त्योहार की उमंग पर फिरा पानी, बिहार में कर्मा पूजा के दिन कई घरों के बुझ गए चिराग
पवित्र लोक पर्व कर्मा पूजा के उल्लास और उमंग के बीच बिहार के विभिन्न हिस्सों से बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबरें सामने आई हैं। पर्व के दौरान उत्साह में डूबे लोगों के लिए जश्न का यह दिन उस समय मातम में बदल गया जब जल स्रोतों में नहाने और विसर्जन के दौरान एक के बाद एक कई दर्दनाक हादसे हो गए। राजधानी पटना और नालंदा जिले में हुई इन अलग-अलग घटनाओं ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। त्योहार की खुशियां मनाने वाले परिवारों में इस त्रासद घटना के बाद चीख-पुकार मच गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन हादसों में अब तक कई लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। प्रशासनिक अमला और स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुटे रहे, लेकिन कई मामलों में लोगों की जिंदगी नहीं बचाई जा सकी। इस प्रकार की त्रासदियां हर साल त्योहारों के सीजन में सामने आती हैं, जो सुरक्षा मानकों और सावधानी बरतने की सख्त जरूरत की ओर इशारा करती हैं। ग्रामीण अंचलों में जल स्रोतों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण ऐसी दुर्घटनाएं अक्सर विकराल रूप ले लेती हैं।
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पटना जिले के विभिन्न घाटों पर पसरा मातम, नदी में डूबे मासूम और महिलाएं
राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों में कर्मा पूजा के दौरान पानी में डूबने की कई घटनाएं हुईं। बख्तियारपुर, बाढ़, अथमलगोला और मनेर जैसे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था धरी की धरी रह गई। बख्तियारपुर क्षेत्र में तीन नाबालिग बच्चे नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए और अपनी जान गंवा बैठे। इसी तरह बाढ़ इलाके में भी दो लोगों की मौत होने की सूचना मिली है। इन मासूमों और युवाओं की अचानक हुई मौत से उनके माता-पिता सदमे में हैं और उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनका हंसता-खेलता परिवार इस तरह उजड़ गया है।
मनेर और अथमलगोला में भी गंगा नदी के घाटों पर भयंकर दुर्घटनाएं हुईं। मनेर में एक महिला और दो बच्चियों के गंगा नदी में डूबने की दुखद खबर मिली। वहीं, अथमलगोला में सगे भाई-बहन नदी की तेज धाराओं और गहरे पानी की चपेट में आ गए। स्थानीय गोताखोरों और पुलिस बल की मदद से उनकी तलाश के प्रयास किए गए, लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया है। त्योहार के दिन घरों में पकने वाले पकवान और खुशियों की गूंज आंसुओं और चीखों में बदल गई।
नालंदा में भाई की लंबी उम्र की मन्नत मांग रही बहन की खुशियां उजड़ीं
राजधानी से सटे नालंदा जिले में भी कर्मा पूजा के दिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में डूबने की तीन बेहद मर्मस्पर्शी घटनाएं हुईं। इन हादसों में एक बच्ची, एक महिला और एक युवक की अकाल मौत हो गई। रहुई थाना क्षेत्र के बसानपुर और कुआरडीह गांव के बीच बहने वाली गोइठवा नदी में कर्मा पूजा के उपलक्ष्य में स्नान करने गई 42 वर्षीय राधा देवी और सात वर्षीय बच्ची नंदनी गहरे पानी की गहराई में समा गईं। दोनों को जब तक पानी से बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उनकी सांसें थम चुकी थीं।
दूसरी ओर, नगरनौसा थाना क्षेत्र के बलधा गांव में एक मार्मिक घटना घटी, जिसने पत्थर दिल को भी पिघला दिया। यहाँ कर्मा पूजा के लिए मूर्ति निर्माण हेतु तालाब से मिट्टी लाने गए 19 वर्षीय युवक दिलखुश कुमार का पैर फिसल गया और वह गहरे तालाब में जा गिरा। दिलखुश की बहन ने अपने भाई की लंबी उम्र और आरोग्यता के लिए ही कर्मा पूजा का व्रत रखा था। बहन की लंबी उम्र की दुआ मांगने वाले भाई की उसी पूजा के दौरान पानी में डूबने से मौत हो गई। इस अनहोनी ने पूरे गाँव को गमगीन कर दिया है।
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा के दावों की खुली पोल
हर साल त्योहारों के सीजन में इस तरह के हादसे सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों के सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल उठ खड़े होते हैं। नदियों, तालाबों और घाटों के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना और गोताखोरों की तैनाती न किए जाने से ऐसी अनहोनी को रोकने में असफलता मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के पास चेतावनी बोर्ड लगाने या बैरिकेडिंग करने की व्यवस्था अक्सर नदारद रहती है, जिसके कारण बच्चे और ग्रामीण अनजाने में गहरे पानी में उतर जाते हैं।
"त्योहार के पावन दिनों में इस तरह की दुर्घटनाएं बेहद दुखद और हृदयविदारक हैं। हमने सभी मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ली है और उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। लोगों से अपील है कि नदी या तालाबों में स्नान के दौरान विशेष सावधानी बरतें और बच्चों को गहरे पानी से दूर रखें।" — स्थानीय पुलिस प्रशासन
इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों के लिए सांत्वना के शब्द भी कम पड़ जाते हैं। प्रशासन द्वारा भले ही सहायता राशि या मुआवजे का आश्वासन दिया जाता हो, लेकिन अपनों को खोने का गम कभी कम नहीं हो सकता। समय आ गया है कि समाज और शासन दोनों मिलकर जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा के कड़े मानक तय करें ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस तरह का असहनीय दर्द न झेलना पड़े।
निष्कर्ष और सबक: उत्सव के दौरान सतर्कता है सबसे बड़ा बचाव
बिहार में कर्मा पूजा के दौरान हुए इन हादसों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। पर्व और त्यौहार हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा हैं, जिन्हें उल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए, लेकिन जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है। जल स्रोतों के पास बच्चों को अकेले न जाने देना और खुद भी गहरे पानी के खतरों के प्रति सचेत रहना ही इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचने का एकमात्र उपाय है। इन मौतों से सबक लेते हुए हर नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि खुशियों के पर्व कभी आंसुओं में न बदलें।



