दिल्ली के इंडिया गेट पर गूंजी अंकिता भंडारी के इंसाफ की पुकार
उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड को लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन उसके माता-पिता के आंसू आज भी नहीं थमे हैं। न्याय की आस में भटक रहे पीड़ित माता-पिता ने अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक इंडिया गेट पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना है। उनका कहना है कि जब तक उनकी बेटी के असली गुनहगारों को उनके अंजाम तक नहीं पहुंचाया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष और लड़ाई यूं ही जारी रहेगी।
घटना के बाद से लगातार स्थानीय स्तर से लेकर तमाम मंचों पर न्याय की गुहार लगाने के बाद भी परिवार का सिस्टम से मोहभंग होता दिख रहा है। उनका आरोप है कि इस पूरे जघन्य अपराध में कई बड़े चेहरे और तथाकथित वीआईपी शामिल थे, जिनके नाम आज भी पर्दे के पीछे छिपे हुए हैं। माता-पिता का यह धरना इस बात का प्रमाण है कि आम आदमी को न्याय पाने के लिए कितनी लंबी और कठिन लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं।
माता-पिता का छलका दर्द, बोले- हर दिन घुट-घुट कर जी रहा है परिवार
मीडिया से बातचीत के दौरान अंकिता के पिता ने भर्राई आवाज में अपनी बेटी के साथ हुई दरिंदगी को याद किया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी बेहद सीधी-साधी थी और अपने परिवार का सहारा बनने के लिए नौकरी करने गई थी, लेकिन चंद पैसों की हवस और हवस के पुजारियों ने उसकी जिंदगी छीन ली। आज हर बीतता दिन परिवार के लिए किसी सजा से कम नहीं है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वे लगातार अपनी बेटी के लिए इंसाफ की भीख मांग रही हैं।
परिवार का कहना है कि उन्होंने देश की न्याय व्यवस्था पर हमेशा भरोसा रखा है, लेकिन जांच की धीमी रफ्तार और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका ने उन्हें डरा दिया है। इंडिया गेट पर तख्ती लेकर बैठे इन लाचार माता-पिता को देखकर वहां से गुजरने वाले आम नागरिकों की आंखें भी नम हो गईं। हर कोई इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा नजर आया और सरकार से इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की।
वीआईपी कनेक्शन और सबूत मिटाने के गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में शुरुआत से ही यह सवाल उठता रहा है कि आखिर वह कौन सा 'वीआईपी' था जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था? परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद सबूतों को मिटाने की साजिश रची गई थी। रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर उन कमरों को नेस्तनाबूद कर दिया गया जहां अपराध को अंजाम दिया गया था। इस कार्रवाई ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
माता-पिता ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए दो टूक कहा कि जब तक उस वीआईपी का चेहरा बेनकाब नहीं होता और उसे कटघरे में खड़ा नहीं किया जाता, तब तक उत्तराखंड की बेटी की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को जनता के दबाव में आकर इस मामले की फिर से गहराई से समीक्षा करनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
"मेरी बेटी वापस तो नहीं आ सकती, लेकिन मैं आखिरी सांस तक उसकी हत्यारों और उस वीआईपी को सजा दिलाने के लिए लड़ता रहूंगा। चाहे मुझे इसके लिए कहीं भी धरना देना पड़े।"— वीर सिंह भंडारी, अंकिता के पिता
राजनीतिक दलों और समाज से मिला समर्थन
दिल्ली के इंडिया गेट पर जब अंकिता के माता-पिता धरने पर बैठे, तो वहां कई सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग भी उनका समर्थन करने पहुंच गए। देश की राजधानी में इस तरह का प्रदर्शन यह बताता है कि यह मुद्दा अब केवल एक राज्य या एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे देश की बेटियों की सुरक्षा का बन चुका है। लोग सोशल मीडिया पर भी इस धरने का समर्थन कर रहे हैं और सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराधों में राजनीतिक संरक्षण मिलना बेहद शर्मनाक है। जब तक देश में अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना नामुमकिन होगा। अंकिता के माता-पिता की यह लड़ाई अब एक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
आगे की कानूनी लड़ाई और देश की उम्मीदें
अंकिता के परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट तक अपनी बात रखेंगे। निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय तक वे इस केस की हर सुनवाई पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। उनका यह धरना सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की न्याय प्रणाली से एक आखिरी गुहार है कि वह दिखाए कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
अब देखना यह होगा कि देश की राजधानी में हुए इस प्रदर्शन के बाद क्या शासन और प्रशासन की नींद टूटती है या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह धूल फांकती रह जाएगी। फिलहाल, अंकिता के माता-पिता का हौसला और उनका संघर्ष देश के हर उस नागरिक के लिए एक मिसाल बन चुका है जो अन्याय के खिलाफ डटकर खड़ा होना चाहता है।











