फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में गहरी होती सेंध, सड़कों पर उतरे हजारों छात्र
फ्रांस में इन दिनों शिक्षा प्रणाली की बदहाली को लेकर अभूतपूर्व आक्रोश देखने को मिल रहा है। देश भर के विभिन्न शहरों में हजारों की संख्या में हाई स्कूल के छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया है और अब यह फ्रांस के मार्सिले, स्ट्रासबर्ग, टूर्स और लिले जैसे प्रमुख शहरों तक फैल चुका है। शुरुआत में गरीब तबके के इलाकों से उठने वाली यह आवाज अब एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिससे सरकार और प्रशासनिक मशीनरी के हाथ-पांव फूल गए हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से कक्षाओं की बदतर हालत, शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। राजधानी पेरिस के बोबिग्नी इलाके में अपने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन में शामिल 18 वर्षीय छात्रा पैरावई कोहेलानाथन ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कक्षाओं में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सी और टेबल तक नहीं मिलते। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब डिजिटल युग में शिक्षा पूरी तरह तकनीक पर निर्भर है, तब उनके स्कूलों के कंप्यूटर या तो काम ही नहीं करते या पूरी तरह बेकार हो चुके हैं।
इस आंदोलन की एक बड़ी वजह शिक्षकों की लगातार गैर-मौजूदगी और स्कूलों में खाली पड़े पद भी हैं। छात्रों का आरोप है कि कई विषयों के शिक्षक अक्सर कक्षाओं से नदारद रहते हैं, जिससे उनकी बोर्ड परीक्षा और नियमित पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। इन तमाम समस्याओं के समाधान के लिए छात्र अब एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं, और इस सिलसिले में देश के 1200 से ज्यादा हाई स्कूल इस आंदोलन की चपेट में आ चुके हैं।
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बजट में शिक्षा पर कटौती और महंगाई का मारक असर
इस देशव्यापी छात्र आंदोलन को हवा देने का काम हाल ही में सरकार द्वारा पेश किए गए नए बजट ने किया है। सरकार ने जब आगामी वर्ष के बजट की घोषणा की, तो उसमें शिक्षा के क्षेत्र में केवल 1.7 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की गई। छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि यह बढ़ोतरी मौजूदा महंगाई दर के मुकाबले बेहद कम है, जिससे स्कूलों के आधुनिकीकरण और रखरखाव पर बुरा असर पड़ेगा। बजट घोषणा के बाद शिक्षा पर कुल खर्च बढ़कर 65.53 अरब यूरो जरूर हुआ है, लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए यह नाकाफी साबित हो रहा है।
शिक्षकों और कर्मचारियों का भी मानना है कि सरकार शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र के बजट में कटौती कर रही है, जिसका सीधा खामियाजा आने वाली पीढ़ी को भुगतना पड़ रहा है। पेरिस के बोबिग्नी के एक शिक्षक एड्रियन प्रूड-होमे ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लगभग सभी शैक्षणिक बजटों में कटौती की जा रही है, जो कि देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने साफ कर दिया है कि शिक्षक अब चुप बैठने वाले नहीं हैं और वे छात्रों के समर्थन में आगामी दिनों में बड़ी हड़ताल की योजना बना रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार का पक्ष रखते हुए शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने दावा किया है कि शिक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बजट में मामूली बढ़ोतरी के पीछे कम आबादी का हवाला दिया है, लेकिन उनके इस स्पष्टीकरण से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत होने के बजाय और अधिक भड़क गया है। छात्रों का कहना है कि सांख्यिकीय तर्कों से उनकी कक्षाओं की गर्मी और खराब कंप्यूटर ठीक नहीं होने वाले।
हिंसा और आगजनी से बिगड़े हालात, पुलिस प्रशासन सख्त
जैसे-जैसे यह आंदोलन आगे बढ़ रहा है, देश के कई हिस्सों में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अब कई जगहों पर हिंसक झड़पों में बदल चुका है। प्रदर्शनकारी छात्र सड़कों पर आगजनी, तोड़फोड़ और प्रशासनिक परिसरों के बाहर घेराबंदी करते नजर आ रहे हैं। दंगा रोधी पुलिस बल को उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसा और आगजनी की घटनाओं के सिलसिले में पांच हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें अधिकांश किशोर शामिल हैं। झड़पों के दौरान सैकड़ों पुलिसकर्मी और छात्र घायल भी हुए हैं। पेरिस के पुलिस प्रमुख ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छात्रों से संयम बरतने और हिंसा के रास्ते से हटने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अराजकता का दौर थमता नहीं है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और अधिक सख्त कदम उठाने को मजबूर होगा।
"हम यह तय कर चुके हैं कि हम अपनी काम करने और पढ़ाई की स्थितियों को लेकर पूरी तरह एकजुट रहेंगे। जब तक सरकार हमारी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करती, तब तक हमारा यह विरोध यूं ही जारी रहेगा।"— पैरावई कोहेलानाथन, प्रदर्शनकारी छात्रा
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने भी बढ़ती अशांति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे अस्वीकार्य हिंसा का माहौल करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक देश में विरोध जताने की छूट है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और कानून हाथ में लेना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है और आने वाले दिनों में शिक्षकों की संभावित हड़ताल से फ्रांस की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष और आगे की राह
फ्रांस में सुलग रही यह विरोध की आग यह साबित करती है कि यूरोप के विकसित देशों में भी बुनियादी नागरिक और शैक्षणिक सुविधाएं किस तरह उपेक्षित हो रही हैं। जब तक सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत के जरिए कोई ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक शैक्षणिक संस्थानों का यह गतिरोध देश की राजनीति और समाज में एक बड़ी चुनौती बना रहेगा। देश के लाखों अभिभावक और शिक्षक अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या सकारात्मक कदम उठाती है।








