मानसून के बाद क्यों बढ़ जाता है डेंगू और वायरल बीमारियों का खतरा
बारसाती मौसम खत्म होने के साथ ही देश भर में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक देश भर में डेंगू के 94,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद घरों के आसपास या अंदर जरा सा भी पानी जमा होने पर खतरनाक एडीज मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो जाता है। यह मच्छर केवल गंदे पानी में ही नहीं, बल्कि कूलर, गमलों और टूटे-फूटे बर्तनों में भरे साफ पानी में भी तेजी से अंडे देता है।
हाल ही में कई राज्यों से डेंगू के नए मामलों में तेजी आने की खबरें सामने आ रही हैं। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें तेज बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द की शिकायत आम है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में फॉगिंग और एंटी-لارवा छिड़काव तेज करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता सबसे बड़ा बचाव साबित हो रही है। यदि समय रहते पानी जमा होने के स्रोतों को खत्म नहीं किया गया, तो संक्रमण का यह दायरा और अधिक व्यापक हो सकता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डेंगू का मच्छर रात के समय ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी सक्रिय रहता है। इसलिए कामकाजी घंटों के दौरान भी लोगों को पूरी सुरक्षा बरतने की आवश्यकता होती है। घरों की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाने के साथ-साथ दिन के वक्त भी फुल बाजू के कपड़े पहनना और मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी भी लापरवाही परिवार के किसी भी सदस्य को गंभीर रूप से बीमार कर सकती है, इसलिए संक्रमण की इस चेन को तोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।
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डॉक्टरों की सख्त चेतावनी: डेंगू में भूलकर भी न लें खुद से ये दवाएं
बुखार आने पर मेडिकल स्टोर से खुद दवा खरीदकर खाना आम बात है, लेकिन डेंगू के दौर में यह आदत जानलेवा साबित हो सकती है। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों और वायरोलॉजी विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह या डेंगू की पुष्टि के नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) जैसे कि एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या डिक्लोफेनाक का सेवन बिल्कुल न करें। इन दवाओं के इस्तेमाल से शरीर में प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और गंभीर आंतरिक रक्तस्राव (ब्लडिंग) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
चिकित्सकों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ शरीर में भयंकर दर्द महसूस हो रहा है, तो उसे तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बुखार या दर्द को कम करने के लिए केवल पैरासिटामोल का ही सुरक्षित दायरा माना जाता है, वह भी डॉक्टर द्वारा तय की गई खुराक के अनुसार। जरा सी लापरवाही या बिना डॉक्टर की पर्ची के ली गई पेनकिलर मरीज को सीधे अस्पताल के आईसीयू तक पहुंचा सकती है, जहां थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और शॉक जैसी जानलेवा स्थितियां बन सकती हैं।
"यदि आपको लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द और उल्टी जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत अपनी ब्लड जांच कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी पेनकिलर या एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा लेने से बचें, क्योंकि इससे शरीर में ब्लीडिंग का खतरा पैदा हो सकता है।" — डॉ. गुयेन थान बिन्ह, वायरोलॉजी और पैरासिटोलॉजी विशेषज्ञ
अस्पतालों में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां मरीज घर पर ही सेल्फ-मेडिकेशन करते रहे और जब स्थिति बिगड़ गई तब अस्पताल पहुंचे। ऐसे मामलों में इलाज बेहद जटिल हो जाता है, खासकर जब मरीज पहले से किसी अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों। इसलिए स्वास्थ्य महकमा बार-बार यह अपील कर रहा है कि बुखार को सामान्य वायरल समझकर अनदेखा न करें और डॉक्टर की निगरानी में ही सही उपचार लें।
इन शुरुआती लक्षणों को पहचानें और समय पर कराएं मेडिकल जांच
डेंगू और अन्य संक्रामक बुखार के शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचानना मरीज की जान बचाने के लिए सबसे अहम कदम है। आम तौर पर संक्रमण के शुरुआती दिनों में मरीज को तेज ठंड लगकर बुखार आना, माथे और आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द, जोड़ों तथा मांसपेशियों में भयंकर खिंचाव महसूस होना, और त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते उभरना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य फ्लू मानकर टाल देते हैं, जो बाद में खतरनाक रूप ले लेता है।
जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीजों में प्लेटलेट्स काउंट में भारी गिरावट दर्ज होने लगती है। यदि बुखार उतरने के बाद भी अत्यधिक कमजोरी, लगातार पेट में दर्द, बार-बार उल्टी होना, मसूड़ों या नाक से खून आना, अथवा मल में खून आने जैसे गंभीर संकेत दिखें, तो यह इस बात का प्रमाण है कि संक्रमण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में एक पल की भी देरी किए बिना मरीज को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए।
बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कम होती है। यदि घर में इनमें से किसी को भी तेज बुखार की शिकायत हो, तो तुरंत ब्लड टेस्ट करवाकर डॉक्टर की देखरेख में इलाज शुरू करवाएं। समय पर की गई सही जांच और निगरानी ही डेंगू के गंभीर खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है।
घर के आसपास और अंदर मच्छरों के पनपने के इन रास्तों को करें बंद
डेंगू के खिलाफ जंग जीतने का सबसे अचूक उपाय मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, एडीज मच्छर केवल गंदे नालों में नहीं बल्कि हमारे घरों के अंदर रखे साफ पानी में भी पनपते हैं। फ्रिज के नीचे लगी ट्रे, कूलर का पानी, गमलों के नीचे रखी प्लेट, परिंदों को पानी पीने के लिए रखे बर्तन और घर के बाहर रखे पुराने टायर या कबाड़ में जमा पानी इन मच्छरों के लिए सबसे सुरक्षित नर्सरी होते हैं।
प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह सप्ताह में कम से कम एक बार अपने घर और कार्यस्थल की अच्छी तरह जांच करे। कूलर के पानी को पूरी तरह खाली करके सूखा लें, गमलों की प्लेटों में पानी न जमने दें और पानी की टंकियों को हमेशा ढक्कन से कसकर बंद रखें। इसके अलावा, खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जालियां लगवाएं ताकि बाहरी मच्छर अंदर प्रवेश न कर सकें।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी अपने स्तर पर जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन जब तक हर नागरिक खुद जागरूक नहीं होगा, तब तक इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाना कठिन है। अपने आस-पास पानी जमा न होने दें, नियमित रूप से साफ-सफाई रखें और बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाकर ही बाहर भेजें। छोटी-सी सावधानी अपनाकर आप अपने परिवार को इन गंभीर बीमारियों के प्रकोप से सुरक्षित रख सकते हैं।







