दिल्ली से जुड़े कानपुर के तार: नकली रेबीज वैक्सीन का बड़ा खुलासा
राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े थोक दवा बाजार चांदनी चौक स्थित भागीरथ पैलेस में पकड़े गए नकली रेबीज इंजेक्शन के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस सनसनीखेज मामले के तार उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर से जुड़ते नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्य और प्रशासनिक महकमे में इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है, क्योंकि रेबीज जैसी जीवनरक्षक वैक्सीन का नकली बाजार में बिकना सीधे तौर पर आम जनता की जान से खिलवाड़ है।
ड्रग विभाग को अपनी शुरुआती जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर यह जानकारी मिली थी कि इस अवैध कारोबार की जड़ें दिल्ली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके सप्लायर उत्तर प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी फैले हुए हैं। इसी कड़ी में जब कानपुर की स्थानीय एजेंसियों पर शिकंजा कसा गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए त्वरित एक्शन प्लान तैयार किया और औचक निरीक्षण की कार्रवाई शुरू कर दी।
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छापेमारी में मिली 592 नकली वैक्सीन, बैच नंबर ने खोली पोल
कानपुर के स्थानीय ड्रग विभाग की टीम ने शहर की प्रमुख मेडिकल एजेंसियों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान कानपुर की दो जानी-मानी फर्मों 'न्यू आरजे' और 'एलेक्सर क्योर' जांच के दायरे में आईं। अधिकारियों के मुताबिक, जब 'न्यू आरजे' के गोदाम की तलाशी ली गई, तो वहां से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां बरामद हुईं।
जांच के दौरान यह बात पुख्ता हो गई कि बरामद की गई 592 रेबीज वैक्सीन पूरी तरह से नकली थीं। इन वैक्सीनों के डिब्बों पर छपे बैच नंबर और सैंपल कोड हूबहू उस खेप से मिल खाते थे, जिसे कुछ दिन पहले दिल्ली के भागीरथ पैलेस बाजार में पकड़ा गया था। इस तकनीकी सबूत ने कानपुर के इन दवा व्यापारियों की संलिप्तता को पूरी तरह से उजागर कर दिया।
कलेक्टरगंज थाने में एफआईआर दर्ज, दोनों फर्मों के गोदाम सील
मामले की गंभीरता को देखते हुए दवा सुरक्षा अधिकारी दिव्यांनी दुबे ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 'न्यू आरजे' के प्रोपराइटर राजिंदर सिंह और 'एलेक्सर क्योर' के प्रोपराइटर तरनदीप सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।
एफ़आईआर दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने दोनों फर्मों के परिसरों पर धावा बोला और उनके गोदामों को सील कर दिया। गोदाम के अंदर रखे गए पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया गया है ताकि कोई भी सबूत नष्ट न किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जब्त की गई वैक्सीनों को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें वास्तव में कौन सा केमिकल भरा हुआ था।
"दवाइयों के इस अवैध और खतरनाक कारोबार को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। कानपुर से लेकर दिल्ली तक फैले इस नेटवर्क के हर एक चेहरे को बेनकाब किया जाएगा और कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।" — ड्रग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
आगरा और अन्य जिलों तक फैली थी नकली दवाइयों की सप्लाई
प्रारंभिक पूछताछ और दस्तावेजों की छानबीन से यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि कानपुर की इन दोनों संदिग्ध फर्मों का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था। जांच अधिकारियों के अनुसार, इन फर्मों द्वारा आगरा समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य महत्वपूर्ण जनपदों में भी नकली रेबीज इंजेक्शन की भारी खेप सप्लाई की गई थी।
कुत्ता या अन्य जानवर के काटने पर लगाई जाने वाली रेबीज वैक्सीन यदि नकली निकल जाए, तो मरीज की जान पर बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अब उन तमाम अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल स्टोरों की सूची खंगाल रहा है, जिन्होंने इन दोनों फर्मों से दवाइयां खरीदी थीं। प्रशासन की यह कोशिश है कि बाजार में बची हुई सभी नकली वैक्सीनों को जल्द से जल्द वापस मंगाया जाए ताकि किसी भी नागरिक की जान जोखिम में न पड़े।
आगे की कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक चौकसी
इस बड़े खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों के ड्रग इंस्पेक्टरों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य निदेशालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी और नकली दवाओं के निर्माण में लिप्त लोगों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के अभियान चलाया जाए।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से यह पूछताछ करने में जुटी है कि वे यह नकली माल कहां से मंगवाते थे और इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें और खुलकर सामने आ सकेंगी।








