देशभर में एक तरफ जहां स्वच्छ भारत अभियान और पर्यावरण संरक्षण को लेकर तमाम बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ असामाजिक तत्वों और लापरवाह मेडिकल संचालकों की वजह से आम जनता की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। ताजा मामला एक इलाके से सामने आया है, जहां सड़क किनारे खुले में भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयों और बायो मेडिकल वेस्ट का जखीरा फेंका मिला है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोग स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सड़क किनारे बिखरा मिला बायो मेडिकल वेस्ट और दवाइयों का अंबार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में नहर किनारे स्थित एक नर्सरी के समीप मुख्य मार्ग पर भारी मात्रा में दवाइयां बिखरी पड़ी हैं। किसी राहगीर ने इस लापरवाही का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जो अब इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क के किनारे अनगिनत टेबलेट, कैप्सूल, कफ सिरप की बोतलें और इंजेक्शन के पत्ते खुले आसमान के नीचे बेतरतीब तरीके से फेंके गए हैं।
इन एक्सपायरी दवाइयों को इस तरह सरेआम फेंक दिए जाने से न सिर्फ इलाके की सुंदरता खराब हो रही है, बल्कि यह इंसानी जिंदगी और पर्यावरण के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है। जानकारों का मानना है कि यह किसी बड़े मेडिकल स्टोर, झोलाछाप डॉक्टर या फिर किसी निजी क्लीनिक का कारनामा हो सकता है, जिसने अपनी एक्सपायरी और वेस्ट दवाइयों को ठिकाने लगाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया और इस तरह खुले में फेंक दिया।
संबंधित खबरें
बच्चों और मवेशियों की जान पर मंडरा रहा गंभीर खतरा
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि खुले में पड़ी ये खतरनाक दवाइयां और बायो मेडिकल वेस्ट इलाके के बच्चों और मवेशियों के लिए मौत का बुलावा साबित हो सकते हैं। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे खेलते हुए ऐसी जगहों पर चले जाते हैं और अनजाने में इन खतरनाक दवाओं के संपर्क में आ सकते हैं। इसके अलावा, आवारा पशु (गाय, कुत्ते, बकरे आदि) कचरे की तलाश में यहां पहुंचते हैं और इन जहरीली दवाओं को खाकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
पर्यावरणविदों का भी मानना है कि इस तरह केमिकल और एक्सपायरी दवाओं को जमीन पर या खुले में फेंकने से धीरे-धीरे ये रसायन रिसकर मिट्टी और भूजल में मिल जाते हैं। इससे भूमि की उर्वरता नष्ट होती है और पीने का पानी भी दूषित होने का खतरा पैदा हो जाता है। यह पूरी तरह से बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का खुला उल्लंघन है, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, स्वास्थ्य विभाग से की कड़ी कार्रवाई की मांग
इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और सुस्त रवैये के कारण ही अवैध क्लीनिक चलाने वाले और मेडिकल संचालक इतने बेखौफ हो गए हैं। यदि समय रहते इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह लापरवाही किसी बड़ी आपदा को न्योता दे सकती है।
ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और जिले के ड्रग इंस्पेक्टर को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों की मांग है कि आसपास के सभी मेडिकल स्टोर और क्लीनिकों की सघन जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि यह कचरा आखिर किस नासमझ और गैर-जिम्मेदार शख्स ने फेंका है।
"खुले में बायो मेडिकल वेस्ट और एक्सपायरी दवाइयां फेंकना पूरी तरह से नियम विरुद्ध और दंडनीय अपराध है। हमें इस मामले की अभी आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद तुरंत संज्ञान लिया जा रहा है। इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" — डाॅ. विवेक सिंह, सीएचसी प्रभारी
क्या कहते हैं बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के कड़े नियम?
भारत सरकार के पर्यावरण और स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों के अनुसार, अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट (जैविक चिकित्सीय कचरा) का निस्तारण बेहद वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से किया जाना अनिवार्य है। इसे किसी भी सूरत में आम कचरे के साथ या खुले में नहीं फेंका जा सकता। इसके लिए अधिकृत एजेंसियों की मदद ली जाती है जो इस कचरे को सुरक्षित स्थानों पर नष्ट करती हैं।
नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के लाइसेंस रद्द करने से लेकर भारी जुर्माने और जेल तक का प्रावधान है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह की तस्वीरें सामने आती हैं जो हमारी व्यवस्था की पोल खोल देती हैं।
प्रशासनिक सुस्ती और भविष्य की बड़ी चुनौतियां
इस पूरी घटना ने एक बार फिर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक जिम्मेदार अधिकारी कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगे? जब तक ऐसे लापरवाह और अपराधियों जैसी हरकत करने वाले मेडिकल संचालकों पर मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगना नामुमकिन है।
अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग और ड्रग विभाग की टीम कितनी जल्दी इस मामले की तह तक पहुंचती है और असली दोषियों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजती है। आम जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और त्वरित कार्रवाई देखना चाहती है ताकि भविष्य में कोई भी इंसान या मेडिकल संचालक इस तरह पर्यावरण और सेहत से खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके।






