फ्रांस के बाद अब दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील में भी युवा पीढ़ी यानी जेन जी (Gen Z) का भारी गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। देश की राजधानी में हजारों की संख्या में छात्र और युवा दक्षिणपंथी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उतरे। प्रदर्शनकारियों का यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब देश की राजनीति में दक्षिणपंथ का पलड़ा भारी होता दिख रहा है।
'नो टू फादर, नो टू सन' के नारों के साथ सड़कों पर उतरे युवा
विरोध प्रदर्शन के दौरान युवाओं के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, 'बोल्सोनारो कभी नहीं' और 'नो टू फादर, नो टू सन'। कुछ बैनरों पर ता तानाशाही के विरोध में भी संदेश लिखे गए थे। प्रदर्शन में शामिल हुए 19 वर्षीय इमैनुएल अराउजो ने कहा कि देश में दक्षिणपंथ और बोल्सोनारोवाद का बढ़ना बेहद चिंताजनक है। वहीं, 25 वर्षीय एलिस कार्नेइरो ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वे एक ऐसी सरकार के आने से डरती हैं जो अल्पसंख्यकों और उनके अधिकारों के लिए खतरा बन सकती है।
Protestos em várias cidades do país marcam o cenário político atual. #Brasil #GenZ
— Social Media Updates (@UpdatesSocial) April 2024
राजनीतिक समीकरण और आगे की राह
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दक्षिणपंथी सीनेटर और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में सबसे ज्यादा वोट हासिल किए। जायर बोल्सोनारो पहले से ही भ्रष्टाचार के मामलों और राजनीतिक विवादों के चलते चर्चा में रहे हैं। चुनाव के पहले दौर में बोल्सोनारो को 47 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और मौजूदा वामपंथी राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा को 45 प्रतिशत वोट हासिल हुए।
चूंकि जीत के लिए 50 प्रतिशत मतों की अनिवार्यता है, इसलिए अब मुकाबला और कड़ा हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे न सिर्फ ब्राजील बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका की राजनीतिक दिशा तय करेंगे। फिलहाल, वैचारिक संघर्ष के इस माहौल में देश की युवा पीढ़ी लोकतंत्र और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए मुखर होकर सामने आ रही है।
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