देश की सियासत में इन दिनों चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर जबरदस्त उबाल देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और लगातार इस्तीफे की मांग की जा रही है। इसी बीच, केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने इस पूरे विवाद पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए विपक्ष पर करारा हमला बोला है। उनका कहना है कि विपक्षी खेमा लगातार संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, जो देश के लोकतंत्र के लिए कतई ठीक नहीं है।
मंगलवार को मीडिया के सामने आए चिराग पासवान ने दो टूक शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक अखाड़ा बनाया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि यदि विपक्ष को चुनाव प्रक्रिया पर ही आपत्ति है, तो उन्हें उन राज्यों के परिणामों पर भी सवाल खड़े करने चाहिए जहां चुनाव में उन्हें जीत हासिल होती है। इस तरह का चयनात्मक रवैया जनता को भ्रमित करने का एक राजनीतिक एजेंडा मात्र है।
विपक्ष के दावों पर चिराग पासवान का कड़ा प्रहार
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में जनता ने अपना स्पष्ट जनादेश दिया है। उन्होंने विशेष रूप से बंगाल और बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के मतदाताओं ने पूरी पारदर्शिता के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। ऐसे में जब नतीजे विपक्ष के हक में आते हैं, तब वे पूरी व्यवस्था को सही ठहराते हैं, लेकिन जहां हार मिलती है, वहां निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए जाते हैं।
चिराग पासवान ने जोर देकर कहा कि यह दोहरी नीति अब देश की जनता भली-भांति समझ चुकी है। संवैधानिक पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों और संस्थाओं के खिलाफ इस प्रकार का निरंतर दुष्प्रचार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है। उन्होंने इससे पहले भी स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त निकाय है और ऐसे में आयोग को भी अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए मजबूती से अपनी बात रखनी चाहिए, ताकि फैलाए जा रहे भ्रम का पर्दाफाश हो सके।
"विपक्ष इस तरीके से निरंतरता में एसआईआर को लेकर और चुनाव आयोग को लेकर जो भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है, मुझे लगता है कई राज्यों ने इनके इस भ्रम का जवाब देने का काम किया है। बंगाल के चुनाव हों या हमारे यहां बिहार के चुनाव हों, अगर आप इस पर सवाल उठाते हैं तो फिर उन परिणामों पर भी सवाल उठाइए जहां आपके पक्ष में नतीजे आते हैं। यह सेलेक्टिव क्रिटिसिजम उचित नहीं है।" — चिराग पासवान, केंद्रीय मंत्री
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कांग्रेस कार्य समिति की बैठक और राजनीतिक रणनीति
एक तरफ जहां सत्ता पक्ष के नेता विपक्ष के बयानों की कड़ी निंदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इस मुद्दे पर अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं। हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों और एसआईआर की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। पार्टी नेताओं ने आने वाले दिनों में सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को और तेज करने का खाका तैयार किया है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम कर रहा है और चुनावी सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। इसी कड़ी में मुंबई और दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों द्वारा प्रदर्शन करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इन प्रदर्शनों के लिए आधिकारिक अनुमति प्रदान नहीं की है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी तनाव की स्थिति बनी हुई है।
संवैधानिक संस्थाओं पर वार-पलटवार का दौर
चुनाव आयोग को लेकर मचे इस सियासी घमासान में भाजपा ने भी कड़ा ऐतराज जताया है। वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस पार्टी की हालिया बैठकों और रणनीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दल आदतन देश की हर उस संवैधानिक संस्था के खिलाफ साजिश रचते हैं जो उनके राजनीतिक हितों के अनुकूल काम नहीं करती है। कभी सुप्रीम कोर्ट तो कभी चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करना इनकी पुरानी कार्यशैली बन चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों ही तरफ से राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है। एक तरफ जहां विपक्षी दल जनता के बीच जाकर इस मुद्दे को बड़ा आंदोलन बनाने की जुगत में हैं, वहीं एनडीए के घटक दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता के पक्ष में खुलकर खड़े हो गए हैं और विपक्ष के हर हमले का कड़ा जवाब दे रहे हैं।
प्रदर्शनों की तैयारी और प्रशासनिक सख्ती
राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी सहित कई सिविल सोसाइटी संगठन और छात्र संगठन 2 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। मुंबई के आजाद मैदान से लेकर दिल्ली के संसद मार्ग और जंतर-मंतर तक आवाज बुलंद करने की योजना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करते हुए साफ कर दिया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति के भीड़ जुटने नहीं दी जाएगी।
सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग कड़ी कर दी है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रशासन के कड़े रुख के बीच विपक्षी दल और आंदोलनकारी अपने अभियानों को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं और यह राजनीतिक गतिरोध किस मोड़ पर जाकर थमता है।







