क्रिस्टा पाइक के साथ घटी हालिया घटना ने दुनिया भर के डॉक्टरों और कानूनविदों को चौंका दिया है। मृत्युदंड की सजा पाए किसी कैदी के शरीर पर जहरीले इंजेक्शन का असर न होना और उसका जिंदा बच जाना क्राइम हिस्ट्री में शायद ही कभी देखने को मिला हो। क्लासमेट की हत्या की दोषी पाई गईं क्रिस्टा पाइक को मौत की सजा देने के लिए दो-दो बार जहरीले इंजेक्शन दिए गए, लेकिन उनका शरीर इस घातक जहर को झेल गया।
एक सप्ताह बाद आया होश, डॉक्टरों ने बताया चमत्कार
इस घटना के लगभग एक सप्ताह बाद क्रिस्टा को होश आ गया है और वह बोलने की कोशिश भी कर रही हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना से खुद क्रिस्टा भी हैरान हैं। पाइक की टीम को सलाह देने वाले एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. जोएल ज़िवोट ने बताया कि घातक इंजेक्शन से बचकर निकलने की संभावना लगभग न के बराबर होती है।
डॉ. ज़िवोट ने कहा, "जिन लोगों को यह जानलेवा इंजेक्शन दिया जाता है, उनमें से लगभग सभी की मौत हो जाती है। क्रिस्टा का इस तरह बच जाना पूरी तरह से असामान्य और हैरान करने वाला है।" हालांकि, उनके वकील का कहना है कि उन्हें अभी भी कड़ी सुरक्षा और हथकड़ियों में रखा गया है।
This is a developing story regarding the rare medical anomaly involving lethal injection protocols.
— World News Updates (@NewsUpdate) September 10, 2023
मेडिकल साइंस के सामने खड़े हुए नए सवाल
फोर्डहम लॉ स्कूल की क्रिमिनोलॉजिस्ट और प्रोफेसर डेबोरा डेनो ने इसे मेडिकल साइंस की एक अभूतपूर्व घटना बताया है। उनका कहना है कि यह पहला ऐसा मामला है जहां किसी व्यक्ति के शरीर में विषैला पदार्थ इंजेक्ट किए जाने के बाद भी उसका असर नहीं हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्रिस्टा के खून में पेंटोबार्बिटल की कितनी मात्रा पहुंची थी और क्या वह मात्रा वास्तव में जानलेवा साबित होने के लिए पर्याप्त थी या नहीं। इस घटना के बाद एक बार फिर जानलेवा इंजेक्शन से जुड़ी चिकित्सा अनिश्चितताओं और प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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