राज्यसभा चुनाव और उपचुनाव के लिए बीजेपी की नई सूची जारी
भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बार फिर से राज्यसभा चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उच्च सदन के लिए अपने दो नए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय इकाई द्वारा जारी की गई इस नई सूची के मुताबिक, पश्चिम बंगाल से होने वाले महत्वपूर्ण उपचुनाव और उत्तराखंड के द्विवार्षिक चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लग चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के जरिए संसद के ऊपरी सदन में समीकरणों को और अधिक मजबूत करने की तैयारी चल रही है।
घोषणा के अनुसार, पश्चिम बंगाल की एक रिक्त सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए रुक्मिणी मल्लिक, जिन्हें देश भर में कोयल मल्लिक के नाम से भी जाना जाता है, को चुनावी मैदान में उतारा गया है। वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड की महत्वपूर्ण सीट के लिए पार्टी ने अनुभवी नेता दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इन दोनों ही चेहरों के सामने आने के बाद से राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और दोनों राज्यों की स्थानीय राजनीति में इसका असर साफ तौर पर देखा जा रहा है।
संबंधित खबरें
पश्चिम बंगाल की राजनीति में फेरबदल और कोयल मल्लिक की उम्मीदवारी
पश्चिम बंगाल की राजनीति पिछले कुछ समय से खासी उथल-पुथल से गुजर रही है। राज्य की एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव होना अनिवार्य हो गया था, क्योंकि रुक्मिणी मल्लिक यानी कोयल मल्लिक ने इसी साल 16 जुलाई को उच्च सदन की सदस्यता से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनका मूल कार्यकाल अप्रैल 2032 तक निर्धारित था, लेकिन उनके इस्तीफे से यह सीट खाली हो गई थी। उनके इस कदम को राजनीतिक गलियारों में बड़े उलटफेर के रूप में देखा गया था, क्योंकि वह पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का हिस्सा हुआ करती थीं।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष के स्वर उठने लगे थे। पार्टी के कई कद्दावर नेताओं और सांसदों ने पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया था। कोयल मल्लिक के अलावा सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक जैसे दिग्गजों ने भी उच्च सदन से इस्तीफा देकर भगवा खेमे का रुख किया था। अब बीजेपी ने कोयल मल्लिक को ही उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा दांव खेला है, जिससे राज्य की राजनीति में टीएमसी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
उत्तराखंड से दिनेश आर्य को मिला टिकट, पार्टी के पास मजबूत बहुमत
उत्तराखंड के मोर्चे पर बात करें तो यहां चुनावी गणित बीजेपी के पूरी तरह पक्ष में नजर आ रहा है। राज्य से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे नरेश बंसल का कार्यकाल इस साल के अंत तक समाप्त होने वाला है, जिसके चलते यहां द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा की गई है। उत्तराखंड विधानसभा में बीजेपी के पास प्रचंड बहुमत है, जिसके कारण पार्टी के लिए इस सीट को अपने पाले में बनाए रखना बेहद आसान माना जा रहा है।
पार्टी नेतृत्व ने इस सीट के लिए दिनेश आर्य को उम्मीदवार चुना है। सांगठनिक स्तर पर लंबे समय से सक्रिय रहे दिनेश आर्य को टिकट मिलने से कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि उत्तराखंड में विपक्ष की कमजोर स्थिति और सदन में बीजेपी की मजबूत संख्या बल के कारण इस सीट पर जीत को लेकर पार्टी पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यहां मुकाबला एकतरफा ही रहने के आसार हैं।
राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल और मतदान प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 राज्यसभा सीटों पर चुनाव संपन्न कराए जाने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की 1 सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव होना है, जहां मौजूदा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। वहीं, पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। इन सभी सीटों के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
मतदान की प्रक्रिया निर्धारित समयानुसार सुबह शुरू होगी और शाम तक चलेगी। चुनाव आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों के तहत उसी दिन मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती भी शुरू कर दी जाएगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया को समय सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से पूरा कर लिया जाए, ताकि उच्च सदन में प्रतिनिधित्व का कोई भी पद लंबे समय तक रिक्त न रहे।
संसद में बदल रहे समीकरण और आगामी राजनीतिक प्रभाव
राज्यसभा के इन चुनावों और उपचुनावों का असर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों तक महसूस किया जा रहा है। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी अपनी मौजूदा सीटों को सुरक्षित रखने की कवायद में जुटी है, वहीं पश्चिम बंगाल में पार्टी अपनी पहुंच और प्रभाव को लगातार विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रही है। टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं को दोबारा उच्च सदन में भेजने की रणनीति से पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह अपने साथ आने वाले हर नेता और कार्यकर्ता के राजनीतिक भविष्य के प्रति पूरी तरह गंभीर है।
आगामी 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान के नतीजे यह तय करेंगे कि संसद के ऊपरी सदन में किस दल को कितनी मजबूती मिलती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन चुनावों के परिणाम देश के बड़े राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी छाप छोड़ेंगे। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों की ओर से चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने का दौर भी तेजी से चल रहा है।
"पार्टी हमेशा से योग्य और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देती रही है। हमें पूरा विश्वास है कि हमारे सभी उम्मीदवार उच्च सदन में जनता की आवाज को पूरी मजबूती से उठाएंगे।" — प्रदेश नेतृत्व, भारतीय जनता पार्टी




