आईफोन पर स्क्रीन प्रोटेक्टर को लेकर ऐपल के बड़े अधिकारियों की सोच
अक्सर जब कोई आम यूजर बाजार से नया स्मार्टफोन खरीदता है, तो उसकी सबसे पहली प्राथमिकता डिवाइस को सुरक्षित रखना होती है। इसके लिए लोग तुरंत मोबाइल शॉप का रुख करते हैं और स्क्रीन पर एक महंगा टेम्पर्ड ग्लास या स्क्रीन प्रोटेक्टर लगवा लेते हैं। इसके पीछे मुख्य मकसद यह होता है कि अगर फोन कभी हाथ से छूटे या गिरे, तो स्क्रीन का महंगा ग्लास टूटने से बच जाए और रिपेयरिंग में भारी-भरकम खर्च न करना पड़े। प्रीमियम स्मार्टफोन यूजर्स के बीच यह चलन बहुत आम है, और लोग बिना सोचे-समझे अपने महंगे फोन्स पर प्लास्टिक या ग्लास प्रोटेक्टर की एक अतिरिक्त परत चढ़ा देते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शुमार ऐपल के बड़े अधिकारी इस ट्रेंड के बिल्कुल खिलाफ हैं? जी हां, ऐपल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग चीफ टॉम मरीब ने हाल ही में एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उन्हें आईफोन की स्क्रीन पर स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाना बिल्कुल पसंद नहीं है। कंपनी का मानना है कि उन्होंने यूजर की सुविधा और फोन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए डिस्प्ले पर बहुत काम किया है, जिससे इस तरह के बाहरी सुरक्षा उपायों की जरूरत ही न पड़े।
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क्यों नहीं चाहते ऐपल के अधिकारी कि आप लगाएं स्क्रीन प्रोटेक्टर?
ऐपल के हार्डवेयर चीफ के अनुसार, कंपनी ने आईफोन की स्क्रीन को मजबूत और स्क्रैच रेसिस्टेंट बनाने के लिए वर्षों तक भारी रिसर्च और डेवलपमेंट किया है। कंपनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता को फोन का आनंद लेते समय किसी भी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े। जब कोई यूजर फोन की ऑरिजिनल स्क्रीन पर कोई दूसरा प्लास्टिक या ग्लास गार्ड चिपकाता है, तो वह डिस्प्ले के टच रिस्पांस और विजुअल क्वालिटी को प्रभावित करता है।
ऐपल का यह भी तर्क है कि डिस्प्ले को बेहद बारीकी और इंजीनियरिंग के उच्च मानकों के साथ डिजाइन किया जाता है ताकि ग्राहकों को बेहतरीन और प्रीमियम टच एक्सपीरियंस मिल सके। स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाने से फोन की ओरिजनल फिनिशिंग छिप जाती है और कई बार स्क्रीन की चमक या ब्राइटनेस पर भी आंशिक असर पड़ता है। कंपनी चाहती है कि ग्राहक बिना किसी रुकावट के उस तकनीक का सीधा अनुभव करें जिसके लिए उन्होंने इतनी बड़ी कीमत चुकाई है।
सिरैमिक शील्ड 2 तकनीक का कमाल और स्क्रैच रेजिस्टेंस
ऐपल के इस दावे के पीछे एक सबसे बड़ा तकनीकी कारण उनकी हालिया डिस्प्ले तकनीक है, जिसे 'सिरैमिक शील्ड 2' का नाम दिया गया है। कंपनी ने इस नई तकनीक को सबसे पहले अपनी फ्लैगशिप आईफोन 17 सीरीज में इंट्रोड्यूस किया था, जिसे बाद के अन्य प्रीमियम मॉडल्स में भी शामिल किया गया है। ऐपल के दावों के मुताबिक, यह नई सिरैमिक शील्ड तकनीक पुराने वर्जन की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक स्क्रैच रेसिस्टेंट है।
कंपनी ने बाजार में इस फोन को उतारने से पहले लेबोरेटरी में कई कड़े ड्रॉप और स्क्रैच टेस्ट किए हैं। इन टेस्ट्स को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि वे सालों के कठिन और सामान्य इस्तेमाल के प्रभावों को कम समय में ही माप सकें। ऐपल का यह कड़ा परीक्षण इस बात का प्रमाण है कि रोजमर्रा के उपयोग में यानी जेब में चाबियों के साथ रखे जाने पर भी आईफोन की स्क्रीन पर आसानी से खरोंच नहीं आएगी।
"हमने स्क्रीन को इतना मजबूत और स्क्रैच रेसिस्टेंट बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की है कि सामान्य इस्तेमाल में किसी बाहरी प्रोटेक्टर की जरूरत ही न पड़े। हमारा उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिना किसी समझौते के बेहतरीन डिस्प्ले अनुभव देना है।"— टॉम मरीब, हार्डवेयर इंजीनियरिंग चीफ, ऐपल
स्क्रैच प्रोटेक्शन और ड्रॉप प्रोटेक्शन में अंतर को समझना जरूरी
हालांकि, यहां यह समझना बेहद आवश्यक है कि स्क्रीन पर आने वाले स्क्रैच और फोन के नीचे गिरने पर होने वाला डैमेज, दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं। सिरैमिक शील्ड 2 तकनीक मुख्य रूप से स्क्रीन को रोजमर्रा के छोटे-मोटे खरोंचों और सतह पर होने वाले नुकसान से बचाने पर फोकस करती है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि यदि आपका फोन किसी ऊंचाई से सीधे कंक्रीट या पक्के फर्श पर गिर जाए, तो उसका ग्लास टूटेगा ही नहीं।
भौतिक विज्ञान के नियमों के अनुसार, कांच एक नाजुक पदार्थ है और अत्यधिक दबाव या तेज झटके से वह टूट सकता है। यही कारण है कि तकनीकी विशेषज्ञ मानते हैं कि स्क्रीन प्रोटेक्टर और टेम्पर्ड ग्लास मुख्य रूप से ड्रॉप प्रोटेक्शन (गिरने से बचाव) के लिए एक हद तक सुरक्षा कवच का काम करते हैं, जबकि ऐपल की तकनीक स्क्रैच प्रूफिंग पर ज्यादा जोर देती है।
क्या आपको अपने आईफोन पर स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाना चाहिए?
इन तमाम तकनीकी बहसों और कंपनी के बयानों के बावजूद, अंतिम फैसला हमेशा उपभोक्ता का ही होता है। चूंकि आईफोन की डिस्प्ले रिपेयरिंग का खर्च बहुत ज्यादा होता है, इसलिए कई लोग मानसिक शांति के लिए स्क्रीन प्रोटेक्टर लगाना पसंद करते हैं, ताकि यदि फोन गलती से गिर भी जाए तो सारा नुकसान केवल सस्ते टेम्पर्ड ग्लास पर ही पड़े, ऑरिजिनल स्क्रीन सुरक्षित रहे।
दूसरी तरफ, यदि आप ऐपल के उस प्रीमियम और नेचुरल डिस्प्ले अनुभव का आनंद लेना चाहते हैं जिसके लिए फोन जाना जाता है, तो आप बिना किसी प्रोटेक्टर के भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इसकी मजबूती पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो चुकी है। अंततः, स्क्रीन प्रोटेक्टर का उपयोग करना या न करना पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत पसंद और आपके इस्तेमाल के तौर-तरीकों पर निर्भर करता है।






