बिहार के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था का बदला स्वरूप
देशभर में अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए मशहूर बिहार के पर्यटन स्थलों पर अब सुरक्षा का दायरा पूरी तरह से बदल दिया गया है। हाल के दिनों में कुछ जिलों से सामने आए शर्मनाक वीडियो और असामाजिक तत्वों की हरकतों के बाद राज्य के पुलिस महकमे ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब पिकनिक स्पॉट, वाटरफॉल, पहाड़ी जंगलों और दूरदराज के रमणीय स्थलों पर घूमने आने वाले पर्यटकों, विशेषकर महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा भगवान भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि ऐसे स्थानों पर कानून का कड़ा पहरा होगा ताकि कोई भी सिरफिरा माहौल खराब करने की हिम्मत न जुटा सके।
यह पूरा बदलाव अचानक नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे हाल ही में घटी कुछ गंभीर घटनाएं हैं। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों से सनसनीखेज मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ाई बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी नाराजगी पैदा कर दी थी। इन हालात से निपटने के लिए अब पुलिस मुख्यालय ने पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इसे जमीन पर उतारने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन जिलों की घटनाओं ने खोली आंखें, मुख्यालय का सख्त फरमान
खुलासा हुआ है कि जमुई, समस्तीपुर और बांका जैसे जिलों में कुछ असामाजिक तत्वों ने कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए महिलाओं और लड़कियों के साथ अभद्रता की और उनके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इन वीडियो के इंटरनेट पर तैरने के बाद पुलिस प्रशासन की भारी किरकिरी हुई। मामले की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस मुख्यालय ने फौरन दखल दिया और सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को एक सख्त पत्र जारी किया।
मुख्यालय के निर्देश में साफ कहा गया है कि लापरवाही बरतने वाले स्थानीय अधिकारियों को भी बख्शा नहीं जाएगा। हर जिले के पुलिस कप्तान को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी संवेदनशील पर्यटन स्थलों की एक विशेष सूची तैयार करें। इस सूची में उन जगहों को प्राथमिकता दी जाए जहां वीकेंड पर या छुट्टियों के दौरान भारी भीड़ उमड़ती है और जहां मनचलों की सक्रियता की आशंका सबसे ज्यादा रहती है।
जंगलों और पहाड़ों पर अब पुलिस के बूटों की थाप
बिहार के कई पर्यटन स्थल ऐसे हैं जो घने जंगलों, घाटियों या पहाड़ी इलाकों में स्थित हैं। इन जगहों पर गाड़ियों का पहुंचना हर जगह मुमकिन नहीं होता, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व छिप जाते हैं और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इस समस्या का तोड़ निकालते हुए पुलिस ने अनूठी रणनीति बनाई है। अब ऐसे दुर्गम और जंगली पर्यटन स्थलों पर विशेष पुलिस बलों की टुकड़ियां तैनात की जाएंगी जो पैदल गश्त करेंगी।
यह पैदल गश्त टीम सुबह सूरज निकलने से लेकर देर शाम तक उन रास्तों और कोनों में घूमेगी जहां पर्यटकों का आना-जाना होता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुलिस की दृश्यता यानी 'विजिबिलिटी' को बढ़ाना है। जब पर्यटक वर्दीधारी पुलिसकर्मियों को अपने आसपास देखेंगे तो उनके भीतर सुरक्षा का भाव पैदा होगा और मनचले या अपराधी किसी भी प्रकार की हरकत करने से पहले सौ बार सोचेंगे।
साइबर सेल की रडार पर होंगे सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म
आज के दौर में अपराध का तरीका भी बदल चुका है और अपराधी वारदातों को अंजाम देकर उन्हें सोशल मीडिया पर शोऑफ करने से बाज नहीं आते। जमुई और अन्य जगहों की घटनाओं में भी यही देखने को मिला था जहां वीडियो बनाकर प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किए गए थे। इस डिजिटल चुनौती से निपटने के लिए पुलिस मुख्यालय ने हर जिले के साइबर सेल और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है।
साइबर टीमें अब लगातार इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य मैसेजिंग ऐप्स पर नजर बनाए रखेंगी। यदि किसी भी पर्यटन स्थल से जुड़ा कोई आपत्तिजनक, छेड़खानी का या भड़काऊ वीडियो सामने आता है, तो उसकी सत्यता की तुरंत जांच की जाएगी। वीडियो अपलोड करने वाले और उसमें दिख रहे आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ बहुत कम समय में कानूनी शिकंजा कसा जाएगा ताकि दूसरों के लिए एक कड़ा संदेश जा सके।
स्थानीय थानों की जवाबदेही तय, असामाजिक तत्वों पर कसेगा शिकंजा
इस पूरी व्यवस्था को सफल बनाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्थानीय थाना प्रभारियों यानी एसएचओ पर डाली गई है। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि सभी थानेदार अपने इलाके के इतिहास को खंगालें और उन पुराने अपराधियों या बिगड़े हुए युवाओं की सूची तैयार करें जो अक्सर ऐसी जगहों पर उत्पात मचाते हैं। ऐसे लोगों पर गुंडा एक्ट या अन्य सख्त धाराओं के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की जाएगी।
"पर्यटन स्थलों पर आने वाले हर एक नागरिक, विशेषकर हमारी माताओं और बहनों की सुरक्षा सरकार और पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी हुड़दंगी या मनचले को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब हर कोने पर मुस्तैद दिखेगी।" — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस मुख्यालय, पटना
इसके साथ ही, शिक्षण संस्थानों के आसपास और पिकनिक स्पॉट जाने वाले रास्तों पर भी गुप्तचर तंत्र को मजबूत किया गया है। सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा ताकि वे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख सकें और किसी भी अनहोनी से पहले उसे रोक सकें। सरकार और पुलिस के इस सख्त रुख से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पर्यटन स्थलों पर घूमने जाने वाले लोग खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकेंगे।







