहीं अधिक अनिवार्य हो गया है। छोटी सी भी लापरवाही छात्रों के लिए भारी पड़ सकती है। ऐसे में जो छात्र अपनी पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम जॉब या इंटर्नशिप के जरिए अनुभव बटोरना चाहते हैं, उन्हें अब यूनिवर्सिटी के हर एक नियम को बहुत बारीकी से समझना होगा। नियमों की अनदेखी करने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन से लेकर आव्रजन विभाग तक की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जिससे कई बार छात्रों का अमेरिकी सपना बीच में ही अधूरा छूट जाता है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

इंडस्ट्री की चमक-दमक का कड़वा सच: 50 साल देने वाले मुश्ताक खान के जनाजे से क्यों दूर रहे बड़े सितारे?

इंडस्ट्री की चमक-दमक का कड़वा सच: 50 साल देने वाले मुश्ताक खान के जनाजे से क्यों दूर रहे बड़े सितारे?

शादी के तीन दशक बाद खौफनाक वारदात: पति की हत्या कर शव जलाया, ड्रम से ढंककर रेत में दबाया सच

शादी के तीन दशक बाद खौफनाक वारदात: पति की हत्या कर शव जलाया, ड्रम से ढंककर रेत में दबाया सच

सिर्फ टी-शर्ट पहनने से नहीं चलेगा काम: प्रीति जिंटा की टीम पर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की दो टूक

सिर्फ टी-शर्ट पहनने से नहीं चलेगा काम: प्रीति जिंटा की टीम पर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की दो टूक

वैश्विक बाजार में चावल व्यापार के बदले नियम: निर्यात और भंडारण पर नई शर्तों से कारोबारियों में हलचल

वैश्विक बाजार में चावल व्यापार के बदले नियम: निर्यात और भंडारण पर नई शर्तों से कारोबारियों में हलचल

विश्वविद्यालय परिसर में फिर गरमाया माहौल: परीक्षा पेपर लिफाफे के विवाद में लिपिक को मिली धमकी, वीडियो वायरल

विश्वविद्यालय परिसर में फिर गरमाया माहौल: परीक्षा पेपर लिफाफे के विवाद में लिपिक को मिली धमकी, वीडियो वायरल

बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी: अब एजेंटों के भारी भरकम कमीशन पर लगेगी लगाम, घटेगा प्रीमियम का बोझ

बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी: अब एजेंटों के भारी भरकम कमीशन पर लगेगी लगाम, घटेगा प्रीमियम का बोझ

मिशन 2027 का आगाज: शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनावों को लेकर भाजपा ने बनाई बड़ी रणनीति

मिशन 2027 का आगाज: शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनावों को लेकर भाजपा ने बनाई बड़ी रणनीति

स्वाइन फ्लू का गंभीर खतरा: किन मरीजों की लापरवाही बन सकती है जानलेवा, जानें बचाव के जरूरी उपाय

स्वाइन फ्लू का गंभीर खतरा: किन मरीजों की लापरवाही बन सकती है जानलेवा, जानें बचाव के जरूरी उपाय

आखिर क्या है सीपीटी (CPT) और छात्रों के लिए इसका महत्व

करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग यानी सीपीटी अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक ऐसा जरिया है जिसके माध्यम से वे अपने अध्ययन पाठ्यक्रम का हिस्सा रहते हुए इंटर्नशिप या फील्ड वर्क कर सकते हैं। यह ट्रेनिंग उनके अकादमिक सिलेबस का एक अहम हिस्सा होती है और इसके जरिए छात्रों को अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत में काम करने का बहुमूल्य अनुभव मिलता है। कई बार इस ट्रेनिंग के एवज में छात्रों को स्टाइपेंड या सैलरी भी मिलती है, जिससे उनके रहने-खाने और ट्यूशन फीस के खर्च का एक हिस्सा निकल जाता है। भारतीय छात्रों के बीच सीपीटी बेहद लोकप्रिय है क्योंकि यह उन्हें पढ़ाई पूरी होने से पहले ही इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ नेटवर्क बनाने का मौका देती है।

