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सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ा फर्जीवाड़ा: प्रति यूनिट एक किलो राशन काटने का वीडियो वायरल, मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के एक ग्रामीण इलाके में कोटेदार द्वारा गरीबों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। राशन डीलर पर प्रति यूनिट एक किलो खाद्यान्न कम देने और कालाबाजारी का आरोप लगा है, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ा फर्जीवाड़ा: प्रति यूनिट एक किलो राशन काटने का वीडियो वायरल, मचा हड़कंप
📷 सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ा फर्जीवाड़ा: प्रति यूनिट एक किलो राशन काटने का वीडियो वायरल, मचा हड़कंप — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • राशन डीलर द्वारा प्रति यूनिट एक किलो खाद्यान्न कम देने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
  • ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि डीलर अधिकारियों को रिश्वत देने की बात कहकर कम राशन बांटता है।
  • शिकायत मिलने पर जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) ने पूर्ति निरीक्षक को मामले की जांच सौंप दी है।

गरीबों के निवाले पर कोटेदार की नजर, वायरल वीडियो ने खोली पोल

देशभर में गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त या कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली चलाई जाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के हर अंतिम व्यक्ति तक पेट भरने के लिए पर्याप्त खाद्यान्न पहुंचाना है। लेकिन, कई बार जमीनी स्तर पर बैठे कुछ भ्रष्ट लोग सरकारी योजनाओं के मंतव्य पर पानी फेरने का काम करते हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला उत्तर प्रदेश के एक जिले से सामने आया है, जहां राशन कोटेदार द्वारा गरीबों के कोटे का अनाज हड़पने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है।

मामला सामने आने के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग में हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कोटे की दुकान पर कथित तौर पर अनियमितताएं बरते जाने और उपभोक्ताओं को कम राशन दिए जाने के सुबूत नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके के उपभोक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है और वे डीलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

वायरल वीडियो में कैद हुई राशन की कालाबाजारी और धांधली

सामने आए वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह से कोटेदार कथित तौर पर तय मात्रा से कम अनाज उपभोक्ताओं को थमा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वे इसका विरोध करते हैं या पूरा राशन मांगते हैं, तो कोटेदार उनसे अभद्रता पर उतर आता है। वीडियो में दुकान के भीतर से सरकारी खाद्यान्न को बोरियों से निकालकर प्राइवेट कट्टों में भरने और बाहर खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लोड किए जाने का दृश्य भी कैद हुआ है।

ग्रामीणों का यह भी गंभीर आरोप है कि कोटेदार धड़ल्ले से राशन की कालाबाजारी कर रहा है। लोगों का कहना है कि अंगूठा पूरी मात्रा के लिए लगवा लिया जाता है, लेकिन जब तौल की बारी आती है, तो प्रति यूनिट एक किलो अनाज की सीधी कटौती कर ली जाती है। पूछने पर कोटेदार द्वारा कथित तौर पर अधिकारियों को ऊपर तक रिश्वत देने की बात कही जाती है, जिससे उसका दुस्साहस और अधिक बढ़ जाता है।

एसडीएम के दरबार पहुंची शिकायत, पीड़ितों ने लगाई गुहार

इस पूरी धांधली से तंग आकर इलाके के पीड़ित उपभोक्ताओं ने चुप बैठने के बजाय कानूनी रास्ता चुना। अनीता देवी समेत कई अन्य ग्रामीण उपभोक्ताओं ने एकजुट होकर स्थानीय तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) के कार्यालय का रुख किया। उन्होंने एसडीएम के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई और वायरल वीडियो के साक्ष्य भी पेश किए।

पीड़ितों ने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि किस प्रकार उनके हक का अनाज छीना जा रहा है और विरोध करने पर उन्हें कोटे की दुकान से भगा दिया जाता है। उपभोक्ताओं ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जाए और दोषी डीलर का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए ताकि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति गरीबों के निवाले के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके।

जिला प्रशासन का सख्त रुख, डीएसओ ने दिए जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) ने इस पूरे मामले पर गंभीर संज्ञान लिया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर पात्र व्यक्ति को निर्धारित पांच किलो प्रति यूनिट के हिसाब से पूरा खाद्यान्न मिलना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

"सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पांच किलो प्रति यूनिट खाद्यान्न वितरण का स्पष्ट प्रावधान है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे कम राशन प्राप्त करके पंजिका पर पूरे राशन के हस्ताक्षर न करें। मामले की जांच पूर्ति निरीक्षक द्वारा की जा रही है, और जांच रिपोर्ट आते ही सख्त अग्रिम विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।" — अभय सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी (DSO)

जांच रिपोर्ट के बाद होगी कोटेदार पर बड़ी कार्रवाई

फिलहाल, जिला पूर्ति विभाग के निर्देश पर पूर्ति निरीक्षक की एक टीम इस पूरे मामले की अंदरूनी और तकनीकी जांच में जुटी हुई है। टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो में दिख रही सामग्री और कालाबाजारी के आरोप कितने सही हैं। इसके साथ ही, पिछले कुछ महीनों में उस कोटे की दुकान से हुए खाद्यान्न के उठान और वितरण के रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच की जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोटेदार दोषी पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तो रद्द किया ही जाएगा, साथ ही कालाबाजारी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। इस घटना ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि ग्रामीण इलाकों में जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत किए जाने की कितनी आवश्यकता है ताकि आम जनता के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

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