मूसलाधार बारिश ने रोकी रफ्तार, भारत पेट्रोलियम के प्लांट में भरा पानी
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस भारी मानसूनी बारिश का सबसे बड़ा असर अब रसोई गैस यानी एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ा है। देवरिया जिले के बैतालपुर में स्थित भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के प्रमुख बॉटलिंग प्लांट परिसर में भारी मात्रा में पानी भर गया है। जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रबंधन को मजबूरन प्लांट का पूरा ऑपरेशन पिछले तीन दिनों से रोकना पड़ा है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्लांट के अंदर पानी का स्तर दो से तीन फीट तक पहुंच गया है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि परिसर के भीतर खड़े गैस से भरे भारी-भरकम टैंकर और सिलेंडर ढोकर ले जाने वाले ट्रक पानी के बीच फंस गए हैं। इन वाहनों को सुरक्षित बाहर निकालना प्लांट कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। किसी भी प्रकार की बड़ी दुर्घटना या तकनीकी खराबी से बचने के लिए सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए एलपीजी रिफिलिंग के कार्य को पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है।
मौसम की इस बेरुखी और कुप्रबंधन के कारण औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी गहरा असर पड़ा है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण हल्की सी भारी बारिश में भी इस तरह के औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव की समस्या खड़ी हो जाती है। प्लांट के भीतर जलभराव होने से न केवल उत्पादन रुका है, बल्कि आने वाले दिनों में गैस सिलेंडरों के वितरण चक्र को दोबारा पटरी पर लाने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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पूर्वांचल के नौ बड़े जिलों में मंडराया रसोई गैस का गंभीर संकट
बैतालपुर स्थित यह बॉटलिंग प्लांट केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र की ऊर्जा और ईंधन आवश्यकताओं का एक मुख्य केंद्र है। इस प्लांट से निकलने वाले रसोई गैस सिलेंडर रोजाना पूर्वांचल के करीब नौ प्रमुख जिलों में भेजे जाते हैं। इनमें देवरिया के अलावा गोरखपुर, कुशीनगर, बलिया, मऊ, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर और आजमगढ़ जिले शामिल हैं। इन सभी जिलों के लाखों उपभोक्ताओं की रसोई का चूल्हा इसी प्लांट से गैस आपूर्ति पर निर्भर करता है।
प्लांट का संचालन पूरी तरह ठप होने के बाद से ही इन सभी नौ जिलों में गैस एजेंसियों के गोदामों पर सिलेंडरों का स्टॉक तेजी से कम होने लगा है। कई गैस एजेंसियों पर तो स्थिति यह हो गई है कि उपभोक्ताओं को बुकिंग कराने के बाद भी दो से तीन दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। जो लोग समय पर सिलेंडर चाहते थे, उन्हें अब खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कमर्शियल गैस का उपयोग करने वाले होटल, रेस्टोरेंट और छोटे ढाबा संचालकों की चिंता भी काफी बढ़ गई है, क्योंकि उनके व्यवसाय पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में स्थिति और भी अधिक गंभीर हो गई है, जहां वितरण वाहनों के न पहुंच पाने के कारण लोगों को घरेलू ईधन की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिनों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
फंसे हुए वाहन और सुरक्षा कारणों से लिया गया बड़ा फैसला
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के इस बॉटलिंग प्लांट में सुरक्षा के कड़े मानक लागू होते हैं, क्योंकि एलपीजी एक अत्यंत ज्वलनशील गैस है। परिसर में पानी भर जाने के कारण इलेक्ट्रिकल पैनल और रिफिलिंग मशीनों में शॉर्ट सर्किट या अन्य गंभीर तकनीकी खतरों की आशंका बढ़ जाती है। इसी उच्चस्तरीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने बिना किसी देरी के प्लांट के सभी ऑपरेशनों को बंद करने का कड़ा फैसला लिया।
प्लांट के अंदर फंसे गैस टैंकरों और मालवाहक ट्रकों की स्थिति ने अधिकारियों की सिरदर्दी बढ़ा दी है। इन वाहनों को निकालने के लिए विशेष क्रेन और भारी पंपिंग मशीनों की सहायता लेनी पड़ रही है। जलभराव के बीच वाहनों के टायरों के डूब जाने के कारण उन्हें खींचना जोखिम भरा साबित हो रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न घटे।
सुरक्षा के प्रति बरती जा रही इस सतर्कता की स्थानीय प्रशासन ने भी पुष्टि की है। अधिकारियों का मानना है कि थोड़ी सी भी लापरवाही एक बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, इसलिए उत्पादन बंद रखना ही इस समय एकमात्र सुरक्षित विकल्प था। हालांकि, इसके चलते जो व्यावसायिक नुकसान और जनसुविधा में बाधा उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई करना प्लांट प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
पानी निकासी का काम युद्धस्तर पर जारी, जल्द बहाली की उम्मीद
इस संकट से निपटने के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के अधिकारी और कर्मचारी पूरी ताकत से जुट गए हैं। प्लांट परिसर से पानी बाहर निकालने के लिए भारी क्षमता वाले कई पंप लगातार काम कर रहे हैं। प्रशासन और प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह जल्द से जल्द परिसर को सूखा करना है ताकि सिलेंडरों की रिफिलिंग का रुका हुआ काम दोबारा शुरू किया जा सके।
मौके पर मौजूद BPCL डिपो इंचार्ज समीउल्लाह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पानी निकासी का अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि जैसे ही स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएगी और परिसर सुरक्षित घोषित कर दिया जाएगा, रिफिलिंग का काम बिना किसी रुकावट के फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
"प्लांट परिसर में अत्यधिक बारिश के कारण हुए जलभराव को बाहर निकालने का काम युद्धस्तर पर जारी है। हम आधुनिक पंपों के माध्यम से पानी की निकासी कर रहे हैं। हालात पूरी तरह सामान्य होते ही रिफिलिंग का कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा और उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।" — समीउल्लाह, डिपो इंचार्ज, BPCL
अधिकारियों की ओर से यह उम्मीद जताई जा रही है कि यदि मौसम ने साथ दिया और बारिश दोबारा नहीं हुई, तो आगामी 24 घंटों के भीतर पानी पूरी तरह से निकाल लिया जाएगा। इसके बाद सुरक्षा जांच पूरी करके गैस सिलेंडरों की सप्लाई लाइन को फिर से चालू कर दिया जाएगा। तब तक के लिए उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे संयम बनाए रखें और घबराकर अनावश्यक बुकिंग न करें, क्योंकि प्रशासन स्थिति को सामान्य करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।





