घरेलू मैदान पर निराशाजनक वापसी
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के टेस्ट कप्तान बाबर आजम के लिए घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में वापसी का यह अनुभव किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रनों के लिए जूझ रहे इस दिग्गज बल्लेबाज से उम्मीद की जा रही थी कि वे घरेलू स्तर पर अपनी फॉर्म हासिल कर लेंगे, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत रहे। प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी ग्रेड-I के तीसरे दौर के एक महत्वपूर्ण मुकाबले में बाबर का बल्ला दोनों पारियों में पूरी तरह शांत नजर आया, जिससे खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच निराशा का माहौल है।
एबटाबाद क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में बाबर आजम ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड यानी OGDCL की ओर से मैदान पर उतरे थे। उनके सामने खान रिसर्च लेबोरेटरीज (KRL) की मजबूत गेंदबाजी यूनिट थी। लगभग सात साल बाद घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उतरे बाबर से एक लंबी और जिम्मेदारी भरी पारी की उम्मीद थी, मगर वे पिच पर टिकने के लिए भी संघर्ष करते दिखे।
मैच के दौरान उनकी तकनीक और आत्मविश्वास दोनों में कमी साफ झलक रही थी। विपक्षी गेंदबाजों ने उनकी कमजोरियों का पूरा फायदा उठाया और उन्हें क्रीज पर पैर जमाने का कोई मौका नहीं दिया। इस नाकामी ने उनके मौजूदा फॉर्म पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब टीम को आगामी श्रृंखलाओं में उनसे सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं।
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पहली पारी में शॉर्ट पिच गेंद का शिकार
मुकाबले की पहली पारी में बाबर आजम ने क्रीज पर संभलकर खेलने की कोशिश की, लेकिन तेज गेंदबाज अरशद इकबाल की एक बेहतरीन रणनीति के आगे उनकी एक न चली। बाबर ने पारी के दौरान 20 गेंदों का सामना किया और केवल 12 रन ही जोड़ सके। उनकी इस पारी में न तो वह प्रवाह दिखा और न ही वह आत्मविश्वास जो आमतौर पर उनकी बल्लेबाजी की पहचान माना जाता है।
अरशद इकबाल ने उन्हें शॉर्ट पिच गेंद डालकर जाल में फंसाया। अतिरिक्त उछाल वाली इस गेंद पर बाबर ने मिडविकेट की दिशा में पुल शॉट खेलने का प्रयास किया। हालांकि, गेंद की गति और उछाल का अनुमान लगाने में वे चूक गए और शॉट पर उनका नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो गया। गेंद बल्ले का ऊपरी किनारा लेते हुए हवा में लहरा उठी और मिडविकेट पर तैनात फील्डर ने बिना किसी गलती के आसान सा कैच लपक लिया।
इस तरह उनकी पहली पारी का अंत बेहद साधारण तरीके से हुआ। टीम को संकट से उबारने की उनकी यह कोशिश शुरुआती ओवरों में ही दम तोड़ गई, जिससे उनकी टीम पर दबाव और अधिक बढ़ गया।
फॉलोऑन के दौरान भी नहीं चला बल्ला
खान रिसर्च लेबोरेटरीज ने अपनी पहली पारी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 398 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में OGDCL की पूरी टीम दबाव में बिखर गई और महज 217 रनों पर सिमट गई। पहली पारी में कम स्कोर के चलते टीम को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे बाबर आजम के पास अपनी पिछली गलती सुधारने का दूसरा मौका आ गया था।
क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद थी कि दूसरी पारी में वे अपनी पुरानी लय वापस पाएंगे और एक बड़ी पारी खेलेंगे। मगर इस बार भी नतीजा कुछ अलग नहीं रहा। क्रीज पर उतरने के बाद वे असहज नजर आए और इस बार फहीम अशरफ की एक सटीक गेंद ने उन्हें पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। फहीम की गेंद पर वे आगे बढ़कर डिफेंस करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन गेंद और बल्ले का कोई संपर्क नहीं हुआ और सीधे उनके पैड पर जा लगी।
अंपायर ने बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया। इस प्रकार दूसरी पारी में उन्होंने मात्र 15 गेंदों का सामना किया और केवल 4 रन बनाकर चलते बने। इस तरह दोनों ही पारियों में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।
"घरेलू क्रिकेट में इस तरह का प्रदर्शन किसी भी बड़े खिलाड़ी के लिए चिंता का विषय होता है। तकनीक में आ रही कमियों को दूर करने के लिए उन्हें अपने बेसिक्स पर फिर से काम करना होगा।"— खेल विशेषज्ञ
लंबे समय से जारी है टेस्ट फॉर्म की तलाश
घरेलू सर्किट की इन दोनों पारियों में बाबर की नाकामी ने उनके अंतरराष्ट्रीय टेस्ट फॉर्म को लेकर चल रही बहसों को एक बार फिर हवा दे दी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो टेस्ट क्रिकेट में उनका बल्ला लंबे समय से खामोश रहा है। उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट में अपना आखिरी शतक दिसंबर 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के शुरुआती मुकाबले में लगाया था। उसके बाद से लेकर अब तक वे इस फॉर्मेट में एक भी बड़ी पारी खेलने में कामयाब नहीं हो पाए हैं।
इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज में भी उनका प्रदर्शन बेहद फीका रहा था, जहां वे शुरुआती चार पारियों में बमुश्किल 97 रन ही बना सके थे। लगातार मिल रही असफलताओं के कारण उनके चयन और उनकी मैच जिताऊ क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। घरेलू क्रिकेट में वापसी का उनका यह फैसला इसलिए भी अहम था क्योंकि वे अपनी पुरानी फॉर्म वापस पाना चाहते थे, लेकिन यहां भी असफलता हाथ लगने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
कप्तानी और चयन को लेकर सुलगते सवाल
बाबर आजम के करियर में हालिया दौर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। उन्हें हाल ही में एक बार फिर पाकिस्तान की टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई है। इससे पहले उनका पहला कप्तानी कार्यकाल 2020 से 2023 के बीच रहा था। मई महीने में शान मसूद की कप्तानी में बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू सीरीज में पाकिस्तान को 0-2 से करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद चयन समिति ने बड़ा बदलाव करते हुए बाबर को फिर से नेतृत्व सौंप दिया।
दूसरी ओर, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इंग्लैंड दौरे पर खराब प्रदर्शन के बाद कई बड़े फैसले लिए थे, जिनमें कुछ खिलाड़ियों को बीच दौरे से वापस बुलाना और कोचिंग स्टाफ में बदलाव करना शामिल था। इन तमाम प्रशासनिक उथल-पुथल के बीच बाबर का घरेलू क्रिकेट में उतरना यह दर्शाता है कि वे अपनी तकनीक और मानसिक मजबूती को फिर से तराशने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इन शुरुआती असफलताओं ने उनके रास्ते को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। आगामी श्रृंखलाओं में टीम की सफलता और उनकी अपनी साख बचाने के लिए उन्हें जल्द ही अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा।






