राजधानी दिल्ली में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना
देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के दावों की पोल खोलती एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। सदर बाजार इलाके में 10 साल की एक मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की हदें पार कर दी गईं। यह घटना 16 सितंबर की रात की है, जब एक छोटी सी बच्ची अपनी पढ़ाई के लिए जरूरी सामान खरीदने के लिए घर से बाहर निकली थी। इस वीभत्स घटना ने एक बार फिर अभिभावकों और समाज के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं।
पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बच्ची रात के करीब 11 बजे अपने घर से नोटबुक, पेन और अन्य स्टेशनरी का सामान खरीदने के लिए निकली थी। इस दौरान इलाके का ही एक दुकानदार उसकी मासूमियत भांप नहीं पाया और उसने अपनी घिनौनी मानसिकता का परिचय दिया। आरोपी दुकानदार ने बच्ची को अकेले पाकर उसे बातों में बहलाया और अपनी दुकान के भीतर खींच ले गया, जहां उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।
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हाथ-पैर बांधकर दिया गया खौफनाक वारदात को अंजाम
आरोपी की दरिंदगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने मासूम बच्ची के हाथ-पैर पहले कसकर बांध दिए ताकि वह शोर न मचा सके और किसी से मदद न मांग सके। इसके बाद उसने बच्ची के साथ यौन शोषण किया। इस पूरी घटना के दौरान बच्ची की क्या मानसिक स्थिति रही होगी, इसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। जब बच्ची तय समय पर घर नहीं लौटी और काफी देर हो गई, तो परिजनों की बेचैनी बढ़ गई और उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी।
घटना के तुरंत बाद परिवार और स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस को आपातकालीन नंबर पर सूचना दी गई। पुलिस को जैसे ही पीसीआर कॉल मिली, महकमे में हड़कंप मच गया। सदर बाजार थाना पुलिस, एसीपी सदर बाजार और महिला थाने की विशेष टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन कानूनी कार्रवाई का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया।
त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को दबोचा
पुलिस ने पीड़ित बच्ची और उसके परिवार की शिकायत के आधार पर उत्तर जिले के महिला थाने में मामला दर्ज किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ कड़े पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके अलावा बच्ची को गलत तरीके से बंधक बनाने का मामला भी जोड़ा गया है। पुलिस टीमों ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी की पहचान 56 वर्षीय मकसूद के रूप में की और उसे धर दबोचा।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तमाम आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और आरोपी को उसी दिन अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और मजबूत साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि अदालत में आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। कानून के प्रावधानों के तहत पीड़ित बच्ची की पहचान को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है।
दिल्ली में नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर सवाल
यह अकेली ऐसी घटना नहीं है जिसने राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हों। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े और हालिया घटनाएं इस बात की गवाही देती हैं कि महिलाओं और बच्चों के लिए महानगरों में स्थितियां कितनी चुनौतीपूर्ण होती जा रही हैं। हालांकि अभी नए वर्ष के आधिकारिक आंकड़े आने बाकी हैं, लेकिन पिछले रिकॉर्ड बताते हैं कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में इस तरह के अपराधों का ग्राफ लगातार चिंताजनक बना हुआ है।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से इस प्रकार की मानसिकता को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सामाजिक स्तर पर जागरूकता, नाइट पेट्रोलिंग को और अधिक प्रभावी बनाने तथा माता-पिता द्वारा बच्चों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरतने की सख्त जरूरत है। जब तक समाज का हर व्यक्ति इस तरह के अपराधों के खिलाफ मुखर नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाना मुश्किल होगा।
राजधानी में कुछ दिन पहले सामने आया था एक और वीभत्स मामला
सदर बाजार की इस घटना से ठीक कुछ दिन पहले उत्तर दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके से भी एक नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप और उसकी हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया था। उस घटना में 13 सितंबर की सुबह एक खुले मैदान से बच्ची का शव बरामद हुआ था, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। उस मामले में भी दिल्ली महिला आयोग और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव कानूनी और चिकित्सीय सहायता मुहैया कराने का भरोसा दिया था।
स्वरूप नगर मामले में पुलिस ने आधुनिक तकनीक और करीब 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद एक टेंपो का पता लगाया और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें तीन नाबालिग भी शामिल थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या बच्चों के लिए अब अपने ही घरों के आसपास निकलना भी सुरक्षित नहीं रह गया है? जनता और न्यायप्रिय नागरिकों की यही मांग है कि ऐसे मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को जल्द से जल्द फांसी या आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष और आगे की राह
सदर बाजार और स्वरूप नगर जैसी घटनाएं हमारे समाज के उस काले सच को उजागर करती हैं जहां दरिंदे अपनी हवस के आगे उम्र और मासूमियत का लिहाज भी भूल जाते हैं। इस मामले में पुलिस ने भले ही आरोपी को तेजी से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया हो, लेकिन समाज के तौर पर हमें यह आत्मविश्लेषण करने की जरूरत है कि आखिर हमारी आने वाली पीढ़ियां कितनी सुरक्षित हैं। सख्त कानून, त्वरित न्याय प्रक्रिया और सामाजिक जागरूकता ही इन अपराधों को रोकने का एकमात्र उपाय है।
"बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराध समाज के माथे पर कलंक हैं। पुलिस इस मामले में पुख्ता सबूत जुटा रही है ताकि अदालत में आरोपी को कठोरतम सजा दिलाई जा सके। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।" — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, दिल्ली पुलिस







