निकोटीन पाउच की अवैध बिक्री पर केंद्र सरकार का शिकंजा
देश के युवाओं के बीच हाल के दिनों में एक खतरनाक चलन तेजी से पैर पसार रहा है, जिसे 'निकोटीन पाउच' के नाम से जाना जाता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, रील्स और कॉलेज परिसरों के आसपास स्थित कैफे में इन उत्पादों का जिस तरह से प्रचार किया जा रहा है, उसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की नींद उड़ा दी है। इन हालातों को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं।
सरकार की ओर से भेजे गए इन निर्देशों में साफ कहा गया है कि बिना किसी विधिवत मंजूरी के ऑनलाइन या ऑफलाइन दुकानों पर निकोटीन पाउच बेचने वालों के खिलाफ फौरन कानूनी शिकंजा कसा जाए। देश के ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ये उत्पाद आम जनता की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ हैं और इनसे युवाओं में नशे की लत बहुत तेजी से घर कर रही है।
खुले बाजार में धड़ल्ले से बिकने वाले इन उत्पादों पर लगाम लगाने के लिए अब स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी सक्रिय कर दिया गया है। केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अवैध रूप से बेचे जा रहे इन तमाम पैकेट्स को तत्काल प्रभाव से जब्त किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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क्या होते हैं निकोटीन पाउच और कैसे करते हैं काम?
आम बोलचाल में इन उत्पादों को 'स्मार्ट और सेफ लाइफस्टाइल प्रोडक्ट' के रूप में विज्ञापित किया जाता है। ये छोटे-छोटे पाउच पुदीना, खट्टे फल और बेरी जैसे आकर्षक फ्लेवर में उपलब्ध होते हैं। इन्हें इस्तेमाल करने का तरीका भी बेहद आसान बताया जाता है, जिसके तहत उपयोगकर्ता इन्हें अपने होठों और मसूड़ों के बीच दबा लेते हैं।
जैसे ही ये पाउच मुंह के अंदर रखे जाते हैं, इनमें मौजूद उच्च मात्रा का निकोटीन सीधे मसूड़ों के रास्ते खून में घुल जाता है। चूंकि इसमें सिगरेट की तरह किसी तरह का धुआं नहीं निकलता और न ही किसी को बदबू आती है, इसलिए आधुनिक जीवनशैली अपनाने वाले युवा इसे आसानी से अपनी जेब में रखते हैं और सार्वजनिक जगहों पर भी इसका सेवन करते रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट या तंबाकू के धुएं से बचने का यह तरीका भले ही लोगों को आधुनिक और सुरक्षित लगे, लेकिन असलियत में यह शरीर के भीतर बहुत ही खतरनाक तरीके से निकोटीन की भारी मात्रा पहुंचा रहा है, जो अंदर ही अंदर तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
बच्चों और कम उम्र के युवाओं के लिए बढ़ता गंभीर खतरा
इस पूरी स्थिति में सबसे डराने वाली बात यह है कि ये रंग-बिरंगे और फ्लेवर्ड पाउच बहुत आसानी से बच्चों और किशोरों तक पहुंच रहे हैं। स्कूल और कॉलेज के छात्र पॉकेटमनी के पैसों से इन्हें आसानी से खरीद लेते हैं, जिसके चलते कम उम्र में ही वे निकोटीन की गंभीर लत का शिकार हो रहे हैं।
"निकोटीन पाउच बच्चों और युवाओं के लिए अत्यधिक हानिकारक हैं और इन्हें बहुत कम उम्र में ही गहरी लत का शिकार बना रहे हैं। इस पर तुरंत रोक लगाना बेहद जरूरी है ताकि देश की युवा पीढ़ी को इस जहरीले जाल से बचाया जा सके।" — स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सलाहकार बोर्ड
स्वास्थ्य संगठनों ने चेताया है कि जिस तरह से तंबाकू कंपनियों ने नए पैंतरे बदलकर इन उत्पादों को बाजार में उतारा है, वह बेहद चिंताजनक है। यदि समय रहते इस पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। सलाहकार बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सिफारिश की है कि ऐसे किसी भी नए निकोटीन उत्पाद को खुले बाजार में बेचने की अनुमति कदापि नहीं दी जानी चाहिए जो युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले सके।
निकोटीन गम और निकोटीन पाउच में क्या है बड़ा फर्क?
आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि जब सिगरेट या तंबाकू छुड़ाने के लिए 'निकोटीन गम' के इस्तेमाल की अनुमति है, तो फिर इन 'निकोटीन पाउच' पर इतनी पाबंदी क्यों लगाई जा रही है? इस अंतर को समझना बहुत जरूरी है ताकि भ्रम की स्थिति पूरी तरह दूर हो सके।
चिकित्सकीय रूप से मंजूर निकोटीन गम शरीर को निकोटीन की एक तय, नियंत्रित और सुरक्षित खुराक प्रदान करते हैं। इनका मकसद धीरे-धीरे व्यक्ति को सिगरेट या तंबाकू की लत से बाहर निकालना होता है। दुनिया की प्रतिष्ठित दवा नियामक संस्थाओं, जैसे कि अमेरिकी एफडीए (FDA) ने इनकी सुरक्षा और प्रभावशीलता की पूरी जांच करने के बाद इन्हें एक वैध चिकित्सा उपचार के रूप में मान्यता दी है। यदि इन्हें डॉक्टर या प्रशिक्षित काउंसलर की देखरेख में लिया जाए, तो सिगरेट छोड़ने की सफलता दर कई गुना बढ़ जाती है।
इसके ठीक विपरीत, इन निकोटीन पाउच का सिगरेट छुड़ाने से दूर-दूर तक कोई वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है। इस बात का कोई पुख्ता मेडिकल प्रमाण नहीं है कि ये पाउच किसी की लत छुड़ाने में मददगार हैं। यही कारण है कि किसी भी प्रमुख स्वास्थ्य नियामक ने इन्हें इलाज के तौर पर कोई मंजूरी नहीं दी है, और बिना मंजूरी इनकी बिक्री पूरी तरह से अवैध है।
कानून का शिकंजा और अदालत के कड़े रुख
भारत में इन उत्पादों के नियमन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट और देश के अन्य न्यायालयों ने भी समय-समय पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालती फैसलों और देश के मौजूदा दवा कानूनों ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि किसी उत्पाद के 'स्मोक-फ्री' या धुआं-रहित होने भर से उसे देश के कानूनों से कोई छूट नहीं मिल जाती।
चाहे वह हवाई अड्डों के इंटरनेशनल डिपार्चर एरिया में बनी ड्यूटी-फ्री दुकानें हों या फिर शहर के पॉश इलाकों के स्टोर्स, देश की सीमा के भीतर बिकने वाला हर उत्पाद यहां के नियमों के दायरे में आता है। अब केंद्र सरकार के इन नए निर्देशों के बाद उम्मीद की जा रही है कि राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग मिलकर इन अवैध निकोटीन उत्पादों के खिलाफ और अधिक आक्रामक तरीके से कार्रवाई करेंगे, जिससे युवाओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाले कारोबारियों पर लगाम कस सके।







