बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज
बिहार की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी हलचल काफी तेज हो गई है। राज्य के भीतर विधान परिषद की महत्वपूर्ण सीटों पर द्विवार्षिक चुनावों का दौर शुरू हो चुका है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक कार्यक्रम के तहत, राज्य की आठ प्रमुख सीटों पर प्रतिनिधियों के चुनाव के लिए प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इन सीटों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं, जो राजनीतिक दलों के साथ-साथ शिक्षित वर्ग के बीच भी खासी प्रतिष्ठा का विषय माने जाते हैं।
मंगलवार से इन सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर आरंभ हो गई है। भावी उम्मीदवारों ने अपने दस्तावेजों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है ताकि तय समयसीमा के भीतर पर्चा दाखिल किया जा सके। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी खासी चर्चा है कि विभिन्न दल इस बार किन चेहरों पर दांव लगाने जा रहे हैं। एनडीए, राजद और जन सुराज जैसे राजनीतिक संगठनों की सक्रियता ने इस मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।
प्रशासनिक स्तर पर भी चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए कमर कस ली गई है। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार बैठकों का दौर चला रहे हैं ताकि किसी भी तरह की प्रशासनिक चूक की गुंजाइश न बचे। आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन कराने के लिए निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं, जिनका पालन कराने की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को सौंपी गई है।
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नामांकन से लेकर मतगणना तक का पूरा शेड्यूल तय
भारत निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित किए गए विस्तृत चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक, उम्मीदवार छह अक्टूबर तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। पटना प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में नामांकन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जहां सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके अगले दिन यानी सात अक्टूबर को सभी प्राप्त नामांकन पत्रों की तकनीकी जांच की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन से उम्मीदवार चुनावी मैदान में टिकने योग्य हैं।
प्रत्याशियों के पास अपना नाम वापस लेने के लिए नौ अक्टूबर तक का समय होगा। इसके बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि किस सीट पर सीधा मुकाबला है या त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बन रही है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रचार अभियान जोर पकड़ेगा, जिसमें नेता अपने-अपने समर्थकों के बीच जाकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करेंगे।
निर्धारित समय सारणी के अनुसार, सभी आठ निर्वाचन क्षेत्रों के लिए एक ही दिन यानी 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। वोटिंग का समय सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक तय किया गया है। मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद मतपेटियों को सुरक्षित स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा और ठीक चार दिन बाद यानी 27 अक्टूबर को मतगणना के जरिए विजयी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा।
पटना स्नातक और शिक्षक सीट पर प्रशासनिक तैयारियां पुख्ता
पटना स्नातक और पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की बात करें तो इसके दायरे में पटना के अलावा नालंदा और नवादा जिले भी आते हैं। इन तीनों जिलों के योग्य स्नातक और शिक्षक मतदाता अपने जनप्रतिनिधि का चुनाव करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी निर्वाची पदाधिकारी सह पटना प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार के कंधों पर है।
आयुक्त ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पटना, नालंदा और नवादा के जिलाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में चुनाव से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वायड और स्टैटिक सर्विलांस टीमों का गठन कर दिया गया है। ये टीमें लगातार क्षेत्र में गश्त करेंगी और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखेंगी। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठकें कर आयोग के दिशा-निर्देशों से उन्हें अवगत करा दिया गया है ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
इन आठ सीटों पर हो रहा है द्विवार्षिक चुनाव
इस बार जिन आठ सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, उनमें चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक सीटों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी क्षेत्र आते हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन सीटों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी निर्वाचन क्षेत्रों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के कारण यह द्विवार्षिक चुनाव कराया जा रहा है।
पारंपरिक राजनीति से अलग इन चुनावों का मिजाज थोड़ा अलग होता है, क्योंकि इसमें आम मतदाता के बजाय एक विशेष वर्ग—शिक्षक और स्नातक—अपने मत का प्रयोग करता है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव अपनी वैचारिक पकड़ और प्रभाव साबित करने का एक बड़ा मंच माना जाता है। पिछले कुछ समय से इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ नए राजनीतिक समीकरणों की एंट्री ने मुकाबले को कांटे का बना दिया है।
"सभी संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। आदर्श आचार संहिता का पालन कराने के लिए विशेष टीमें तैनात कर दी गई हैं।" — राजेश कुमार, प्रमंडलीय आयुक्त, पटना
राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक जोड़-तोड़ शुरू
नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही राजनीतिक दलों के भीतर टिकट बंटवारे और समर्थन को लेकर मंथन तेज हो गया है। एनडीए गठबंधन अपनी पुरानी जमीनी पकड़ को बनाए रखने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है, तो वहीं विपक्षी दल और नए सियासी दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस चुनाव में शिक्षकों और स्नातकों के अपने अलग स्थानीय मुद्दे हैं, जिन पर हर उम्मीदवार अपनी जीत का दावा कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनावों के परिणाम आगामी राजनीतिक हवा का रुख तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से लेकर मतदान के दिन तक हर दल अपनी पूरी ताकत झोंक देने की तैयारी में है। अब देखना यह होगा कि 27 अक्टूबर को जब नतीजे आएंगे, तो बाजी किसके हाथ लगती है और कौन सा दल विधान परिषद में अपनी ताकत बढ़ाने में कामयाब होता है।





