सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम
देश में राशन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आम नागरिकों के लिए एक बेहद उपयोगी डिजिटल सुविधा शुरू की गई है, जिससे अब कोटे के अनाज में होने वाली गड़बड़ियों पर नकेल कसना आसान हो जाएगा। आमतौर पर राशन दुकानों से मिलने वाले अनाज को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आती थीं, जैसे तौल में गड़बड़ी करना या फिर कार्ड पर पूरा राशन चढ़ाने के बावजूद कम अनाज देना। इन सभी समस्याओं का समाधान अब उपभोक्ताओं के हाथ में ही आ गया है।
अब किसी भी उपभोक्ता को राशन की दुकान पर जाने से पहले यह अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि इस महीने उसके हिस्से में कितना अनाज आएगा। सरकार द्वारा संचालित विशेष आहार पोर्टल पर जाकर कोई भी नागरिक अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर के जरिए चंद सेकंड में पूरी जानकारी हासिल कर सकता है। इस डिजिटल पहल से बिचौलियों और मनमाने तरीके से राशन बांटने वाले दुकानदारों की मनमानी पर लगाम लगेगी, क्योंकि अब हर एक यूनिट का हिसाब डिजिटल रूप से दर्ज होगा।
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पोर्टल पर कैसे चेक करें अपने राशन कार्ड का पूरा रिकॉर्ड
इस ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठाना बेहद आसान है और इसके लिए किसी तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत नहीं है। उपभोक्ताओं को केवल संबंधित आहार पोर्टल पर जाना होगा, जहां राशन कार्ड धारकों के लिए एक समर्पित विकल्प दिया गया है। इस विकल्प का चयन करने के बाद उपभोक्ता को अपना यूनिक राशन कार्ड नंबर, वह माह और वर्ष चुनना होगा जिसका विवरण वह देखना चाहता है। इसके बाद स्क्रीन पर एक छोटा सा सुरक्षा कोड यानी कैप्चा भरना होता है।
जैसे ही ये सभी विवरण भरकर सबमिट किए जाते हैं, उस विशेष महीने में कार्ड पर हुए राशन वितरण का पूरा कच्चा-चिट्ठा मोबाइल स्क्रीन पर आ जाता है। इसमें यह साफ-साफ दर्ज होता है कि किस तारीख को, कितना क्विंटल या किलो अनाज किस डीलर के माध्यम से वितरित किया गया है। यदि किसी महीने में अनाज का वितरण अभी तक नहीं हुआ है, तो उसकी स्थिति भी शून्य या लंबित के रूप में प्रदर्शित हो जाएगी, जिससे उपभोक्ता पूरी तरह आश्वस्त रह सकेंगे।
अनाज के मिलान से पकड़ी जाएगी कोटे की हेराफेरी
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता अब तीन स्तरों पर अपने राशन का सीधा मिलान कर सकते हैं। पहला यह कि उनके कार्ड पर नियमानुसार कितना अनाज देय है, दूसरा यह कि पोर्टल पर डिजिटल रूप से कितना वितरण दर्ज किया गया है, और तीसरा यह कि उन्हें वास्तविकता में दुकान से कितना अनाज हाथ में मिला है। इन तीनों आंकड़ों का मिलान करते ही हेराफेरी की परतें अपने आप उधड़ने लगती हैं।
अक्सर ऐसी शिकायतें मिलती थीं कि डीलर कार्ड पर अधिक मात्रा दर्ज कर देते हैं लेकिन उपभोक्ताओं को कम सामान थमा देते हैं। अब यदि पोर्टल पर 35 किलो अनाज का वितरण चढ़ा हुआ है और उपभोक्ता को वास्तव में केवल 30 किलो ही अनाज मिला है, तो यह डिजिटल रिकॉर्ड एक ठोस सबूत बन जाता है। इसी तरह, बिना राशन दिए ही पोर्टल पर वितरण दिखा दिए जाने जैसी फर्जीवाड़े की वारगुजारियों को भी इस तकनीक के माध्यम से आसानी से पकड़ा जा सकता है।
"लाभुकों की सुविधा और जानकारी के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई है। इससे पारदर्शिता आएगी। लाभुक अपने राशन का पूरा विवरण ले सकते हैं। डीलर और आवंटन आदि की जानकारी भी पोर्टल पर मिल सकती है।" — भीम उरांव, आपूर्ति पदाधिकारी
राशन डीलर की जानकारी और आवंटन की पूरी डिटेल
इस पोर्टल की खूबी केवल वितरण देखने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए उपभोक्ता अपने इलाके के अधिकृत राशन डीलर के बारे में भी पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। डीलर की जानकारी वाले विकल्प में जाकर दुकान का सटीक नाम, उसका पूरा पता और संबंधित महीने में उस दुकान को सरकार की तरफ से कुल कितना खाद्यान्न आवंटन प्राप्त हुआ है, यह सब कुछ सार्वजनिक रूप से देखा जा सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि डीलर के पास कुल कितने कार्ड जुड़े हुए हैं।
जब आम जनता के पास इस प्रकार की पुख्ता और पारदर्शी जानकारी होगी, तो कोई भी डीलर मनमानी करने से बचेगा। यदि किसी डीलर के रवैये में कोई गड़बड़ी पाई जाती है या वह तय नियमों के खिलाफ काम करता है, तो उपभोक्ता के पास मौजूद यही ऑनलाइन विवरण आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का सबसे मजबूत आधार बनेगा। जिला स्तर पर मिलने वाली मासिक रिपोर्ट और इस पोर्टल के आंकड़े मिलकर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बना रहे हैं।
शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया हुई आसान
डिजिटल रिकॉर्डिंग का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह पड़ा है कि अब शिकायतों का निवारण बहुत तेजी से हो सकेगा। पहले उपभोक्ताओं के पास अपनी बात साबित करने के लिए कोई ठोस लिखित या डिजिटल प्रमाण नहीं होता था, जिसके कारण भ्रष्ट डीलरों के खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता था। लेकिन अब पोर्टल का स्क्रीनशॉट या उसका प्रिंटआउट निकालकर सीधे संबंधित जिला आपूर्ति कार्यालय या खाद्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की तकनीक आधारित प्रणालियों से भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगता है। जैसे-जैसे देश के आम नागरिक डिजिटल रूप से जागरूक हो रहे हैं, वैसे-वैसे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी कटौती के पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया अभियान को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मजबूत धरातल प्रदान कर रहा है, जिससे आम आदमी का शासन प्रणाली पर भरोसा और अधिक बढ़ रहा है।



