देशभर में हर साल 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया जाता है, जिसके तहत गुजरात के केवड़िया स्थित 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के पास एक भव्य और ऐतिहासिक परेड का आयोजन किया जाता है। इस राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए देश के कोने-कोने से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और विभिन्न राज्यों की पुलिस टुकड़ियों के लगभग 6,000 जवान गांधीनगर पहुंचे हैं। ये सभी जवान दिन के समय शहर के प्रमुख इलाकों में अपनी परेड और मार्चपास्ट की कड़ी रिहर्सल कर रहे हैं। हालांकि, इस भव्य तैयारी के बीच एक गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आ गया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है।
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, परेड की तैयारी में जुटे जवानों में से कई की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बरतते हुए बड़े पैमाने पर सैंपलिंग और जांच शुरू की। शुरुआती मेडिकल जांच में दर्जनों जवानों में डेंगू के संक्रमण की पुष्टि हुई है। इन संक्रमित जवानों को तुरंत बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद से सुरक्षा शिविरों और रिहर्सल स्थलों पर विशेष एहतियात बरते जा रहे हैं ताकि संक्रमण अन्य जवानों तक न फैले।
अस्थायी कैंपों में ठहरे हैं हजारों जवान, गिफ्ट सिटी में चल रही है रिहर्सल
गांधीनगर पहुंचने वाले केंद्रीय और राज्य बलों के इन हजारों जवानों के ठहरने के लिए प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है। सभी जवानों को शहर के सेक्टर-28 और सेक्टर-29 में लगभग 1,000 अस्थायी क्वार्टर आवंटित किए गए हैं। ये जवान सुबह होते ही तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार गिफ्ट सिटी परिसर में पहुंचते हैं और वहां घंटों पसीना बहाकर एकता दिवस परेड का अभ्यास करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में जवानों के एक साथ एक ही आवासीय परिसर में रहने के कारण मच्छर जनित बीमारियों के फैलने का जोखिम काफी बढ़ गया था।
जैसे ही कुछ जवानों में बुखार, बदन दर्द और प्लेटलेट्स गिरने जैसे लक्षण सामने आए, वैसे ही मेडिकल टीमों को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शिविरों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और संदिग्ध लक्षणों वाले जवानों को तुरंत आइसोलेट कर उनके ब्लड सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे। रिपोर्ट आने के बाद जब डेंगू के मामलों की पुष्टि हुई, तो स्थानीय नगर निगम ने बिना किसी देरी के मोर्चा संभाल लिया और रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया।
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नगर निगम ने झोंकी पूरी ताकत, छह विशेष टीमें कर रही हैं निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। निगम के मलेरिया और स्वास्थ्य अधिकारियों ने तुरंत प्रभाव से सेक्टर-28 और सेक्टर-29 के पूरे आवासीय परिसर में छह विशेष मेडिकल टीमों को तैनात कर दिया है। ये टीमें घर-घर जाकर हर एक जवान के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी कर रही हैं और जिनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उनका तत्काल उपचार किया जा रहा है।
इसके साथ ही, मच्छरों के खात्मे के लिए बड़े पैमाने पर एंटी-लारवा दवाइयों का छिड़काव और फॉगिंग अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जवानों के रहने वाले सभी एक हजार अस्थायी क्वार्टरों के अंदर और बाहर विशेष रूप से फॉगिंग कराई गई है ताकि वयस्क मच्छरों को नष्ट किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की ग्राउंड यूनिट्स उन तमाम संभावित जगहों की भी सघन जांच कर रही हैं जहां बारिश का पानी या कूलर का पानी इकट्ठा होने से मच्छरों का प्रजनन हो सकता है।
"हम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संक्रमित जवानों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए पूरे परिसर में युद्धस्तर पर सोर्स रिडक्शन और फॉगिंग का काम चल रहा है।" — डॉ. दशरथ भालिया, मनपा मलेरिया स्वास्थ्य अधिकारी
संक्रमण के स्रोत की हो रही है गहन जांच, यात्रा इतिहास खंगाल रहा प्रशासन
सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर इन जवानों को डेंगू का संक्रमण गांधीनगर में पहुंचने के बाद हुआ या वे अपने गृह राज्यों से ही इस बीमारी की चपेट में थे। चूंकि इस परेड में हिस्सा लेने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से जवान पहुंचे हैं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग उनके ट्रेवल हिस्ट्री और मेडिकल बैकग्राउंड को भी खंगाल रहा है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें जवानों को गांधीनगर पहुंचने से पहले ही रास्ते में या अपने मूल तैनाती स्थल पर बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत थी।
चिकित्सकों का कहना है कि बदलते मौसम और मानसून के आखिरी दौर में देश के कई राज्यों में डेंगू का प्रकोप पहले से ही बढ़ हुआ है। ऐसे में यह संभव है कि कुछ जवान यात्रा के दौरान या अपने गृह राज्यों से ही वायरस लेकर यहां पहुंचे हों। बहरहाल, वास्तविक स्रोत का पता लगाने के लिए व्यापक स्तर पर सर्विलांस अभियान जारी है और परिसरों के 500 मीटर के दायरे को केंद्र मानकर सघन जांच की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे को जड़ से खत्म किया जा सके।
निष्कर्ष और आगे की स्थिति
राष्ट्रीय एकता दिवस जैसे देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक की तैयारियों के बीच इस प्रकार का स्वास्थ्य संकट आना निश्चित रूप से एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता ने समय रहते स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है। संक्रमित जवानों के तेजी से स्वास्थ्य लाभ और कैंपों में स्वच्छता के कड़े उपायों के चलते अन्य जवानों को सुरक्षित रखने में सफलता मिल रही है। अधिकारियों का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और तय समय पर एकता दिवस की भव्य परेड का आयोजन किया जाएगा।








