उत्तराखंड में मौसम के उतार-चढ़ाव के साथ बढ़ी मौसमी बीमारियों की रफ्तार
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज धूप तो कभी हल्की फुहारों और तापमान में आ रहे बदलाव के कारण लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। इस वेदर चेंज का सीधा असर आमजन की सेहत पर दिख रहा है, जहां एक ओर मौसमी वायरल और जुकाम के मरीज अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खतरनाक माने जाने वाले इन्फ्लुएंजा एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू और डेंगू ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों ने चिकित्सा महकमे की नींद उड़ा दी है, क्योंकि लगातार सामने आ रहे नए मामलों से रिकवरी के बाद भी सक्रिय मरीजों की संख्या बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संक्रमण अक्सर मौसम के संधि काल में सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं। सुबह और शाम की हल्की ठंड और दोपहर की गर्माहट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है, जिससे लोग आसानी से वायरस की चपेट में आ जाते हैं। राजधानी देहरादून में इस संक्रमण का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां स्वास्थ्य निदेशालय और जिला प्रशासन लगातार हालातों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
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देहरादून में स्वाइन फ्लू के मामलों में लगातार इजाफा, आंकड़े पहुंचे 648 के पार
राजधानी देहरादून में इन्फ्लुएंजा एच1एन1 संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हाल ही में की गई सैंपलिंग के दौरान कई नए मरीजों में इस खतरनाक वायरस की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही जिले में कुल स्वाइन फ्लू संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 648 तक पहुंच गया है। राहत की बात यह है कि इनमें से एक बड़ा हिस्सा यानी 600 से अधिक मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो विभिन्न अस्पतालों और होम आइसोलेशन में मिलाकर अभी भी दर्जनों मरीज एक्टिव श्रेणी में अपना इलाज करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर हुई थी या दुर्भाग्यवश जिनकी मौत के मामले सामने आए, उनका प्रॉपर डेथ ऑडिट किया जा चुका है ताकि भविष्य में इस तरह की जटिलताओं से निपटने के लिए बेहतर चिकित्सा प्रोटोकॉल तैयार किया जा सके।
डेंगू के मरीजों की संख्या भी 222 तक पहुंची, मच्छर जनित रोगों पर प्रशासन सख्त
स्वाइन फ्लू के साथ-साथ डेंगू का डंक भी उत्तराखंड के लोगों को परेशान कर रहा है। देहरादून जिले में डेंगू के नए मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। स्वास्थ्य विभाग की दैनिक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में डेंगू के कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या अब 222 हो गई है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा देहरादून स्थानीय क्षेत्र का है, जबकि कुछ अन्य जिलों के मरीज भी यहां इलाज कराने पहुंचे हैं। गनीमत यह है कि अधिकांश मरीज ठीक हो चुके हैं और वर्तमान में केवल कुछ ही मरीज अस्पतालों में भर्ती रहकर चिकित्सकीय देखरेख में हैं।
मच्छर जनित इस बीमारी को रोकने के लिए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें मैदानी इलाकों से लेकर शहरी बस्तियों तक सक्रिय हो गई हैं। जगह-जगह एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है और लोगों को यह समझाया जा रहा है कि वे अपने घरों के आसपास पानी बिल्कुल भी न जमा होने दें।
स्वास्थ्य विभाग का मेगा सर्वे अभियान: घर-घर जाकर की जा रही है लार्वा की जांच
बीमारियों के इस बढ़ते प्रकोप को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के वालंटियर्स की विशेष टीमें बनाकर घर-घर सर्वे का काम तेजी से किया जा रहा है। हाल ही में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत हजारों घरों की सघन तलाशी ली गई और वहां रखे पानी के कंटेनरों, कूलरों तथा टैंकों की बारीकी से जांच की गई।
"मौसमी बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए हमारी टीमें पूरी तरह से मुस्तैद हैं। घर-घर जाकर लार्वा की पहचान की जा रही है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे एहतियात बरतें ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।" — मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देहरादून
जांच के दौरान कई घरों और परिसरों में कूलर और अन्य बर्तनों में मच्छर का लार्वा मिला, जिसे तुरंत मौके पर ही नष्ट करवाया गया। विभाग का मानना है कि जब तक जनता खुद जागरूक होकर अपने आसपास सफाई का ध्यान नहीं रखेगी, तब तक इन बीमारियों पर पूरी तरह से काबू पाना मुश्किल होगा।
कोरोना संक्रमण की स्थिति और भविष्य की एहतियाती तैयारियां
स्वाइन फ्लू और डेंगू के अलावा कोरोना वायरस के छिटपुट मामलों ने भी चिकित्सा अधिकारियों को सतर्क रखा है। हालांकि राहत की बात यह है कि कोविड संक्रमण के मामलों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला है, फिर भी संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर उनकी जांच लगातार की जा रही है। अब तक लिए गए सैंपलों में बहुत कम लोग ही पॉजिटिव पाए गए हैं और उनमें से भी ज्यादातर मरीज पूरी तरह से रिकवर हो चुके हैं।
चिकित्सकों की सलाह है कि बदलते मौसम में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। हल्का बुखार, बदन दर्द, जुकाम या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवा का सेवन करने से बचें। समय पर जांच और सही इलाज से किसी भी गंभीर बीमारी को आसानी से हराया जा सकता है।