हालांकि, सीपीटी का इस्तेमाल करने के लिए कुछ बहुत ही कड़े और स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। छात्रों को अपनी यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल स्टूडेंट्स ऑफिस से विधिवत अनुमति लेनी होती है और उनका एम्प्लॉयमेंट उनके मुख्य कोर्स से सीधे तौर पर जुड़ा होना चाहिए। यदि छात्र अपने कोर्स के दायरे से बाहर जाकर या बिना अनुमति के किसी कंपनी में काम करते हुए पाए जाते हैं, तो इसे वीजा नियमों का खुला उल्लंघन माना जाता है। हालिया बदलावों के बाद यूनिवर्सिटी ने इसी प्रक्रिया को और अधिक जटिल और अनुशासित बना दिया है, ताकि किसी भी तरह के नियमों के दुरुपयोग को पूरी तरह से रोका जा सके।

विश्वविद्यालय के नए दिशा-निर्देश और भारतीय छात्रों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

हाल ही में संबंधित अमेरिकी यूनिवर्सिटी द्वारा जारी किए गए नए और कड़े दिशा-निर्देशों ने कैंपस में रह रहे भारतीय छात्रों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। नए नियमों के तहत अब यूनिवर्सिटी प्रशासन सीपीटी के आवेदनों की बहुत बारीकी से समीक्षा कर रहा है। छात्रों को यह साबित करना होगा कि वे जिस कंपनी में इंटर्नशिप करने जा रहे हैं, वह उनके अकादमिक पाठ्यक्रम और भविष्य के करियर गोल से किस प्रकार मेल खाती है। इसके अलावा, काम के घंटों और क्रेडिट आवर्स को लेकर भी पाबंदियों को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। मामूली दस्तावेजों की कमी या देरी से आवेदन करने पर अब सीधे तौर पर सीपीटी के अनुरोध को खारिज किया जा रहा है।

इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय छात्रों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। जानकारों का कहना है कि छात्रों को अपने कोर्स कोऑर्डिनेटर और इंटरनेशनल एडवाइजर के साथ लगातार संपर्क में रहना चाहिए। किसी भी कंपनी में ऑफर मिलने से पहले यूनिवर्सिटी के नियमों की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। यदि कोई छात्र बिना आधिकारिक अनुमति के अपने काम की शुरुआत कर देता है, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह की सख्ती से न केवल छात्रों का अकादमिक शेड्यूल प्रभावित होता है, बल्कि उनके मानसिक तनाव में भी भारी इजाफा देखने को मिल रहा है।

वीजा स्टेटस पर मंडराता खतरा और कानूनी पेचीदगियां

अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का पूरा जीवन और भविष्य उनके एफ-1 वीजा (F-1 Visa) की वैधता पर टिका होता है। यदि कोई छात्र सीपीटी से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है, तो इसका सीधा असर उसके लीगल स्टेटस पर पड़ता है। अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) विभाग इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाता है। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर छात्रों का SEVIS रिकॉर्ड तुरंत टर्मिनेट किया जा सकता है, जिसका मतलब है कि छात्र को तुरंत वैध कारणों के साथ अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है या फिर देश निकाला झेलना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति किसी भी छात्र और उसके परिवार के लिए एक बड़ा मानसिक और आर्थिक आघात साबित हो सकती है।

विदेशी शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका जाने वाले हर छात्र को वहां के स्थानीय कानूनों और यूनिवर्सिटी के बायलॉज की पूरी जानकारी होनी चाहिए। कई बार छात्र एजेंटों के भरोसे या अधूरी जानकारी के आधार पर ऐसे कदम उठा बैठते हैं जो बाद में उनके लिए जी का जंजाल बन जाते हैं। सीपीटी के मामलों में एक छोटी सी कागजी गलती या गलत समय पर किया गया आवेदन भी भारी पड़ सकता है। इसलिए वकीलों और शिक्षा सलाहकारों की मदद लेना इस समय पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है ताकि किसी भी तरह की कानूनी पेचीदगी से बचा जा सके।

भारतीय स्टूडेंट्स किन बातों का रखें विशेष ख्याल

बदलते हालातों और कड़े होते नियमों के बीच अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय युवाओं को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है। सबसे पहले, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे जो भी इंटर्नशिप या ट्रेनिंग चुन रहे हैं, वह पूरी तरह से यूनिवर्सिटी के नियमों के दायरे में आती हो। कभी भी समय सीमा से अधिक काम न करें और अपने एंप्लॉयमेंट ऑथराइजेशन फॉर्म (I-20) को हमेशा अपडेट रखें। इसके अलावा, अपनी पढ़ाई के प्रदर्शन को भी बेहतर बनाए रखना अनिवार्य है, क्योंकि खराब ग्रेड्स आने पर यूनिवर्सिटी आपके सीपीटी आवेदन को रद्द कर सकती है।

"अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हमारे युवाओं को यह समझना होगा कि वहां के कानून और संस्थान अनुशासनात्मक मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतते हैं। सीपीटी या किसी भी अन्य कार्य अनुमति के संबंध में यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल ऑफिस से हर एक बात लिखित में स्पष्ट कर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में वीजा संकट जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।"— डॉ. आलोक शर्मा, विदेशी शिक्षा एवं आव्रजन विशेषज्ञ

अंत में यही कहा जा सकता है कि अमेरिका में करियर बनाने का सपना देखने वाले छात्रों को अनुशासन और जागरूकता को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाना चाहिए। नियमों की जानकारी न होना कभी भी कानूनी रूप से बचाव का आधार नहीं बनता है। यदि छात्र पूरी सावधानी, पारदर्शिता और नियमों के दायरे में रहकर अपनी अकादमिक और व्यावहारिक गतिविधियों को आगे बढ़ाते हैं, तो वे न केवल अपनी डिग्री सफलतापूर्वक पूरी कर पाएंगे, बल्कि अमेरिकी जॉब मार्केट में अपने लिए एक सुरक्षित और शानदार भविष्य का निर्माण भी कर सकेंगे।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

इंडस्ट्री की चमक-दमक का कड़वा सच: 50 साल देने वाले मुश्ताक खान के जनाजे से क्यों दूर रहे बड़े सितारे?NATIONAL

इंडस्ट्री की चमक-दमक का कड़वा सच: 50 साल देने वाले मुश्ताक खान के जनाजे से क्यों दूर रहे बड़े सितारे?

27 सित॰
शादी के तीन दशक बाद खौफनाक वारदात: पति की हत्या कर शव जलाया, ड्रम से ढंककर रेत में दबाया सचNATIONAL

शादी के तीन दशक बाद खौफनाक वारदात: पति की हत्या कर शव जलाया, ड्रम से ढंककर रेत में दबाया सच

27 सित॰
सिर्फ टी-शर्ट पहनने से नहीं चलेगा काम: प्रीति जिंटा की टीम पर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की दो टूकNATIONAL

सिर्फ टी-शर्ट पहनने से नहीं चलेगा काम: प्रीति जिंटा की टीम पर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की दो टूक

27 सित॰
वैश्विक बाजार में चावल व्यापार के बदले नियम: निर्यात और भंडारण पर नई शर्तों से कारोबारियों में हलचलNATIONAL

वैश्विक बाजार में चावल व्यापार के बदले नियम: निर्यात और भंडारण पर नई शर्तों से कारोबारियों में हलचल

27 सित॰
विश्वविद्यालय परिसर में फिर गरमाया माहौल: परीक्षा पेपर लिफाफे के विवाद में लिपिक को मिली धमकी, वीडियो वायरलNATIONAL

विश्वविद्यालय परिसर में फिर गरमाया माहौल: परीक्षा पेपर लिफाफे के विवाद में लिपिक को मिली धमकी, वीडियो वायरल

27 सित॰
बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी: अब एजेंटों के भारी भरकम कमीशन पर लगेगी लगाम, घटेगा प्रीमियम का बोझNATIONAL

बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी: अब एजेंटों के भारी भरकम कमीशन पर लगेगी लगाम, घटेगा प्रीमियम का बोझ

27 सित॰
मिशन 2027 का आगाज: शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनावों को लेकर भाजपा ने बनाई बड़ी रणनीतिNATIONAL

मिशन 2027 का आगाज: शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनावों को लेकर भाजपा ने बनाई बड़ी रणनीति

27 सित॰
स्वाइन फ्लू का गंभीर खतरा: किन मरीजों की लापरवाही बन सकती है जानलेवा, जानें बचाव के जरूरी उपायNATIONAL

स्वाइन फ्लू का गंभीर खतरा: किन मरीजों की लापरवाही बन सकती है जानलेवा, जानें बचाव के जरूरी उपाय

27 सित॰