दशलक्षण महापर्व के छठे दिन भक्तिमय माहौल
जैन धर्म के पर्युषण पर्व यानी दशलक्षण महापर्व का उत्साह इन दिनों चरम पर है। पर्व के छठे दिन श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान और निष्ठा के साथ 'उत्तम संयम धर्म' की आराधना की। इस दौरान जैन मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। जैन समाज के लोगों ने सामूहिक पूजन, अर्घ समर्पण और महाआरती कर विशेष भक्ति का अनुभव किया। दशलक्षण महापर्व जैन धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में गिना जाता है, जिसमें दस दिनों तक अलग-अलग धर्मों की आराधना की जाती है।
छठे दिन के कार्यक्रमों की शुरुआत प्रातःकालीन बेला में भव्य कलशाभिषेक के साथ हुई। इसके बाद शहर के प्रमुख जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का दौर शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने अनुशासन और सादगी के साथ पूजा-पाठ में हिस्सा लिया और अपने मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत किया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर जैन मंत्रोच्चार और भक्ति भजनों से गूंज उठा।
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संयम ही आत्मा का असली स्वभाव है: मुनि नियोग सागर
धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संतों के प्रवचन ने श्रद्धालुओं को जीवन का नया पाठ पढ़ाया। आचार्य ज्ञेयसागर और मुनि श्री नियोग सागर महाराज के सानिध्य में आयोजित धर्म सभा में भक्तों को संयম का महत्व बताया गया। मुनि नियोग सागर ने अपने प्रवचन में कहा कि संयम आत्मा का मूल स्वभाव है और इसके बिना सम्यक ज्ञान तथा सम्यक दर्शन की मंजिल प्राप्त नहीं की जा सकती है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि जीवन में अनुशासन और आत्म-नियंत्रण के बिना किसी भी लक्ष्य को पाना असंभव है। क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों पर विजय पाना ही असली संयम है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे अपने दैनिक जीवन में संयम को अपनाएं और दूसरों के प्रति करुणा का भाव रखें। संतों के इन वचनों ने श्रोताओं के मन को गहराई से प्रभावित किया।
"संयम आत्मा का स्वभाव है। इसके बिना सम्यक ज्ञान और सम्यक दर्शन की मंजिल प्राप्त नहीं की जा सकती। संयम का अर्थ आत्म नियंत्रण और आत्म अनुशासन है।" — मुनि नियोग सागर महाराज
अपर बाजार जैन मंदिर में हुए विशेष अनुष्ठान
राजधानी के प्रमुख अपर बाजार जैन मंदिर के बड़े हॉल में सामूहिक पूजन के दौरान सुगंध दशमी व्रत का विशेष पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर में कई परिवारों ने बढ़-चढ़कर धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया और शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त किया। अशोक कुमार, आकाश कुमार, अरिहंत सेठी परिवार, सरोज कुमार और अंकुर कुमार पापड़ीवाल परिवार की ओर से विधि-विधान से शांतिधारा की गई।
इसके साथ ही वासुपूज्य जिनालय में भी निर्मल कुमार, निलेश कुमार सोगानी परिवार, अशोक कुमार, अनील कुमार और सुनील कुमार अजमेरा परिवार की ओर से शांतिधारा संपन्न हुई। सामूहिक पूजन के दौरान अभय कुमार, अजय कुमार, अमित कुमार छाबड़ा परिवार, तेजपाल निर्णय कुमार रॉवका परिवार, अरुण लुहाड़िया परिवार, राकेश कुमार और अंकुश कुमार काला परिवार ने भी विशेष पूजन और अर्चन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
धूप अर्पण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर तीन से शाम छह बजे तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने संसार के आठों कर्मों के नाश की भावना के साथ 24 तीर्थंकरों के समक्ष अग्नि में धूप अर्पण किया। यह प्रक्रिया जैन परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिससे मानसिक शुद्धि और वैराग्य की भावना प्रबल होती है।
शाम ढलते ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का दौर शुरू हुआ। जैन महिला जागृति के सदस्यों की ओर से कई आकर्षक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें भव्य महाआरती के साथ-साथ पारंपरिक डांडिया और धार्मिक प्रश्न मंच प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इन प्रतियोगिताओं में बच्चों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने धार्मिक ज्ञान का परिचय दिया।
कल होगी उत्तम तप धर्म की आराधना
दशलक्षण महापर्व के दौरान हर दिन का अपना एक विशेष महत्व और धार्मिक संदेश होता है। छठे दिन उत्तम संयम की आराधना के बाद, अब महापर्व के सातवें दिन यानी मंगलवार को 'उत्तम तप धर्म' की पूजा की जाएगी। जैन समाज के लोग इस दिन उपवास और विभिन्न प्रकार के तप के माध्यम से अपनी आत्मा को और अधिक शुद्ध करने का प्रयास करेंगे।
इन दस दिनों का यह महापर्व आत्म-निरीक्षण, क्षमा और संयम का संदेश देता है, जो न केवल जैन समुदाय बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक है। इस प्रकार रांची में दशलक्षण महापर्व का छठा दिन पूरी तरह से भक्ति, अनुशासन और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।







