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सावधान! पेट के सामान्य दर्द को न करें नजरअंदाज, पित्त की पथरी बन सकती है जानलेवा खतरा

पित्त की पथरी को लंबे समय तक अनदेखा करना एक 54 वर्षीय महिला को भारी पड़ गया। पेट में असहनीय दर्द के बाद जब अस्पताल में जांच हुई, तो डॉक्टरों ने उसके पित्ताशय से 49 पथरी निकालीं।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•4 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•37
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सावधान! पेट के सामान्य दर्द को न करें नजरअंदाज, पित्त की पथरी बन सकती है जानलेवा खतरा
📷 सावधान! पेट के सामान्य दर्द को न करें नजरअंदाज, पित्त की पथरी बन सकती है जानलेवा खतरा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • 54 वर्षीय महिला को लंबे समय से थी पित्त की पथरी की समस्या, इलाज न कराने पर बिगड़ी तबीयत
  • अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर निकाले 4 से 8 मिलीमीटर आकार के 49 स्टोन
  • विशेषज्ञों के मुताबिक हर मामले में सर्जरी जरूरी नहीं, लेकिन लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव और दर्द कई बार किसी बड़ी बीमारी की चेतावनी होते हैं। लोग अक्सर पेट के हल्के-फुल्के दर्द या अपच की समस्या को सामान्य मानकर टाल देते हैं, लेकिन यही लापरवाही बाद में गंभीर मेडिकल इमरजेंसी का रूप ले सकती है। हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपनी सेहत को लेकर बरती गई अनदेखी की भारी कीमत चुकाई। समय पर इलाज न कराने की वजह से उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टरों को सर्जरी करके उसके शरीर से एक-दो नहीं बल्कि पूरे 49 स्टोन निकालने पड़े।

पेट का दर्द बना खतरे की घंटी, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

मामले के अनुसार, 54 साल की एक महिला को काफी समय पहले से ही पित्त की पथरी (Gallbladder Stones) की जानकारी थी। इसके बावजूद उसने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और किसी भी तरह का मेडिकल ट्रीटमेंट कराने से बचती रही। कुछ समय बीतने के बाद उसे पेट के निचले दाहिने हिस्से में अचानक तेज और असहनीय दर्द शुरू हो गया। दर्द जब बर्दाश्त से बाहर हो गया, तब परिजनों ने उसे फु थो प्रांतीय जनरल अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत कई जरूरी मेडिकल टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाए।

जांच रिपोर्ट सामने आने पर डॉक्टरों की टीम भी हैरान रह गई। महिला को पित्ताशय की पथरी के कारण गंभीर पित्ताशयशोथ यानी कोलेसिस्टाइटिस (Cholecystitis) की शिकायत हो चुकी थी। संक्रमण और पथरी की अधिकता के कारण स्थिति काफी संवेदनशील हो चुकी थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने बिना किसी देरी के तुरंत सर्जरी करने का फैसला लिया। चिकित्सा दल ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी प्रक्रिया को अंजाम दिया।

सावधान! पेट के सामान्य दर्द को न करें नजरअंदाज, पित्त की पथरी बन सकती है जानलेवा खतरा
📷 लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ लेती महिला मरीज

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ऑपरेशन के बाद महिला के शरीर से बाहर निकाले गए 49 स्टोन

चिकित्सकों की टीम ने जब सर्जरी की प्रक्रिया पूरी की, तो महिला के पित्ताशय के अंदर से कुल 49 पथरी बरामद हुईं। हैरान करने वाली बात यह थी कि ये सभी स्टोन लगभग 4 से 8 मिलीमीटर आकार के थे। इतनी बड़ी संख्या में पथरी जमा होने की वजह से ही मरीज को पेट में भयानक दर्द का सामना करना पड़ रहा था। समय रहते यदि अस्पताल में भर्ती न कराया जाता, तो यह संक्रमण आसपास के अंगों तक फैल सकता था और जानलेवा साबित हो सकता था।

हालांकि, आधुनिक चिकित्सा तकनीक के कारण यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई। लैप्रोस्कोपिक विधि होने के कारण मरीज को ज्यादा चीर-फाड़ का सामना नहीं करना पड़ा। डॉक्टरों के मुताबिक, इस आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन करने पर मरीजों को कम दर्द होता है और शरीर रिकवरी भी बहुत तेजी से करता है।

तेजी से हुई मरीज की रिकवरी, डॉक्टरों ने दी डिस्चार्ज

सफल सर्जरी के बाद महिला के स्वास्थ्य में काफी तेजी से सुधार देखने को मिला। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उसकी बेहतरीन देखभाल की, जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि ऑपरेशन के महज दूसरे दिन ही महिला ने सामान्य रूप से चलना-फिरना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, वह डॉक्टरों की सलाह के अनुसार सामान्य भोजन भी करने लगी थी। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसे पांचवें दिन सफलतापूर्वक डिस्चार्ज कर दिया।

चिकित्सकों का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिल जाए, तो इस तरह की जटिलताओं से आसानी से बचा जा सकता है। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शरीर के किसी भी अंदरूनी दर्द को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना ही बुद्धिमानी है।

क्या हर पित्त की पथरी के लिए सर्जरी होती है जरूरी?

आम तौर पर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या शरीर में पथरी होने पर ऑपरेशन कराना ही एकमात्र विकल्प है? इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि पित्त की पथरी के हर मामले में सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। जिन लोगों को पित्त की पथरी तो होती है लेकिन उनके शरीर में किसी भी तरह के लक्षण या तकलीफ महसूस नहीं होती, उन्हें तुरंत ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की नियमित निगरानी रखते हैं और समय-समय पर जांच कराने की सलाह देते हैं।

दूसरी ओर, जब पित्त की पथरी की वजह से तीव्र पित्ताशयशोथ, पित्त मार्ग में रुकावट, पित्तवाहिनी में संक्रमण या फिर तीव्र अग्नाशयशोथ जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा होने लगती हैं, तब इलाज के लिए सर्जरी ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका बन जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज की शारीरिक स्थिति का आकलन करके तुरंत उपचार का निर्णय लेते हैं।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी क्यों मानी जाती है बेहतर विकल्प?

पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में आज के समय में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को सबसे बेहतर और आधुनिक तरीका माना जाता है। इस विधि में शरीर पर बड़े चीरे लगाने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि छोटे-छोटे छेदों के जरिए ही ऑपरेशन पूरा कर लिया जाता है। इसके कई बड़े फायदे हैं, जैसे कि मरीज को खून कम बहता है, दर्द बहुत कम होता है और संक्रमण का खतरा भी नगण्य हो जाता है।

"पित्त की पथरी की समस्या को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाए और डॉक्टर की सलाह पर सही कदम उठाया जाए, तो बड़ी से बड़ी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से आसानी से बचा जा सकता है।" — डॉ. मेडिकल एक्सपर्ट, सर्जिकल डिपार्टमेंट

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर रखें पेट का खास ख्याल

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि हमारे खान-पान की आदतें और जीवनशैली सीधे तौर पर हमारे पाचन तंत्र और पित्ताशय को प्रभावित करती हैं। ज्यादा तैलीय, मसालेदार और जंक फूड खाने से पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है, जो आगे चलकर पथरी का रूप ले सकती है। इसलिए अपने आहार में हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त मात्रा में पानी को शामिल करें। यदि पेट के दाहिने हिस्से में कभी भी लगातार दर्द, भारीपन या अपच जैसी समस्या महसूस हो, तो तुरंत किसी अच्छे गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या सर्जन से संपर्क करें ताकि किसी भी बड़े खतरे से समय रहते बचा जा सके।

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